राजस्थान से अक्षय ऊर्जा का बड़ा संदेश, भारत का उत्पादन 300 GW पार
भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 300 गीगावाट पार पहुंच गई है। इसी उपलब्धि के बीच राजस्थान ने जयपुर में बीआरई समिट 2026 का पहला क्षेत्रीय रोडशो आयोजित किया। कार्यक्रम में सरकार, उद्योग, निवेशकों और ऊर्जा विशेषज्ञों ने स्वच्छ ऊर्जा विस्तार पर चर्चा की। राजस्थान ने सौर, पवन, हाइब्रिड ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन में निवेश की संभावनाएं सामने रखीं।
- अक्षय ऊर्जा में भारत की गैर-जीवाश्म क्षमता 300 GW के पार पहुंची।
- राजस्थान ने बीआरई समिट 2026 के लिए पहला रोडशो जयपुर में किया।
- बीआरई समिट 2026 में निवेश और स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी पर जोर रहेगा।
A major message on renewable energy from Rajasthan : भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में एक अहम उपलब्धि दर्ज हुई है। देश की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता 300 गीगावाट का आंकड़ा पार कर चुकी है। इसी उपलब्धि के बीच राजस्थान ने जयपुर में भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो (बीआरई समिट) 2026 के लिए पहला क्षेत्रीय रोडशो आयोजित कर स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और साझेदारी की संभावनाओं को सामने रखा।
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31 जुलाई 2026 तक भारत की गैर-जीवाश्म क्षमता 300.50 गीगावाट दर्ज की गई है। यह देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 54 प्रतिशत से अधिक है। इसके साथ भारत वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता हासिल करने के लक्ष्य का 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा पूरा कर चुका है।
जयपुर में हुए रोडशो में राजस्थान सरकार के साथ राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड (आरआरईसीएल), इंडियन विंड टरबाइन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईडब्ल्यूटीएमए), विंड इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (डब्ल्यूआईपीपीए) और सस्टेनेबल प्रोजेक्ट्स डेवलपर्स एसोसिएशन (एसपीडीए) के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मकसद नवंबर में होने वाले वैश्विक समिट से पहले उद्योग और निवेशकों के बीच संवाद को मजबूत करना रहा।
आरआरईसीएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक रोहित गुप्ता ने कहा कि राजस्थान अब केवल पारंपरिक सौर ऊर्जा तक सीमित नहीं रहना चाहता। राज्य में विंड-सोलर परियोजनाओं, हाइब्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी एनर्जी स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में निवेश का माहौल तैयार किया जा रहा है। राजस्थान की प्राकृतिक परिस्थितियां और बड़े भू-भाग को स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अहम ताकत माना जा रहा है।
रोडशो में उद्योग जगत की ओर से भी बीआरई समिट को लेकर उम्मीदें जाहिर की गईं। आईडब्ल्यूटीएमए के सचिव दिनेश जगदले ने कहा कि यह मंच केंद्र और राज्य सरकारों, निवेशकों, वित्तीय संस्थानों, तकनीकी भागीदारों और उद्योग संगठनों के बीच बेहतर समन्वय का अवसर देगा।
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डब्ल्यूआईपीपीए के कोषाध्यक्ष और यनारा के सीईओ नवीन खंडेलवाल ने पवन ऊर्जा की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि पवन ऊर्जा दिन के समय होने वाले सौर उत्पादन की पूरक बन सकती है। इससे बिजली की अधिक निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। उनके मुताबिक, बीआरई समिट राष्ट्रीय ऊर्जा लक्ष्यों को व्यावहारिक कारोबारी अवसरों और निवेश से जोड़ने का मंच बन सकता है।
केंद्रीय नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजेश कुलहरि ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भारत की प्रगति एक साझा राष्ट्रीय मिशन है और राजस्थान जैसे संसाधन संपन्न राज्यों की इसमें अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय रोडशो राज्यों की क्षमता और राष्ट्रीय लक्ष्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद करेंगे। बीआरई समिट में नीतियों को निवेश योग्य परियोजनाओं में बदलने के साथ सीमा पार निवेश और तकनीकी साझेदारी पर भी चर्चा होगी।
कार्यक्रम के दौरान भारत की अक्षय ऊर्जा यात्रा और बीआरई समिट एंड एक्सपो 2026 पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन भी किया गया। इसके अलावा परियोजना डेवलपर्स, मूल उपकरण निर्माता और निवेशकों के लिए कारोबारी अवसरों तथा संभावित साझेदारी मॉडल पर विशेष सत्र हुआ। आधिकारिक डिजिटल पोर्टल और मोबाइल एप का लाइव प्रदर्शन भी किया गया।
जयपुर से शुरू हुआ यह रोडशो अभियान अब देश के दूसरे प्रमुख शहरों तक पहुंचेगा। आने वाले सप्ताहों में मुंबई, हैदराबाद, अहमदाबाद, लखनऊ, बेंगलुरु और कोलकाता में क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। आयोजकों का उद्देश्य समिट से पहले राज्यों, बिजली क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों और उद्योग भागीदारों की भागीदारी को व्यापक बनाना है।
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बीआरई समिट एंड एक्सपो 2026 का आयोजन 2 से 5 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जाएगा। ‘इनवेस्ट, इन्नोवेट, इंस्पायर’ थीम पर आधारित इस आयोजन में सरकार, नीति निर्माता, उद्योग, निवेशक, तकनीकी विशेषज्ञ, शोधकर्ता और अंतरराष्ट्रीय संस्थान एक मंच पर आएंगे।
समिट के साथ इंटरनेशनल सोलर एलायंस (आईएसए) असेंबली के नौवें सत्र और चौथी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन ग्रीन हाइड्रोजन का भी आयोजन होगा। आयोजकों के मुताबिक, 75 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों, 20 से ज्यादा राज्य सरकारों और 250 से अधिक उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों की भागीदारी की उम्मीद है। कार्यक्रम में 80 से अधिक सत्र, 500 से ज्यादा वक्ता और 400 से अधिक प्रदर्शकों वाली प्रदर्शनी प्रस्तावित है।



