IOQM परीक्षा का पेपर रहा काफी दमदार, कैलकुलेशन से ज्यादा लॉजिकल थिंकिंग का इम्तिहान

आईओक्यूएम 2026 का पेपर पिछले साल की तुलना में थोड़ा चुनौतीपूर्ण रहा। तीन घंटे की परीक्षा में छात्रों की कैलकुलेशन स्पीड के बजाय सवाल को समझने, पैटर्न पहचानने और सही लॉजिक लगाने की क्षमता पर अधिक जोर दिखाई दिया। विशेषज्ञों के मुताबिक, खासकर पांच अंकों वाले सवालों में कॉन्सेप्ट को नई परिस्थितियों में लागू करना छात्रों के लिए अहम चुनौती रही।

  • IOQM 2026 में कैलकुलेशन से ज्यादा लॉजिकल थिंकिंग पर जोर रहा।
  • मैथ्स ओलंपियाड के पेपर में पैटर्न और कॉन्सेप्ट एप्लीकेशन के सवाल आए।
  • IOQM पेपर में टाइम मैनेजमेंट और सही रणनीति अहम रही।

The IOQM exam paper was quite challenging : मैथ्स टीचर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केंद्र के सहयोग से रविवार को इंडियन मैथ्स ओलंपियाड क्वालीफायर यानी IOQM 2026 का आयोजन किया। कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए हुई इस ऑफलाइन परीक्षा में देशभर से करीब 1.40 लाख छात्र शामिल हुए। परीक्षा सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक चली।

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पेपर को लेकर मोशन एजुकेशन के फाउंडर और एजुकेटर नितिन विजय ने बताया कि इस बार परीक्षा का स्तर पिछले साल के मुकाबले थोड़ा ऊपर रहा। उनके अनुसार, सवालों में सिर्फ तेज कैलकुलेशन करने की क्षमता पर निर्भर रहने की गुंजाइश कम थी। छात्रों को प्रश्न को समझकर उसका सही आइडिया पकड़ना और अलग तरीके से समाधान तक पहुंचना जरूरी था।

30 सवाल, 100 अंक और तीन घंटे
IOQM 2026 में कुल 30 सवाल पूछे गए और पेपर 100 अंकों का था। तीन घंटे यानी 180 मिनट की परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग नहीं रखी गई थी। प्रश्नों को तीन हिस्सों में बांटा गया था। शुरुआती 10 प्रश्न दो-दो अंक के, अगले 10 प्रश्न तीन-तीन अंक के और अंतिम 10 प्रश्न पांच-पांच अंक के थे।

नितिन विजय के मुताबिक, शुरुआत के सवाल अपेक्षाकृत आसान थे और जिन विद्यार्थियों की बुनियाद मजबूत थी, वे इन्हें तेजी से हल कर सकते थे। पेपर आगे बढ़ने के साथ कठिनाई भी बढ़ती गई। खासकर पांच अंकों वाले प्रश्नों में केवल फॉर्मूला लगाकर उत्तर तक पहुंचना आसान नहीं था।

चारों प्रमुख टॉपिक्स से सवाल

पेपर में नंबर थ्योरी, अलजेब्रा, ज्योमेट्री और कॉम्बिनेटोरिक्स से प्रश्न शामिल किए गए। कई सवालों में छात्रों को पहले से पढ़े हुए कॉन्सेप्ट को नई परिस्थिति में इस्तेमाल करना पड़ा। इससे यह साफ हुआ कि परीक्षा में रटने के बजाय समझ और एप्लीकेशन को ज्यादा महत्व दिया गया।

विशेषज्ञ के अनुसार, ओलंपियाड की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए किसी फॉर्मूले को याद करना भर पर्याप्त नहीं है। उन्हें यह समझना भी जरूरी है कि किसी खास सवाल में कौन-सा कॉन्सेप्ट काम आएगा और उसे किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

समय का सही इस्तेमाल बना अहम

180 मिनट में 30 सवाल हल करने के लिए छात्रों के सामने टाइम मैनेजमेंट भी बड़ी चुनौती रही। परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए सवालों की प्राथमिकता तय करना जरूरी था। आसान प्रश्नों को पहले हल करने और अधिक समय लेने वाले प्रश्नों पर बाद में ध्यान देने की रणनीति उपयोगी हो सकती थी।

नेगेटिव मार्किंग नहीं होने के कारण परीक्षा के अंतिम समय में बचे हुए सवालों को अटेम्प्ट करने का विकल्प भी छात्रों के पास था। ऐसे में समय का सही बंटवारा पेपर में स्कोर को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण पहलू रहा।

IOQM के बाद तैयारी रोकना नहीं

IOQM मैथ्स ओलंपियाड प्रोग्राम का शुरुआती चरण है। इसमें बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी आगे की चयन प्रक्रिया में पहुंचते हैं। इसके बाद रीजनल मैथमैटिकल ओलंपियाड और इंडियन नेशनल मैथमैटिकल ओलंपियाड जैसे चरण आते हैं। आगे सफल रहने वाले छात्रों के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर भी बन सकता है।

नितिन विजय ने छात्रों को सलाह दी कि रिजल्ट का इंतजार करते हुए तैयारी को विराम न दें। संभावित रूप से अगले चरण के लिए तैयार रहने के लिए अभी से कठिन सवालों का अभ्यास शुरू करना बेहतर होगा।

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ओलंपियाड स्तर की गणित में सिर्फ सही उत्तर तक पहुंचना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। सवाल को समझना, तर्क विकसित करना, कॉन्सेप्ट को सही जगह लागू करना और समाधान को स्पष्ट तरीके से प्रस्तुत करना भी उतना ही जरूरी है। इसलिए नियमित अभ्यास और अलग-अलग प्रकार के प्रश्नों पर काम करना छात्रों के लिए आगे की तैयारी में मददगार रहेगा।

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