मणिपाल यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल इनोवेशन चैलेंज शुरू, मुकाबले में इटली की टीम भी दिखा रही दम
मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर में इंटरनेशनल इनोवेशन चैलेंज आईआईसी 3.0 की शुरुआत हो गई है। 36 घंटे के इस चैलेंज में 15 राज्यों और 70 से अधिक संस्थानों की 259 टीमें हिस्सा ले रही हैं। 900 से ज्यादा विद्यार्थी तकनीक के जरिए कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, साइबर सुरक्षा, स्मार्ट सिटी और अन्य क्षेत्रों की चुनौतियों के समाधान तैयार करेंगे। इटली की टीम भी शामिल है।
- इंटरनेशनल इनोवेशन चैलेंज में 259 टीमें ले रहीं हिस्सा।
- आईआईसी 3.0 में 15 राज्यों और 70 से अधिक संस्थानों के प्रतिभागी।
- 36 घंटे के चैलेंज में कृषि समेत 10 क्षेत्रों पर समाधान तैयार होंगे।
International Innovation Challenge launched at Manipal University : मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर (एमयूजे) में युवाओं के नए आइडिया को तकनीकी समाधान में बदलने के लिए इंटरनेशनल इनोवेशन चैलेंज (IIC) 3.0 का आगाज हुआ। राजस्थान सरकार के कृषि विभाग के सहयोग से आयोजित यह 36 घंटे का इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप चैलेंज युवाओं को सामाजिक और औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों पर काम करने का मंच दे रहा है।
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इस बार प्रतियोगिता को देशभर से जबरदस्त भागीदारी मिली है। पहले चरण के लिए 259 टीमें पंजीकृत हैं, जिनमें 900 से अधिक विद्यार्थी शामिल हैं। इनमें 154 टीमें मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर की हैं, जबकि 105 टीमें दूसरे शिक्षण संस्थानों से आई हैं। प्रतिभागी 15 राज्यों के 70 से ज्यादा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी जोधपुर और एनआईटी लखनऊ जैसे संस्थानों की टीमें भी इसमें शामिल हैं। इटली की एक टीम की भागीदारी ने चैलेंज को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप दिया है।
प्रतिभागियों को कृषि क्षेत्र में तकनीक और उद्यमिता की संभावनाओं पर काम करने के लिए प्रेरित किया गया। उद्घाटन अवसर पर फर्स्ट इंडिया न्यूज के निदेशक वीरेंद्र चौधरी ने आईआईसी 3.0 के समस्या-वक्तव्यों का उद्घाटन किया। उन्होंने भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत कृषि इकोसिस्टम तैयार करने और युवाओं को कृषि क्षेत्र में तकनीक आधारित नए समाधान विकसित करने की दिशा में आगे आने का आह्वान किया।
चैलेंज का आयोजन डिपार्टमेंट ऑफ आईओटी एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स, अटल इंक्यूबेशन सेंटर-एमयूजे, ई-सेल और डीओआईसी-एमयूजे की ओर से किया जा रहा है। आईसीएआर, मैसूर इसमें पार्टनर के रूप में सहयोग कर रहा है।
प्रतियोगिता के दौरान टीमें 10 प्रमुख क्षेत्रों में अपने समाधान विकसित कर रही हैं। इनमें एडटेक, हेल्थटेक, फिनटेक, एग्रीटेक, साइबर सिक्योरिटी, महिला एवं शिशु सुरक्षा, एरोटेक एवं एयरोस्पेस इनोवेशन, ट्रांसपोर्टेशन एवं मोबिलिटी तथा स्मार्ट सिटी और शहरी विकास जैसे विषय शामिल हैं।
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आईआईसी 3.0 को सिर्फ हैकाथॉन तक सीमित नहीं रखा गया है। 36 घंटे की चुनौती के साथ विशेषज्ञों की पैनल चर्चाएं भी आयोजित की जा रही हैं। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उद्योग की जरूरतें, करियर प्लानिंग, इनोवेशन, एंटरप्रेन्योरशिप, उच्च शिक्षा और वैश्विक अवसरों जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इससे प्रतिभागियों को तकनीकी समाधान के साथ उद्योग की बदलती जरूरतों को समझने का मौका मिलेगा।
कार्यक्रम के उद्घाटन में एमयूजे के रजिस्ट्रार प्रो. अमित सोनी, आईक्यूएसी के डीन एवं आईआईसी 3.0 के कन्वीनर प्रो. विजयपाल सिंह ढाका समेत उद्योग विशेषज्ञ, मेंटर्स, पार्टनर्स और देश-विदेश से आए प्रतिभागी मौजूद रहे। डिपार्टमेंट ऑफ आईओटी एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स की विभागाध्यक्ष एवं प्रोग्राम चेयर डॉ. गीता रानी ने चैलेंज की रूपरेखा और आगामी गतिविधियों की जानकारी दी। डॉ. जी.एल. सैनी ने सभी सहयोगियों और प्रतिभागियों का आभार जताया।
प्रतिभागियों को अनुभवी मेंटर्स और जजों का मार्गदर्शन भी मिल रहा है। इनमें आवार्णो टेक्नोलॉजीज के संस्थापक अंकित झा, अमेजन की स्वाति बंसल, अपराजिता फाउंडेशन की संस्थापक नंदिनी शर्मा, ग्रो अरेंज के एसडीई प्रिंस यादव, यूनिवर्सिटी ऑफ कालाब्रिया, इटली की डॉ. एस्टर जुम्पानो, सीएनआर नैनोटेक इटली के डॉ. यूजेनियो वोकेचुरो और साउथैम्पटन यूनिवर्सिटी के डॉ. हैमिंग लियू शामिल हैं।
नवाचार को प्रोत्साहन देने के लिए प्रतियोगिता में पुरस्कार भी रखे गए हैं। विजेता टीम को एक लाख रुपये, दूसरे स्थान पर रहने वाली टीम को 75 हजार रुपये और तीसरे स्थान की टीम को 50 हजार रुपये का पुरस्कार मिलेगा। इसके अलावा प्रतिभागियों के लिए गुडीज और पेड इंटर्नशिप के अवसर भी रखे गए हैं।
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देश के अलग-अलग हिस्सों से आई टीमों और इटली की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के बीच आईआईसी 3.0 युवाओं के लिए अपने विचारों को वास्तविक समाधान में बदलने का अवसर बन रहा है। साथ ही, उन्हें उद्योग विशेषज्ञों, मेंटर्स और अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले प्रतिभागियों के साथ सीखने और नेटवर्किंग का अनुभव भी मिल रहा है।



