जनधन खातों पर गहलोत का हमला, बोले- बढ़ती आर्थिक खाई चिंता की बात

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जनधन खातों के निष्क्रिय होने और बड़ी संख्या में खातों में राशि नहीं होने के आंकड़ों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इन आंकड़ों को गरीब कल्याण के दावों से जोड़ते हुए देश में बढ़ती आर्थिक असमानता पर चिंता जताई और कमजोर वर्गों के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

  • अशोक गहलोत ने जनधन खातों के आंकड़ों को लेकर केंद्र पर निशाना साधा।
  • 5.72 करोड़ जनधन खातों में कोई राशि नहीं होने का दावा।
  • गहलोत ने आर्थिक असमानता को गंभीर चिंता का विषय बताया।

Gehlot Targets Centre Over Jan Dhan Accounts : पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जनधन योजना के तहत निष्क्रिय खातों और उनमें जमा राशि से जुड़े आंकड़ों को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं। गहलोत ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि इन आंकड़ों से सरकार के गरीब कल्याण के दावों की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े होते हैं।

गहलोत के मुताबिक, प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत हर चौथा खाता निष्क्रिय है और 5.72 करोड़ खातों में एक रुपये तक की राशि नहीं है। उन्होंने इसे सरकार की नीतियों के प्रभाव से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की स्थिति मुश्किल हो रही है।

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आरटीआई के जरिए सामने आए आंकड़ों का हवाला देते हुए गहलोत ने कहा कि 12 अगस्त 2026 तक देश में करीब 59.03 करोड़ जनधन खाते थे। इनमें लगभग 15.36 करोड़ खाते निष्क्रिय बताए गए हैं, जबकि 5.72 करोड़ खातों में कोई जमा राशि नहीं थी। हालांकि, सभी जनधन खातों में कुल जमा राशि 3.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में आर्थिक असमानता लगातार बढ़ना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ गरीब और कमजोर वर्ग आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर देश के कुछ चुनिंदा अमीरों की संपत्ति लगातार बढ़ रही है।

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गहलोत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा आर्थिक असमानता के मुद्दे को लगातार उठाए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने मनरेगा जैसी योजनाओं को लेकर भी केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया और कहा कि इन नीतियों के परिणाम आने वाले समय में और स्पष्ट हो सकते हैं।

उन्होंने केंद्र से गरीब और कमजोर तबके की आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीरता से काम करने तथा अमीर-गरीब के बीच बढ़ती खाई को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।

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