75 साल के जश्न में सजा विधानसभा का ऐतिहासिक महाकुंभ, देवनानी की पहल बनी चर्चा का केंद्र

राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित ऐतिहासिक विधायी महाकुंभ में पहली बार वर्तमान और पूर्व विधायक एक ही मंच पर नजर आए। 410 जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी वाले इस आयोजन ने लोकतांत्रिक परंपराओं को नई ऊर्जा दी। उपराष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष सहित सभी अतिथियों ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की पहल को प्रेरणादायक और यादगार बताया।

  • विधायी महाकुंभ में 410 वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों ने एक साथ भाग लेकर इतिहास रचा।
  • वासुदेव देवनानी की पहल को उपराष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष ने अनूठा व सराहनीय बताया।
  • राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने पर लोकतांत्रिक परंपराओं और अनुभवों का विशेष संगम देखने को मिला।

The historic Legislative Assembly decked up for the 75th-anniversary celebrations : राजस्थान विधानसभा के 75 वर्षों की लोकतांत्रिक यात्रा के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष विधायी महाकुंभ ने बुधवार को एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया। पहली बार विधानसभा परिसर में वर्तमान और पूर्व विधायक इतने बड़े स्तर पर एक साथ जुटे। इस अनोखे आयोजन ने न केवल प्रदेश बल्कि देशभर के जनप्रतिनिधियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

75 साल के जश्न में सजा विधानसभा का ऐतिहासिक महाकुंभ, देवनानी की पहल बनी चर्चा का केंद्र
Image Source : Via Dipr

इस समारोह में कुल 410 जनप्रतिनिधियों ने सहभागिता की। इनमें 237 पूर्व विधायक, 163 वर्तमान विधायक और 10 ऐसे पूर्व विधायक भी शामिल रहे, जिन्होंने पूर्व पंजीकरण नहीं कराया था, लेकिन कार्यक्रम में पहुंचकर इस ऐतिहासिक अवसर का हिस्सा बने। लंबे समय बाद एक-दूसरे से मिल रहे कई पूर्व विधायक भावुक भी दिखाई दिए और लोकतांत्रिक सफर की पुरानी यादें साझा कीं।

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की यह पहल वास्तव में प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान और पूर्व विधायकों को एक मंच पर लाने वाला यह आयोजन लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने वाला प्रयास है। सबसे खास बात यह रही कि पूरे कार्यक्रम में राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सौहार्द और सम्मान का वातावरण दिखाई दिया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी इस आयोजन को जनप्रतिनिधियों का “विधायी महाकुंभ” बताते हुए कहा कि ऐसी कल्पना को साकार करना आसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की सकारात्मक सोच और दूरदृष्टि ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। उनके अनुसार राजस्थान विधानसभा में इस तरह का आयोजन पहली बार हुआ है और यह आने वाले समय के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण बनेगा।

समारोह में शामिल वर्तमान और पूर्व विधायकों ने भी इस पहल की खुलकर सराहना की। उनका कहना था कि वर्षों बाद एक ही मंच पर मिलना केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं को सम्मान देने का अवसर था। कई जनप्रतिनिधियों ने विधानसभा के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए भविष्य में लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत बनाने के सुझाव भी साझा किए।

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इस ऐतिहासिक आयोजन ने राजस्थान विधानसभा की 75 वर्ष की यात्रा को नई पहचान दी और लोकतंत्र के प्रति जनप्रतिनिधियों की साझा प्रतिबद्धता का मजबूत संदेश भी देशभर में पहुंचाया।

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