मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर अशोक गहलोत का बड़ा हमला : बोले- ‘कुकर्म’ करने वालों को देश कभी माफ नहीं करेगा
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एसआईआर को लेकर दो निर्वाचन आयुक्तों की आपत्तियों का हवाला देते हुए गंभीर आरोप लगाए। साथ ही राजस्थान के निकाय चुनावों में पुलिस और प्रशासन के कथित इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसी स्थिति उन्होंने पहले कभी नहीं देखी।
- गहलोत के निशाने पर चुनाव आयोग, ज्ञानेश कुमार को लेकर उठाए सवाल
- SIR और वोटर लिस्ट को लेकर निर्वाचन आयोग पर लगाए आरोप
- निकाय चुनावों में पुलिस-प्रशासन के कथित इस्तेमाल पर साधा निशाना
Ashok Gehlot’s scathing attack on the Chief Election Commissioner : राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने चुनाव आयोग पर लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। जयपुर के एसएमएस अस्पताल पहुंचे गहलोत ने कहा कि वोटर लिस्ट से फर्जीवाड़ा और निष्पक्ष सुनवाई न करने वाले अधिकारियों को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
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“जिस नागरिक ने जिंदगी में 10-15 बार मतदान किया हो, अगर अचानक उसका नाम वोटर लिस्ट से गायब कर दिया जाए, तो सोचिए उस पर क्या बीतती होगी? इस देश में गरीब और सामान्य वर्ग के व्यक्ति के लिए उसका वोट ही सबसे बड़ा सम्मान है,” जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में जोधपुर अग्निकांड के पीड़ितों का हाल-चाल पूछने पहुंचे राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ये शब्द राज्य और देश की राजनीति में भूचाल लाने के लिए काफी हैं।
उन्होंने कहा कि निकाय चुनावों के दौरान जिस तरह से जनता और प्रत्याशियों को डराया-धमकाया गया, वैसा अपनी पूरी राजनीतिक जिंदगी में उन्होंने कभी नहीं देखा। थाने बुलाकर प्रताड़ित करना, बुलडोजर से मकान तोड़ने की धमकियां देना और नोटिस भेजना अब आम बात बना दी गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सब कुछ निष्पक्ष था, तो राजस्थान हाईकोर्ट को रात के 2 बजे अदालत खोलकर सुनवाई क्यों करनी पड़ी? यूपी पुलिस और स्थानीय पुलिस-प्रशासन का चुनावों में जिस तरह का दुरुपयोग हुआ, उसने लोकतंत्र की मर्यादाओं को तार-तार कर दिया है।
निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को सीधे कठघरे में खड़ा करते हुए गहलोत ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तक कर डाली। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा, “यह देश का दुर्भाग्य है कि चुनाव आयोग के दो अन्य कमिश्नर SIR मामले में आपत्ति दर्ज कराते हैं, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त किसी की बात सुनने तक को तैयार नहीं हैं। ऐसे अफसर को एक मिनट भी पद पर रहने का कोई हक नहीं है।
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जिस तरह से वोटर लिस्टों के साथ खिलवाड़ किया गया और उसके आधार पर बिहार एवं बंगाल जैसे राज्यों में चुनाव संपन्न कराए गए, ये उनके कुकर्म हैं और इसके लिए देश उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।” गहलोत ने दावा किया कि यह सिर्फ विपक्ष की आवाज नहीं है, अगर आप भारतीय जनता पार्टी या आरएसएस के नेताओं से भी अकेले में बात करेंगे, तो वे भी दबी जुबान में चुनाव आयोग और प्रशासनिक दबंगई के इस खेल पर अपनी सहमति जताएंगे।



