जयपुर में ICAST-2026 शुरू, हरित विकास पर मंथन
मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर में तीन दिवसीय ICAST-2026 सम्मेलन शुरू हुआ, जिसमें देश-विदेश के विशेषज्ञ सतत प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा और नवाचार पर चर्चा कर रहे हैं। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने विकास को सततता से जोड़ने की जरूरत बताई। सम्मेलन में ग्रीन हाइड्रोजन, सर्कुलर इकोनॉमी, उन्नत सामग्री, जैव प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा।
- ICAST-2026 में 250 से अधिक प्रतिभागी और 18 विशेषज्ञ शामिल।
- हरित विकास के लिए ग्रीन हाइड्रोजन और सतत ऊर्जा पर जोर।
- सतत प्रौद्योगिकी को उद्योग और शोध से जोड़ने की पहल।
deliberations on green development underway : सतत विकास और आधुनिक तकनीक को साथ लेकर आगे बढ़ने की दिशा में जयपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का मंथन शुरू हो गया है। मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर (एमयूजे) में बुधवार को इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एडवांस्ड सस्टेनेबल टेक्नोलॉजीज (ICAST-2026) का शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय सम्मेलन 19 से 21 अगस्त तक चलेगा।

एमयूजे के बायोटेक्नोलॉजी एवं केमिकल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से इंडियन केमिकल काउंसिल के उद्योग सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में भारत सहित कई देशों के अकादमिक विशेषज्ञ और उद्योग प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम में करीब 250 प्रतिभागियों के साथ 18 मुख्य वक्ता एवं आमंत्रित विशेषज्ञ अपने विचार रख रहे हैं।
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सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक शोध और उभरती तकनीकों को पर्यावरण, उद्योग और विकास से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों के समाधान में बदलने पर चर्चा करना है। कार्यक्रम को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) का प्रायोजन प्राप्त है।
उद्घाटन समारोह में राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, मुंबई के पूर्व कुलपति और पद्मश्री प्रो. जी.डी. यादव विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर के कुलपति प्रो. नीति निपुण शर्मा ने की। विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी और फैकल्टी सदस्य भी मौजूद रहे।
विकास और सततता को साथ लेकर चलने पर जोर
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने अपने संबोधन में कहा कि अब विकास और पर्यावरण संरक्षण को दो अलग-अलग विकल्पों के रूप में देखने की जरूरत नहीं है। वैज्ञानिक ज्ञान, तकनीकी क्षमता, मजबूत संस्थागत व्यवस्था और सामाजिक जिम्मेदारी के जरिए सतत विकास को आगे बढ़ाना समय की मांग है।
उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा भंडारण, रीसाइक्लिंग, पर्यावरण पुनर्बहाली और सर्कुलर इकोनॉमी को भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। इसके साथ ही जैव प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक भी देश की विकास यात्रा को नई दिशा दे सकती हैं।
मुख्य सचिव ने राजस्थान की नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और सतत औद्योगिक विकास की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए इन्हें ‘विकसित राजस्थान 2047’ के लक्ष्य से जोड़ा। उन्होंने विश्वविद्यालयों, उद्योगों, सरकार, स्टार्टअप और युवा शोधकर्ताओं के बीच मजबूत सहयोग की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि जल संकट, ऊर्जा जरूरत, कचरा प्रबंधन, कृषि और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का समाधान केवल एक क्षेत्र के प्रयास से नहीं होगा। इनके लिए अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञों को साथ काम करना होगा।
शोध को जमीन पर उतारने की जरूरत
कुलपति प्रो. नीति निपुण शर्मा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की कमी और ऊर्जा सुरक्षा जैसी समस्याओं का समाधान बहुविषयक शोध से ही संभव है। इंजीनियरिंग, जैव प्रौद्योगिकी, सामग्री विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान और डिजिटल तकनीक को एक साथ जोड़कर नए समाधान विकसित किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास प्रयोगशालाओं में होने वाले शोध को वास्तविक जीवन की जरूरतों से जोड़ना है। इसके लिए अकादमिक संस्थानों और उद्योगों के बीच साझेदारी को मजबूत करना जरूरी है, ताकि शोध का लाभ समाज तक पहुंच सके।
ग्रीन टेक्नोलॉजी में केमिकल इंजीनियरिंग की भूमिका
पद्मश्री प्रो. जी.डी. यादव ने कहा कि केमिकल इंजीनियरिंग की भूमिका अब पारंपरिक रासायनिक उद्योगों तक सीमित नहीं रही। ग्रीन केमिस्ट्री, ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत सामग्री, जैव प्रौद्योगिकी, ऊर्जा संक्रमण और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में इस विषय की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को नए क्षेत्रों में अंतर्विषयक शोध के लिए प्रोत्साहित किया। उनका कहना था कि विज्ञान, तकनीक और औद्योगिक जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल से ही टिकाऊ समाधान तैयार किए जा सकते हैं।
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ICAST-2026 ऐसे समय में हो रहा है जब भारत हरित विकास, ऊर्जा सुरक्षा, सर्कुलर इकोनॉमी और तकनीक आधारित औद्योगिक विकास पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञ संवाद और शोध सहयोग के जरिए ऐसे समाधानों पर चर्चा होगी, जिन्हें भविष्य में उद्योग और समाज के स्तर पर लागू किया जा सके।



