EWS नियमों में बदलाव की मांग
EWS आरक्षण को लेकर राजस्थान में नियमों को ज्यादा व्यावहारिक बनाने की मांग उठी है। विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने केंद्र से आय और संपत्ति की शर्तों की समीक्षा, राज्य के प्रमाण-पत्रों को केंद्रीय सेवाओं में मान्यता, प्रमाण-पत्र की अवधि बढ़ाने और विद्यार्थियों को सुविधाएं देने की मांग की है। साथ ही पंचायत चुनावों में EWS वर्ग को प्रतिनिधित्व देने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है।
- EWS आरक्षण: आय और संपत्ति से जुड़े मौजूदा नियमों की समीक्षा की मांग।
- प्रमाण-पत्र: राज्य के EWS प्रमाण-पत्र को केंद्रीय सेवाओं में मान्यता देने की मांग।
- पंचायत चुनाव: EWS वर्ग के लिए प्रतिनिधित्व का प्रावधान करने पर जोर।
EWS Rules Review Demand : जयपुर में मंगलवार को EWS आरक्षण व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार से नियमों में व्यावहारिक बदलाव की मांग उठाई गई। शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि देश के अलग-अलग राज्यों की भौगोलिक, कृषि और आर्थिक परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। ऐसे में संपत्ति और जमीन से जुड़े समान मानदंड कई क्षेत्रों में आर्थिक स्थिति का सही आकलन नहीं कर पाते।

विज्ञप्ति में राज्य स्तर पर जारी EWS प्रमाण-पत्रों को केंद्रीय नौकरियों और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में भी मान्यता देने की मांग की गई है। इसके पीछे तर्क दिया गया है कि अभ्यर्थियों को केंद्र और राज्य के लिए अलग-अलग प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया से राहत मिल सके। राजस्थान में कुछ जिलों में EWS प्रमाण-पत्र से जुड़ी शर्तों को पहले सरल किया जा चुका है।
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भाटी ने EWS प्रमाण-पत्र की वर्तमान एक वर्ष की वैधता बढ़ाकर तीन या पांच वर्ष करने का प्रस्ताव भी रखा है। मांग है कि निर्धारित शर्तों के तहत शपथ-पत्र के आधार पर नवीनीकरण की सुविधा मिले, ताकि हर साल पूरी प्रक्रिया दोहराने की जरूरत न पड़े। साथ ही EWS अभ्यर्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु सीमा, आवेदन शुल्क और लागू होने पर न्यूनतम अर्हता में उचित छूट देने की मांग की गई है।

प्रेस विज्ञप्ति में EWS परिवारों की आय तय करने की प्रक्रिया को भी सरल बनाने की जरूरत बताई गई है। खासकर विवाहित महिला अभ्यर्थियों के मामले में मायके और ससुराल से जुड़े दस्तावेजों के कारण आने वाली प्रशासनिक दिक्कतों का उल्लेख किया गया है। मांग है कि आय निर्धारण के स्पष्ट और व्यावहारिक नियम बनाए जाएं।
इसके अलावा EWS विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, छात्रावास और अन्य शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराने तथा इस वर्ग से जुड़े नीतिगत मामलों के समाधान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संस्थागत व्यवस्था बनाने की मांग रखी गई है। पंचायत चुनावों में भी EWS वर्ग के लिए उचित प्रतिनिधित्व का प्रावधान करने की बात कही गई है।
विज्ञप्ति के अनुसार, राजस्थान के 75 से अधिक विधायकों ने इन मांगों के समर्थन में लिखित सहमति या समर्थन पत्र दिए हैं। सांसदों से भी व्यक्तिगत संपर्क कर विषय से अवगत कराने और समर्थन का आश्वासन मिलने की बात कही गई है।
जारीकर्ता: रविन्द्र सिंह भाटी, विधायक शिव, बाड़मेर



