जयपुर में सार्वजनिक निवेश पर मंथन शुरू

आईएमएफ-एसएआरटीटीएसी के पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय राज्यों में सार्वजनिक निवेश के बेहतर प्रबंधन, परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल पर चर्चा होगी। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि बड़े निवेश का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब परियोजनाएं समय पर पूरी हों और उनका असर आम लोगों तथा अर्थव्यवस्था तक पहुंचे।

  • जयपुर में आईएमएफ-एसएआरटीटीएसी का पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू।
  • सार्वजनिक निवेश और परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेषज्ञ करेंगे मंथन।
  • राइजिंग राजस्थान के तहत करीब 9 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतरने की जानकारी।

IMF-SARTTAC Training on Public Investment Begins in Jaipur : सार्वजनिक निवेश को अधिक प्रभावी बनाने और सरकारी परियोजनाओं को तय समय में पूरा करने के उद्देश्य से जयपुर में सोमवार को ‘पब्लिक इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट–इंडियन स्टेट्स’ विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। कार्यक्रम का आयोजन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता केंद्र (एसएआरटीटीएसी) की ओर से किया जा रहा है।

जयपुर में सार्वजनिक निवेश पर मंथन शुरू
Image Source : Via dipr

उद्घाटन सत्र में राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि सार्वजनिक परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि योजनाएं समय पर पूरी हों और उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल इस तरह किया जाए, जिससे आम जनता और अर्थव्यवस्था को अधिकतम लाभ मिल सके।

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उन्होंने कहा कि सार्वजनिक निवेश का असर केवल बड़े प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है। जल और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं में निवेश से दूर-दराज के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत हुई है। इससे लोगों की बाजारों और जरूरी सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर हुई है।

मुख्य सचिव ने बताया कि ‘राइजिंग राजस्थान’ के तहत करीब 35 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए हैं। इनमें लगभग 9 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान तेजी से देश के प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा केंद्रों में अपनी जगह बना रहा है।

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उन्होंने भड़ला सौर पार्क का उदाहरण देते हुए कहा कि रणनीतिक तरीके से किया गया निवेश केवल आर्थिक गतिविधियों को गति नहीं देता, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान कर सकता है।

कार्यक्रम के दौरान राज्य में वित्तीय प्रबंधन से जुड़े सुधारों का भी उल्लेख किया गया। मुख्य सचिव ने जीएसटी सुधारों को महत्वपूर्ण बदलाव बताते हुए कहा कि इससे प्रक्रियाओं और दस्तावेजीकरण को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिली है। उन्होंने साइबर कोषागार के जरिए वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने तथा एसएनए-स्पर्श के माध्यम से भुगतान व्यवस्था में वास्तविक समय के बदलाव की जानकारी भी साझा की।

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