नर्मदा विवाद पर ऐतिहासिक समझौता, चार राज्यों ने खत्म किया वर्षों पुराना मामला
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश ने नर्मदा अवॉर्ड से जुड़े लंबित भुगतान विवाद के समाधान पर ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। वन-टाइम सेटलमेंट के जरिए वर्षों से लंबित मसले का निपटारा हुआ, जिसे सहकारी संघवाद और राज्यों के बेहतर समन्वय की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
- नर्मदा समझौता से चार राज्यों का वर्षों पुराना विवाद सुलझा।
- अमित शाह की मौजूदगी में वन-टाइम सेटलमेंट पर हस्ताक्षर।
- नर्मदा अवॉर्ड के लंबित भुगतान का आपसी सहमति से निपटारा।
Four states resolved a decades-old dispute. नर्मदा अवॉर्ड से जुड़े लंबे समय से लंबित भुगतान विवाद को लेकर मंगलवार को बड़ा फैसला सामने आया। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की उपस्थिति में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच वन-टाइम सेटलमेंट के आधार पर ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

समझौते पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान केंद्र और चारों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

अमित शाह ने कहा कि नर्मदा अवॉर्ड से जुड़े भुगतान को लेकर चार राज्यों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था, लेकिन आपसी सहमति और सकारात्मक संवाद के जरिए इसका समाधान निकाल लिया गया। उन्होंने इसे सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा और राज्यों के बीच समन्वय को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उनके अनुसार विभिन्न राज्यों के बीच लंबित विवादों का समाधान तेजी से हो रहा है, जिससे विकास परियोजनाओं को गति मिल रही है।
गृह मंत्री ने सरदार सरोवर परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस परियोजना से विशेष रूप से गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान को व्यापक लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में जहां-जहां नर्मदा का पानी पहुंचा है, वहां खेती, भूमि की उत्पादकता और किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।
अमित शाह ने यह भी कहा कि राज्यों के बीच जल विवादों का समाधान केवल संबंधित प्रदेशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के हित में होता है। उन्होंने हाल के वर्षों में विभिन्न अंतरराज्यीय जल विवादों के समाधान का उल्लेख करते हुए कहा कि सहमति और सहयोग के जरिए राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि यदि कोई पड़ोसी राज्य विकास करता है तो उसका सकारात्मक प्रभाव आसपास के राज्यों पर भी पड़ता है। इसलिए राज्यों के बीच सहयोग और संवाद ही विकास की सबसे मजबूत नींव है।



