मौसम से फसल को बचाएगा बीमा कवच
राजस्थान में खरीफ 2026 और रबी 2026-27 के लिए पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू हुई है। 41 जिलों में अधिसूचित वाणिज्यिक और बागवानी फसलों का बीमा होगा। किसान अधिकतम 5 प्रतिशत प्रीमियम देकर सुरक्षा पा सकेंगे। कृषि विभाग ने किसानों से अंतिम तारीख का इंतजार नहीं करने और समय रहते फसल का बीमा कराने की अपील की है।
- मौसम की मार से फसल को बचाने के लिए पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू।
- बागवानी फसलों का बीमा कराने पर किसानों को देना होगा महज अधिकतम 5% प्रीमियम।
- 41 जिलों में अधिसूचित वाणिज्यिक और फल-सब्जी की फसलों को मिला सुरक्षा कवच।
Insurance cover will protect crops from the weather : मौसम की अनिश्चितता के बीच किसानों को फसल नुकसान से आर्थिक सुरक्षा देने के लिए राजस्थान सरकार ने पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) लागू की है। यह योजना खरीफ 2026 से रबी 2026-27 तक दो फसल मौसमों के लिए प्रभावी रहेगी। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने किसानों से समय रहते अधिसूचित फसलों का बीमा कराने की अपील की है।

योजना के तहत प्रतिकूल मौसम और अवांछित मौसमी घटनाओं से फसल को होने वाले नुकसान के खिलाफ किसानों को बीमा सुरक्षा मिलेगी। खरीफ 2026 की वाणिज्यिक एवं बागवानी फसलों के बीमा के लिए राज्य सरकार ने 11 अगस्त 2026 को अधिसूचना जारी की थी। योजना के क्रियान्वयन के लिए एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (AIC) को अधिकृत किया गया है।
41 जिलों में फसलों का बीमा
राज्य के सभी 41 जिलों में खरीफ 2026 और रबी 2026-27 के लिए अलग-अलग वाणिज्यिक एवं बागवानी फसलों को अधिसूचित किया गया है। खरीफ सीजन में हरी मिर्च, भिंडी, प्याज, टमाटर, अरंडी, अनार, टिंडा, मेहंदी, संतरा और किन्नू जैसी फसलें योजना के दायरे में हैं।
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रबी 2026-27 में आंवला, बैंगन, सौंफ, फूलगोभी, लहसुन, प्याज, मटर, टमाटर, आलू, अमरूद, नींबू, आम, खरबूजा, तरबूज, बेर, पत्तागोभी, मौसंबी और पपीता सहित कई फसलों का बीमा किया जा सकेगा।
किसान के लिए बीमा लेना स्वैच्छिक
इस योजना का लाभ ऋणी, गैर-ऋणी और पात्र बंटाईदार किसान ले सकते हैं। फसल बीमा करवाना पूरी तरह स्वैच्छिक रखा गया है। ऋणी और गैर-ऋणी किसानों के लिए बीमा कराने में एग्रीस्टैक आईडी जरूरी होगी।
जो ऋणी किसान योजना से बाहर रहना चाहते हैं, उन्हें निर्धारित समय सीमा में संबंधित वित्तीय संस्था को OPT-OUT घोषणा-पत्र देना होगा। ऐसे किसानों के लिए 24 अगस्त 2026 तक घोषणा-पत्र जमा करने की समय सीमा तय की गई है।
इसके अलावा किसान 29 अगस्त 2026 तक अपनी बीमित फसल के नाम में बदलाव करवा सकते हैं। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने जिले में अधिसूचित फसल, बीमित राशि, प्रीमियम दर और बीमा की अंतिम तिथि की जानकारी लेकर समय पर प्रक्रिया पूरी करें।
अधिकतम 5 प्रतिशत प्रीमियम
पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना में वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए किसान को बीमित राशि का अधिकतम 5 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा। इसके ऊपर की निर्धारित प्रीमियम राशि केंद्र और राज्य सरकार नियमानुसार वहन करेंगी। इससे किसानों पर बीमा का अतिरिक्त आर्थिक बोझ सीमित रहेगा।
बैंक से लेकर CSC और डाकघर तक सुविधा
किसान अपने नजदीकी बैंक शाखा, सहकारी संस्था, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), डाकघर या अधिकृत बीमा माध्यम से फसल का बीमा करा सकते हैं।
कृषि विभाग के अनुसार मौसम आधारित बीमा किसानों को संभावित आर्थिक नुकसान से बचाने के साथ कृषि क्षेत्र में जोखिम प्रबंधन को मजबूत करता है। बीमा सुरक्षा मिलने से किसान आधुनिक कृषि गतिविधियों और बेहतर उत्पादन तकनीकों को अपनाने के लिए भी अधिक सुरक्षित महसूस कर सकते हैं।
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विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें। अपने जिले में अधिसूचित वाणिज्यिक और बागवानी फसलों की जानकारी लेकर समय रहते बीमा करवाएं, ताकि खराब मौसम की स्थिति में संभावित आर्थिक नुकसान के खिलाफ सुरक्षा मिल सके।



