‘आरोहण’ में देवनानी का युवाओं को संदेश, राष्ट्र निर्माण में निभाएं सक्रिय भूमिका

जयपुर में राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस पर आयोजित ‘आरोहण’ कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने युवाओं से राष्ट्र निर्माण, चरित्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। उन्होंने आधुनिक तकनीक के साथ भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों को अपनाने पर जोर देते हुए अनुशासन और समय पालन का भी प्रेरक संदेश दिया।

  • आरोहण कार्यक्रम में देवनानी ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया।
  • राष्ट्र निर्माण के लिए चरित्र, अनुशासन और संस्कारों को बताया सबसे अहम।
  • देवनानी ने एआई के उपयोग को भारतीय संस्कृति और मूल्यों के अनुरूप अपनाने की सलाह दी।

Devnani’s message to the youth at ‘Aarohan’ : राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस के अवसर पर जयपुर स्थित एस.एस. जैन सुबोध आर्ट्स एवं कॉमर्स कॉलेज में आयोजित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के ‘आरोहण’ कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य मजबूत, संस्कारित और कर्तव्यनिष्ठ विद्यार्थियों के हाथों में है।

‘आरोहण’ में देवनानी का युवाओं को संदेश, राष्ट्र निर्माण में निभाएं सक्रिय भूमिका
Image Source : Via Dipr

अपने संबोधन में देवनानी ने कहा कि विद्यार्थी केवल शिक्षा प्राप्त करने वाला नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे आधुनिक ज्ञान और तकनीक के साथ भारतीय संस्कृति, भाषा, परंपरा और जीवन मूल्यों से भी गहराई से जुड़े रहें।

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उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि नई तकनीकों का उपयोग भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए। युवाओं को समय-समय पर अपने कार्यों का आत्ममूल्यांकन करते हुए भविष्य की दिशा तय करनी चाहिए।

देवनानी ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का स्मरण करते हुए कहा कि आत्मविश्वास, चरित्र और राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण युवा ही देश को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से गरीब और जरूरतमंद लोगों के प्रति संवेदनशील रहने तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का भी आह्वान किया।

अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि सार्वजनिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से हुई और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय रहते हुए उन्हें अनुशासन, संगठन, राष्ट्रसेवा और समाज के प्रति समर्पण की प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया जीवनभर चलती रहती है और यही एक सच्चे विद्यार्थी की पहचान है।

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कार्यक्रम के दौरान देवनानी ने अनुशासन और समय की महत्ता का भी उदाहरण प्रस्तुत किया। वे निर्धारित समय पर कार्यक्रम स्थल पहुंचे और तय 21 मिनट के भीतर अपना संबोधन पूरा किया। उन्होंने कहा कि समय का सम्मान करना सार्वजनिक जीवन और नेतृत्व की सबसे महत्वपूर्ण आदतों में शामिल है।

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