रोम में भारत के सुशासन मॉडल की गूंज
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने रोम में आयोजित 51वें ईजीपीए वार्षिक सम्मेलन में भारत के प्रशासनिक सुधारों और नागरिक-केंद्रित डिजिटल गवर्नेंस का दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने तकनीक आधारित सेवाओं, पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर शिकायत निवारण पर जोर दिया। साथ ही ‘विकसित भारत@2047’ के अनुरूप राजस्थान की सुशासन यात्रा और डिजिटल पहलों को वैश्विक मंच पर प्रमुखता से रखा।
- सुशासन मॉडल पर वी. श्रीनिवास ने रोम में भारत का दृष्टिकोण रखा।
- डिजिटल गवर्नेंस और नागरिक-केंद्रित सेवाओं को बताया भविष्य की जरूरत।
- राजस्थान की डिजिटल प्रशासनिक पहलों को वैश्विक मंच पर किया प्रस्तुत।
India’s good governance model resonates in Rome : भारत में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक नागरिक-केंद्रित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में हो रहे प्रयासों की चर्चा अब वैश्विक मंचों पर भी हो रही है। मुख्य सचिव एवं इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव साइंसेज (IIAS) के अध्यक्ष वी. श्रीनिवास ने इटली के रोम में आयोजित 51वें यूरोपियन ग्रुप फॉर पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (EGPA) वार्षिक सम्मेलन में भारत के सुशासन और प्रशासनिक सुधारों का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

रोम स्थित सैपिएन्जा यूनिवर्सिटी में आयोजित सम्मेलन में श्रीनिवास ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में अगली पीढ़ी के प्रशासनिक सुधार, डिजिटल गवर्नेंस और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण को प्रमुखता से उठाया। सम्मेलन की थीम ‘पब्लिक गवर्नेंस फॉर द कॉमन गुड: ह्यूमन इंटेलिजेंस सर्विंग द ग्लोबल कम्युनिटी’ रही।

श्रीनिवास ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को भी उसी गति से खुद को बदलना होगा। उनके अनुसार, तकनीक का सही इस्तेमाल सरकार और नागरिकों के बीच दूरी कम करने के साथ-साथ लोगों के रोजमर्रा के जीवन को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मैक्सिमम गवर्नेंस—मिनिमम गवर्नमेंट’ के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए भारत में डिजिटल माध्यमों से सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने तथा जन शिकायतों के समाधान को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों को रेखांकित किया।
मुख्य सचिव ने जोर दिया कि तकनीक आधारित प्रशासन तभी प्रभावी माना जाएगा, जब उसका सीधा लाभ आम नागरिक तक पहुंचे। उन्होंने सामाजिक समानता, न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही को बेहतर नीति क्रियान्वयन के लिए जरूरी आधार बताया।
वैश्विक मंच पर राजस्थान की डिजिटल पहल
अपने संबोधन में श्रीनिवास ने ‘विकसित राजस्थान@2047’ के विजन का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राजस्थान में नागरिक-केंद्रित शासन, समग्र विकास और मजबूत आधारभूत ढांचे को प्राथमिकता देते हुए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाया जा रहा है।
उन्होंने राजस्थान संपर्क के जरिए जन शिकायतों के समाधान, राज-काज एनालिटिक्स के माध्यम से विभागों के प्रदर्शन की निगरानी और मिशन राजीविका के जरिए महिला सशक्तीकरण के प्रयासों को उदाहरण के तौर पर सामने रखा। इसके साथ ही प्रमुख आधारभूत ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा में राज उन्नति की भूमिका का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, एंड-टू-एंड डिजिटाइजेशन, आधार आधारित सेवाएं और सिंगल-विंडो व्यवस्था प्रशासन की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव ला रही हैं। आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी सरकारी सेवाओं और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को प्रभावित करेगा।
श्रीनिवास ने प्रशासनिक संस्थाओं के भविष्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने डिजिटल परिवर्तन के साथ स्थिरता, ज्ञान साझा करने और युवा शोधकर्ताओं तथा प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े नए पेशेवरों की भागीदारी बढ़ाने की बात कही।
70 से अधिक देशों की भागीदारी
51वें EGPA वार्षिक सम्मेलन के लिए 70 से अधिक देशों से 900 से ज्यादा शोध प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सम्मेलन के दौरान श्रीनिवास EGPA की स्टीयरिंग कमेटी और परमानेंट स्टडी ग्रुप्स को भी संबोधित करेंगे। इसके अलावा वे ट्रांसअटलांटिक डायलॉग और मेडिटेरेनियन डायलॉग में भी हिस्सा लेंगे।
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कार्यक्रम के दौरान 29 अगस्त को वे IIAS की काउंसिल ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन के सदस्यों के साथ वेटिकन सिटी में पोप से शिष्टाचार भेंट भी करेंगे।
गौरतलब है कि जून 2025 में वी. श्रीनिवास IIAS के अध्यक्ष चुने जाने वाले पहले भारतीय बने थे। यह लगातार दूसरा मौका है, जब उन्होंने EGPA के वार्षिक सम्मेलन में अध्यक्षीय संबोधन दिया है। इससे पहले अगस्त 2025 में स्कॉटलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो में आयोजित EGPA के 50वें वर्षगांठ सम्मेलन में भी उन्होंने अध्यक्षीय संबोधन किया था।



