इथेनॉल पर गहलोत का सरकार पर हमला

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उनका दावा है कि गन्ने का इस्तेमाल चीनी के बजाय इथेनॉल में बढ़ने से चीनी की कीमतें प्रभावित हुई हैं। उन्होंने वाहन माइलेज, इंजन, पर्यावरण और उपभोक्ताओं पर संभावित असर का हवाला देते हुए नीति की व्यापक समीक्षा की मांग तत्काल की है।

  • इथेनॉल मिश्रण को लेकर अशोक गहलोत ने केंद्र पर निशाना साधा।
  • चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को नीति से जोड़ने का दावा किया।
  • वाहन माइलेज और पर्यावरण पर असर की चिंता जताई।

Gehlot attacks the government over ethanol : राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की नीति को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। गहलोत ने आरोप लगाया कि पर्याप्त तैयारी और व्यापक आकलन के बिना लागू की गई इस नीति का असर अब आम उपभोक्ताओं पर दिखाई दे रहा है।

यह भी पढ़ें ; जयपुर में UAE मंत्री की पोलो क्लब में खास मुलाकात

गहलोत के मुताबिक गन्ने का एक बड़ा हिस्सा चीनी उत्पादन के बजाय इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका दावा है कि इससे बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई है और महज 15 दिनों में चीनी के दाम 14 से 17 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। उन्होंने इसे आम परिवारों के बजट पर सीधा असर डालने वाला मुद्दा बताया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इथेनॉल मिश्रण का मामला केवल चीनी की कीमतों तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, कई वाहन मालिक इंजन पर असर और माइलेज कम होने जैसी शिकायतें कर रहे हैं। गहलोत ने कहा कि अगर वाहन का रखरखाव और ईंधन खर्च बढ़ता है, तो इसका अतिरिक्त बोझ भी आम ग्राहक को ही उठाना पड़ता है।

गहलोत ने इथेनॉल उत्पादन से जुड़े संभावित वायु और जल प्रदूषण को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी नीति लागू करने से पहले उसके आर्थिक, तकनीकी और पर्यावरणीय प्रभावों का गंभीरता से आकलन किया जाना चाहिए था।

उन्होंने आरोप लगाया कि नीति के मौजूदा स्वरूप से जहां कुछ उद्योगों और कारोबारी हितों को फायदा पहुंच सकता है, वहीं आम लोगों को महंगाई और बढ़ते खर्च का सामना करना पड़ रहा है। गहलोत ने केंद्र सरकार से उपभोक्ताओं, चीनी की उपलब्धता, वाहन मालिकों और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखते हुए इथेनॉल मिश्रण नीति की दोबारा समीक्षा करने की मांग की।

यह भी पढ़ें ; निकाय चुनाव 2026 : संवेदनशील बूथों पर पैनी नज़र, निष्पक्ष मतदान के लिए जिला प्रशासन सख्त

गहलोत ने केंद्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को अपने फैसलों के पीछे की वजह और उनके संभावित परिणाम जनता के सामने स्पष्ट करने चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त तैयारी के लिए गए फैसलों का खामियाजा अंततः आम नागरिकों को भुगतना पड़ता है।

Related Articles

Back to top button