ग्रामीण युवाओं को रोजगार पर जोर, उद्योगों से जुड़ेंगे तकनीकी संस्थान
अयोध्या में लघु उद्योग भारती की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में डॉ. कृष्ण गोपाल ने ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने आईआईटी, एनआईटी और तकनीकी संस्थानों को उद्योगों से जोड़ने, स्किल गैप दूर करने तथा पलायन रोकने की जरूरत बताई। बैठक में एमएसएमई, एआई, रक्षा क्षेत्र, आरएंडडी और टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
- ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार सृजन को प्राथमिकता देने पर जोर।
- तकनीकी संस्थानों और इंडस्ट्री के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत।
- एमएसएमई क्षेत्र में स्किल गैप दूर करने के लिए कौशल केंद्रों पर जोर।
Emphasis on employment for rural youth : लघु उद्योग भारती की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक अयोध्या धाम में संपन्न हुई। बैठक में देशभर से आए उद्यमियों ने सूक्ष्म और लघु उद्योगों के विकास, तकनीकी बदलाव तथा रोजगार से जुड़े मुद्दों पर मंथन किया। 8 सितंबर को हुए समापन कार्यक्रम में प्रख्यात चिंतक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित कर उनके लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार करने की जरूरत बताई।
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डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में युवा गांवों से शहरों और विदेशों की ओर जा रहे हैं। कई इलाकों में पलायन के कारण गांवों की आबादी तक प्रभावित हो रही है। ऐसे में युवाओं को उनके क्षेत्र में ही प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने उद्यमियों से इस दिशा में अपनी भूमिका बढ़ाने का आह्वान किया।
उन्होंने देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों और उद्योग जगत के बीच बेहतर तालमेल की कमी पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार आईआईटी, एनआईटी सहित अन्य उच्च तकनीकी संस्थानों में तैयार होने वाली प्रतिभाओं और इंडस्ट्री की वास्तविक जरूरतों के बीच पर्याप्त संवाद नहीं हो पा रहा है। सरकार बड़ी राशि खर्च कर युवाओं को तकनीकी शिक्षा देती है, लेकिन कई प्रतिभाएं आगे की पढ़ाई या रोजगार के लिए विदेश चली जाती हैं। दूसरी ओर विदेशों में नई तकनीक सीखकर लौटने वाले युवाओं की विशेषज्ञता का पर्याप्त लाभ घरेलू उद्योगों तक नहीं पहुंच पाता।
डॉ. कृष्ण गोपाल ने कानपुर और दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों स्थानों पर आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान हैं और इनके आसपास हजारों उद्योग संचालित होते हैं। इसके बावजूद उद्योगों की बदलती जरूरतों, तकनीक और कौशल को लेकर संस्थानों तथा इंडस्ट्री के बीच नियमित संवाद को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऐसा समन्वय बढ़ने से युवाओं की शिक्षा और रोजगार की जरूरतों के बीच मौजूद अंतर को कम किया जा सकता है।
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उन्होंने लघु उद्योग भारती की ओर से कौशल विकास के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। बताया गया कि एमएसएमई सेक्टर को प्रशिक्षित और दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कई राज्यों में कौशल केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही आईटीआई के पाठ्यक्रमों की समीक्षा कर उन्हें वर्तमान उद्योगों की जरूरत और नई तकनीकों के अनुरूप अपडेट करने की प्रक्रिया पर भी काम किया जा रहा है। उन्होंने युवाओं से नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहने की अपील की।
राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव नरेश पारीक ने जयपुर पहुंचकर बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को मजबूत बनाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। 28 प्रांतों के पदाधिकारियों ने संगठन की गतिविधियों और कार्यों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। विशेष सत्रों में एआई एवं व्यापार, रक्षा क्षेत्र में एमएसएमई के लिए अवसर, आरएंडडी और तकनीक के साथ-साथ सिडबी की एमएसएमई योजनाओं पर भी चर्चा हुई।
इससे पहले आयोजित क्षेत्रीय उद्यमी सम्मेलन में उत्तर प्रदेश सरकार के एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी, ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा, लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री प्रकाश चंद्र, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष वजूभाई वघासिया, बलदेव भाई प्रजापति और घनश्याम ओझा, राष्ट्रीय अध्यक्ष मधुसूदन दादू, राष्ट्रीय महासचिव ओमप्रकाश गुप्ता, राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव एवं उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष राकेश गर्ग, प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र सिंह और प्रदेश महासचिव अमित अग्रवाल सहित देशभर से 300 से अधिक उद्यमी शामिल हुए।
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बैठक में राजस्थान की ओर से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं कोटा के प्रमुख उद्यमी ताराचंद गोयल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शांतिलाल बालड़, प्रदेश उपाध्यक्ष अंजू सिंह, प्रदेश महासचिव सुधीर गर्ग, प्रदेश कोषाध्यक्ष अरुण जाजोदिया, जोधपुर प्रांत अध्यक्ष बालकिशन परिहार, सचिव सुरेश विश्नोई, चित्तौड़ अंचल अध्यक्ष महेश हुरकट, जयपुर अंचल अध्यक्ष महेंद्र मिश्रा और सचिव सुनीता शर्मा की भी मौजूदगी रही।



