राजस्थान के खनन क्षेत्रों की बदलेगी तस्वीर, मुख्य सचिव ने DMFT फंड को लेकर दिए ये सख्त निर्देश

राजस्थान में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास को गति देने के लिए DMFT फंड के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पर्यावरण और कौशल विकास जैसे कामों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वीकृत कार्यों की गुणवत्ता, पर्याप्त बजट और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने की जरूरत बताई।

  • DMFT फंड से खनन प्रभावित क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास और गुणवत्तापूर्ण कार्यों पर विशेष जोर दिया जाएगा।
  • मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने अधिकारियों को 5 साल का मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
  • सालाना 1600 करोड़ औसतन प्राप्त होने वाली इस राशि से खनन क्षेत्रों की सड़कों, स्कूलों और पेयजल योजनाओं को मजबूती मिलेगी।

The face of Rajasthan’s mining areas will change : राजस्थान में खनन से प्रभावित गांवों और वहां रहने वाले लोगों के लिए DMFT फंड के इस्तेमाल को अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शुक्रवार को सचिवालय में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट की राज्य स्तरीय समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए फंड से होने वाले कार्यों में गुणवत्ता और प्राथमिकता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।

राजस्थान के खनन क्षेत्रों की बदलेगी तस्वीर, मुख्य सचिव ने DMFT फंड को लेकर दिए ये सख्त निर्देश
Image Source : Via Dipr

मुख्य सचिव ने कहा कि DMFT फंड का इस्तेमाल केवल राशि खर्च करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका वास्तविक लाभ खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों तक पहुंचे, इसके लिए पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण तथा युवाओं और महिलाओं के कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में जरूरत के हिसाब से काम किए जाएं।

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उन्होंने खनन क्षेत्र के गांवों में सड़क और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कामों को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए। उनका कहना था कि किसी कार्य को मंजूरी देते समय यह सुनिश्चित किया जाए कि उपलब्ध राशि से वह काम पूरी तरह पूरा हो सके। वित्त विभाग को भी कार्यों की प्राथमिकता और गुणवत्ता के आधार पर राशि स्वीकृत करने तथा प्रभावी मॉनिटरिंग की व्यवस्था करने को कहा गया।

मुख्य सचिव ने कहा कि DMFT फंड खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने का माध्यम बनना चाहिए। इसके लिए जिला कलेक्टरों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे और उनके साथ फंड के उपयोग की नियमित समीक्षा भी की जाएगी।

उन्होंने खनन क्षेत्रों में DMFT फंड के दीर्घकालीन उपयोग के लिए पांच वर्षीय योजना तैयार करने की आवश्यकता भी बताई। इससे विकास कार्यों को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने और स्थानीय जरूरतों के अनुसार संसाधनों का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस अपर्णा अरोरा ने DMFT फंड की व्यवस्था और उपलब्ध राशि की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मेजर मिनरल लीज से मिलने वाली रॉयल्टी का 30 प्रतिशत और माइनर मिनरल लीज से मिलने वाली रॉयल्टी का 10 प्रतिशत हिस्सा इस फंड में आता है।

नियमों के अनुसार DMFT से होने वाले कार्यों में खनन क्षेत्र से 15 किलोमीटर तक के इलाके को प्राथमिकता दी जाती है। जरूरत होने पर 15 से 25 किलोमीटर के क्षेत्र में भी काम कराए जा सकते हैं। पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और पर्यावरण जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के अलावा फंड की 30 प्रतिशत राशि से सड़क और अन्य आधारभूत संरचना से जुड़े काम किए जाने का प्रावधान है।

राज्य में DMFT फंड के तहत हर साल औसतन करीब 1,600 करोड़ रुपये प्राप्त होते हैं। संबंधित जिलों में अब तक 11,435 करोड़ 81 लाख रुपये के कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 6,718 करोड़ 28 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

अपर्णा अरोरा ने कहा कि जिला कलेक्टरों को खनन प्रभावित क्षेत्रों में काम स्वीकृत करते समय प्राथमिकताएं स्पष्ट रूप से तय करनी होंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फंड से प्रभावित गांवों में विकास कार्य और जरूरी आधारभूत सुविधाएं तेजी से उपलब्ध हो सकें।

बैठक में वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के एसीएस दिनेश कुमार, शिक्षा विभाग के एसीएस राजेश यादव और सार्वजनिक निर्माण विभाग के एसीएस प्रवीण गुप्ता ने भी सुझाव दिए। भारत सरकार के निदेशक नितिन पाण्डे ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से DMFT पोर्टल पर आवश्यक जानकारी साझा की जा रही है।

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विशिष्ट सचिव माइंस नम्रता वृष्णि ने बैठक में DMFT के तहत स्वीकृत कार्यों और उनकी प्रगति की विस्तृत जानकारी दी। बैठक में योजना सचिव रविकुमार सुरपुर, PHED सचिव राजन विशाल, वित्त सचिव व्यय टीना सोनी, निदेशक माइंस एमपी मीणा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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