डिजीवन फॉरेस्ट स्टैक पर CS का फोकस, AI से जुड़ेगा सिस्टम
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने डिजीवन फॉरेस्ट स्टैक की समीक्षा करते हुए फील्ड कार्यालयों की कार्यप्रगति की मानकों के आधार पर रैंकिंग और नियमित निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने डिजीवन को अन्य विभागों के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नए उपयोग तलाशने और वन विभाग के कार्मिकों को तकनीकी प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया तेज करने को कहा।
- डिजीवन फॉरेस्ट स्टैक की कार्यप्रगति पर मुख्य सचिव ने ली समीक्षा।
- AI इंटीग्रेशन और दूसरे विभागों के पोर्टल से डेटा जोड़ने पर जोर।
- फील्ड कार्यालयों की रैंकिंग और कार्मिकों के प्रशिक्षण को गति देने के निर्देश।
CS’s focus on the DigiVan Forest Stack : राजस्थान में वन विभाग के कामकाज को और अधिक डिजिटल एवं डेटा आधारित बनाने की दिशा में डिजीवन फॉरेस्ट स्टैक को लगातार विकसित किया जा रहा है। शुक्रवार को शासन सचिवालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में हुई बैठक में इसकी प्रगति के साथ पहले दिए गए निर्देशों पर हुई कार्रवाई की विस्तार से समीक्षा की गई।
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बैठक में फील्ड स्तर पर काम की निगरानी को ज्यादा प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्य सचिव के निर्देश पर फील्ड कार्यालयों की क्राइटेरिया बेस्ड रैंकिंग का बीटा वर्जन तैयार कर विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है। इसमें ई-फाइल निस्तारण में लगने वाला समय, ऑनलाइन एनओसी, नर्सरी से पौधों की बिक्री, ऑनलाइन वन अपराध निस्तारण, पौधारोपण स्थल का निरीक्षण, कैडस्ट्रल डिजिटाइजेशन और डिजीवन के उपयोग जैसे मानकों को शामिल किया गया है।

मुख्य सचिव ने ऑनलाइन फॉरेस्ट नर्सरी सर्विस की भी सराहना की। इस सुविधा के जरिए आम लोग घर बैठे पौधों की बुकिंग कर सकते हैं। बैठक में अधिकारियों को फील्ड कार्यालयों के प्रदर्शन की नियमित मॉनिटरिंग करने और बेहतर कार्यप्रणाली को दूसरे कार्यालयों में भी अपनाने के निर्देश दिए गए।
दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ेगा डिजीवन
डिजीवन को दूसरे सरकारी डिजिटल सिस्टम से जोड़ने की दिशा में भी काम आगे बढ़ रहा है। बैठक में बताया गया कि राजस्व विभाग के भू-अभिलेख, ग्रामीण विकास विभाग के हरियालो राजस्थान एप्लीकेशन और वित्त विभाग के आईएफएमएस-वॉम के साथ एपीआई इंटीग्रेशन की कार्रवाई चल रही है। इससे अलग-अलग विभागों से संबंधित डेटा के इस्तेमाल और सूचनाओं के आदान-प्रदान को अधिक सुगम बनाया जा सकेगा।
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इसके साथ ही डिजीवन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी काम शुरू किया गया है। इसके लिए एक विशेष कार्यदल गठित किया गया है। यह टीम बेहतर डेटा एनालिटिक्स, निगरानी और निर्णय लेने में सहायता के लिए संभावित नए यूज केस तलाशेगी।
बेस्ट प्रैक्टिस पर नियमित वेबिनार
अधिकारियों को डिजीवन की मासिक प्रगति की समीक्षा के साथ नए यूज केस और सफल कार्यप्रणालियों पर नियमित वेबिनार आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए। इसका उद्देश्य फील्ड कार्यालयों में किए जा रहे अच्छे प्रयोगों को साझा करना और उन्हें दूसरे क्षेत्रों में लागू करना है।
डिजीवन फॉरेस्ट स्टैक का डेमो जयपुर में 1 और 2 जुलाई को आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन में भी किया गया था। बैठक में बताया गया कि डिजीवन के समग्र प्रबंधन की जिम्मेदारी पीसीसीएफ (आईटी) स्तर पर सुनिश्चित की गई है, जबकि इसके रखरखाव से संबंधित कार्य प्रोजेक्ट डायरेक्टर (CRESEP) के कार्यालय द्वारा किया जा रहा है।
200 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षण
डिजिटल सिस्टम के प्रभावी इस्तेमाल के लिए वन विभाग के कार्मिकों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। बैठक में बताया गया कि अब तक 200 से अधिक फील्ड अधिकारियों को ऑफलाइन प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण में डिजीवन के नए मॉड्यूल, खासकर वाइल्डलाइफ हैबिटेट मॉनिटरिंग और ग्रीन एवं कार्बन क्रेडिट मैनेजमेंट को भी शामिल किया गया है।
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मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से जमीनी स्तर पर कार्मिकों को प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया भी जारी है। अधिकारियों के अनुसार अगले चरण में सात दिन की अवधि में फील्ड स्तर पर प्रशिक्षण पूरा कराने की कार्रवाई की जा रही है।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग आनंद कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं हैड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स अरिजीत बनर्जी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रशासन) पवन कुमार उपाध्याय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (आईटी) अनुराग भारद्वाज, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के.सी.ए. अरुण प्रसाद सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।



