नेत्रदान की अलख जगाने के लिए आई बैंक की ग्रामीण क्षेत्रों में नई पहल
जयपुर के सांभर ब्लॉक स्थित खेड़ीराम ग्राम में नेत्र स्वास्थ्य जांच और नेत्रदान जागरूकता शिविर आयोजित हुआ। शिविर में 178 लोगों ने जांच और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया। जरूरतमंदों को चश्मे व दवाइयां बांटी गईं, जबकि मोतियाबिंद और कॉर्निया से जुड़ी समस्या वाले मरीजों की पहचान हुई। नेत्रदान के महत्व को समझकर 57 लोगों ने संकल्प-पत्र भी भरे।
- नेत्रदान को लेकर गांव-गांव जागरूकता अभियान।
- खेड़ीराम ग्राम शिविर में 178 लोगों ने लिया लाभ।
- 57 लोगों ने भरा नेत्रदान संकल्प-पत्र।
Eye bank’s new initiative in rural areas to raise awareness about eye donation : राजस्थान में नेत्रदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए अब ग्रामीण इलाकों तक अभियान पहुंचाया जा रहा है। इसी कड़ी में आई बैंक सोसाइटी ऑफ राजस्थान ने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से सांभर ब्लॉक के खेड़ीराम ग्राम में नेत्र स्वास्थ्य जांच एवं नेत्रदान जागरूकता शिविर लगाया।

पंचायत भवन में आयोजित शिविर में कुल 178 लोगों ने नेत्र जांच और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। इस दौरान जरूरतमंद लोगों को 74 चश्मे वितरित किए गए, जबकि 110 लाभार्थियों को आवश्यक दवाइयां दी गईं।
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जांच के दौरान 10 लोगों में मोतियाबिंद की समस्या सामने आई। वहीं, कॉर्निया से संबंधित एक मरीज की भी पहचान हुई। उसे बेहतर उपचार के लिए एसएमएस अस्पताल जाने की सलाह दी गई।
आई बैंक सोसाइटी ऑफ राजस्थान के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईपीएस बीएल शर्मा ने बताया कि अभियान का उद्देश्य उन ग्रामीण क्षेत्रों तक नेत्रदान का संदेश पहुंचाना है, जहां अभी तक इस विषय को लेकर पर्याप्त जागरूकता नहीं पहुंच सकी है। इसके साथ ही ग्रामीणों को समय पर नेत्र रोगों की पहचान, उपचार और उचित चिकित्सकीय मार्गदर्शन उपलब्ध कराना भी अभियान का अहम हिस्सा है।
शिविर में नेत्रदान के महत्व को समझाने के लिए एक लघु फिल्म भी दिखाई गई। इसका ग्रामीणों पर सकारात्मक असर देखने को मिला और 57 लोगों ने नेत्रदान के लिए संकल्प-पत्र भरे।
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इस वर्ष की शुरुआत से अब तक आई बैंक सोसाइटी ऑफ राजस्थान की ओर से ऐसे पांच शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। खेड़ीराम शिविर में ऑप्टोमेट्रिस्ट देवेंद्र भादू ने लाभार्थियों की आंखों की जांच की। आयोजन को सफल बनाने में सरपंच ममता देवी, मैनेजर संतोष कुमार, डिप्टी मैनेजर मनीषा, सहायक मैनेजर रामदयाल और समाजसेवी गजानंद की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।



