जयपुर के हुल्लास पुरोहित बने ‘सुरश्री 2026, सुरों की साधना में हुल्लास ने बनाई खास पहचान
सुर संगम के 37वें राष्ट्रीय युवा संगीत समारोह में जयपुर के हुल्लास पुरोहित ने शानदार गायकी के दम पर ‘सुरश्री 2026’ का खिताब जीता। समापन समारोह में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने विजेता प्रतिभाओं को सम्मानित किया। दो दिन चली प्रतियोगिता में देशभर के युवा गायकों ने शास्त्रीय और सुगम संगीत की प्रस्तुतियों से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
- सुरश्री 2026: हुल्लास पुरोहित ने राष्ट्रीय खिताब अपने नाम किया।
- राष्ट्रीय संगीत समारोह: देशभर के युवा गायकों ने लिया हिस्सा।
- पुरस्कार: विजेता हुल्लास को एक लाख रुपये का नकद सम्मान मिला।
Hulas Purohit Wins Surashree 2026 : जयपुर के युवा गायक हुल्लास पुरोहित ने अपनी दमदार प्रस्तुति के साथ राष्ट्रीय संगीत जगत में पहचान बनाई है। सुर संगम की 37वीं राष्ट्रीय गायन प्रतिभा खोज प्रतियोगिता के अंतिम ‘सुरश्री’ राउंड में बेहतर प्रदर्शन करते हुए उन्होंने ‘सुरश्री 2026’ का खिताब हासिल किया। विजेता के रूप में उन्हें एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया।होटल बीलवा पैलेस में आयोजित समापन समारोह में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने विजेता और अन्य पुरस्कार प्राप्त प्रतिभाओं को सम्मानित किया। राज्यपाल ने कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मन को सकारात्मक ऊर्जा देने के साथ व्यक्ति को रचनात्मक सोच की ओर भी ले जाता है। उन्होंने सुर संगम के संस्थापक स्व. के.सी. मालू के संगीत और विशेष रूप से राजस्थान के लोक संगीत के लिए किए गए कार्यों को भी याद किया।
देशभर की प्रतिभाओं ने दिखाई गायकी प्रतियोगिता के दूसरे दिन प्रतिभागियों को सुर, लय, भाव, उच्चारण और संगीत की समझ जैसे विभिन्न मानकों पर परखा गया। निर्णायक मंडल में पद्मश्री सम्मानित गजल गायिका पीनाज मसानी, बॉलीवुड संगीतकार समीर सेन, संगीतकार एवं वायलिन वादक दीपक पंडित तथा जयपुर के वरिष्ठ संगीतज्ञ दीपक माथुर शामिल रहे।
दीपक पंडित ने प्रस्तुतियों के बाद युवा गायकों को उनकी कमियों और संभावनाओं के बारे में उपयोगी सुझाव दिए। इससे प्रतियोगिता केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रतिभागियों को अपनी गायकी को और निखारने का अवसर भी मिला।
विभिन्न वर्गों के परिणामों में जूनियर सुगम संगीत में प्रयागराज के आदित्य मिश्रा प्रथम और कौशिकी चौधरी उपविजेता रहीं। सीनियर सुगम संगीत में मुंबई की दिया पुरोहित ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि आगरा के ओस सत्संगी दूसरे स्थान पर रहे।
जूनियर शास्त्रीय संगीत में वाराणसी के ओंकार सिंह विजेता रहे। दिल्ली की अनुष्का और बीकानेर के अस्मित व्यास उपविजेता रहे। सीनियर शास्त्रीय संगीत में वाराणसी की तेजस्विनी दिगंबर वर्नेकर प्रथम और मोहित परोंहा उपविजेता रहे।
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सीनियर शास्त्रीय और सुगम संगीत वर्ग के विजेताओं को निर्मल तारा सेठिया एवं पूर्णिमा हैंडीक्राफ्ट की ओर से गणेश राणा स्मृति पुरस्कार के तहत 50-50 हजार रुपये दिए गए।निर्णायकों के बीच बैठकर प्रस्तुतियां सुनते रहे मंत्री खर्रानगरीय विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा भी लगातार दूसरे दिन समारोह में पहुंचे। उन्होंने एक घंटे से अधिक समय तक निर्णायक मंडल के बीच बैठकर युवा प्रतिभाओं की प्रस्तुतियां सुनीं और उनकी संगीत साधना की सराहना की। इस दौरान वीणा म्यूजिक के प्रबंध निदेशक हेमजीत मालू और सुर संगम के राष्ट्रीय महासचिव मुकेश अग्रवाल ने उनका स्वागत किया।
कार्यक्रम में बॉलीवुड संगीतकार सोहेल सेन की मौजूदगी भी रही। उन्होंने युवा कलाकारों और संगीत प्रेमियों से संवाद किया। समारोह संयोजक प्रसन्नजीत मालू ने उनका अभिनंदन किया।
गांधी जयंती पर गूंजे ‘वैष्णव जन’ और ‘रघुपति राघव’
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गांधी जयंती के मौके पर समारोह में संगीत के जरिए महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी गई। डालिया मुखर्जी, सौम्या चक्रवर्ती और जयंतिका डे ने गांधीजी के प्रिय भजनों ‘वैष्णव जन तो तेने कहिये’ और ‘रघुपति राघव राजा राम’ की प्रस्तुति दी। भजनों की स्वर लहरियों ने समारोह के माहौल को भावपूर्ण और भक्तिमय बना दिया।



