एकात्म मानवदर्शन में नारी की बराबर भागीदारी पर जोर
जयपुर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती पर ‘एकात्म मानवदर्शन एवं स्त्री विमर्श’ विषय पर विशेष व्याख्यान हुआ। दीया कुमारी ने महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वावलंबन और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी को समाज की प्रगति से जोड़ा। स्मृति ईरानी ने भी महिला सशक्तीकरण के लिए शिक्षा, कौशल, रोजगार, नेतृत्व और आर्थिक आत्मनिर्भरता को जरूरी बताया।
- एकात्म मानवदर्शन में निहित है नारी की गरिमा और स्त्री विमर्श का सच्चा आधार।
- दीया कुमारी और स्मृति ईरानी ने कहा- निर्णय प्रक्रिया और नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी जरूरी।
- जयपुर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर आयोजित महिला सम्मेलन में विचारकों का मंथन।
Emphasis on the equal participation of women in Integral Humanism : पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के अवसर पर रविवार को कांस्टीट्यूशनल क्लब में ‘एकात्म मानवदर्शन एवं स्त्री विमर्श’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समारोह समिति के महिला प्रकोष्ठ की ओर से हुए कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी मुख्य अतिथि रहीं, जबकि भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुईं।

कार्यक्रम में महिलाओं की सामाजिक भूमिका, शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और निर्णय लेने की क्षमता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। दीया कुमारी ने कहा कि भारतीय समाज के विकास में महिलाओं की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। उनके अनुसार महिलाओं को समान अवसर देने के साथ नेतृत्व की भूमिकाओं में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना भी जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियों के साथ सामाजिक, प्रशासनिक और दूसरे क्षेत्रों में भी अपनी भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में शिक्षा, सुरक्षा, स्वावलंबन और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी को मजबूत करना समाज की प्रगति के लिए अहम है।
स्मृति ईरानी ने कहा कि महिला सशक्तीकरण को केवल सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने शिक्षा और कौशल विकास के साथ रोजगार, उद्यमिता, नेतृत्व तथा निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की प्रभावी भागीदारी को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं अपने फैसले खुद लेने में सक्षम होती हैं, तो उसका असर परिवार से आगे समाज और आने वाली पीढ़ियों तक दिखाई देता है।
एकात्म मानवदर्शन की अवधारणा का उल्लेख करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि व्यक्ति का विकास परिवार, समाज और राष्ट्र से अलग करके नहीं देखा जा सकता। इसी व्यापक दृष्टिकोण से महिलाओं की भूमिका को भी समझने की जरूरत है। उन्होंने महिला शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता को महत्वपूर्ण बताते हुए सामाजिक जागरूकता, संवाद और संस्थागत प्रयासों को बढ़ाने पर जोर दिया।
समिति के अध्यक्ष प्रो. मोहन लाल छीपा ने कहा कि एकात्म मानवदर्शन व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र के समग्र विकास की अवधारणा पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भारतीय चिंतन परंपरा में नारी को समाज की सक्रिय शक्ति के रूप में देखा गया है और बदलते समय में महिला सहभागिता के नए आयामों पर चर्चा जरूरी है।
विशिष्ट अतिथि संगीता जांगिड़ ने महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी को परिवार एवं समाज की प्रगति से जोड़ते हुए इसके विस्तार की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं नीता बूथरा ने कहा कि स्त्री विमर्श को भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों के साथ समझने की जरूरत है।
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कार्यक्रम का संचालन नर्बदा इन्दौरिया ने किया। इस दौरान समिति के उपाध्यक्ष नीरज कुमावत, गजेंद्र ज्ञानपुरिया, सचिव प्रतापभानू सिंह शेखावत, राजेश रावत, डॉ. जय सिंह राठौड़, अम्बरीष प्रजापति सहित महिला प्रकोष्ठ के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद् और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाएं एवं नागरिक मौजूद रहे।



