दशलक्षण पर्व में गूंजा आर्जव धर्म का संदेश
दिगंबर जैन समाज ने दशलक्षण महापर्व के दौरान उत्तम आर्जव धर्म को श्रद्धा के साथ मनाया। जयपुर के जैन मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा और अष्टद्रव्य से विशेष पूजा हुई। निर्दोष सप्तमी पर श्रद्धालुओं ने उपवास रखा। शाम को महाआरती के बाद धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए, वहीं संतों और विद्वानों ने सरलता, सत्य और कपटरहित जीवन का संदेश दिया।
- दशलक्षण महापर्व के तहत जयपुर में भक्तिभाव से मनाया गया उत्तम आर्जव धर्म का पावन लक्षण।
- श्रद्धालुओं ने निर्दोष सप्तमी पर रखा उपवास, जयपुर के मंदिरों में हुई विशेष पूजा-अर्चना।
- संतों ने उत्तम आर्जव पर दिया प्रवचन, कहा- मन, वचन और काया में सरलता ही सच्चा धर्म है।
The message of Arjava Dharma resonated during the Dashalakshan Parv : दिगंबर जैन समाज में चल रहे दशलक्षण महापर्व के दौरान उत्तम आर्जव धर्म का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जयपुर के विभिन्न जैन मंदिरों में धार्मिक आयोजन हुए। साथ ही निर्दोष सप्तमी के मौके पर श्रद्धालुओं ने उपवास रखकर धर्म आराधना की।
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सुबह मंदिरों में भगवान के अभिषेक और शांतिधारा के बाद दशलक्षण धर्म विधान मंडल पर अष्टद्रव्य से पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने आर्जव धर्म की संगीतमय पूजा में भी भाग लिया। मंदिर परिसर में दिनभर धार्मिक वातावरण बना रहा।
इस अवसर पर संतों और विद्वानों ने उत्तम आर्जव धर्म के महत्व पर प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि आर्जव का अर्थ मन, वचन और कर्म में सरलता रखना है। व्यक्ति के मन में जो भाव हों, वही उसकी वाणी और व्यवहार में दिखाई देने चाहिए। छल-कपट और किसी को धोखा देने की प्रवृत्ति से दूर रहकर सहज एवं सत्य जीवन जीने का संदेश दिया गया।
प्रवचन के दौरान धार्मिक पदों के माध्यम से भी श्रद्धालुओं को सरल स्वभाव अपनाने और दूसरों के प्रति कपट की भावना नहीं रखने की सीख दी गई। संतों ने समझाया कि मन, वचन और कर्म में एकरूपता रखना ही आर्जव धर्म की मूल भावना है।
निर्दोष सप्तमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपवास किया और मंदिरों में पूजा-अर्चना की। शाम के समय महाआरती के बाद ज्ञानवर्धक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ भाग लिया।
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दशलक्षण महापर्व के इस आयोजन में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ आत्मचिंतन और व्यवहार में सरलता अपनाने पर भी जोर रहा। समाज के लोगों ने आर्जव धर्म के संदेश को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।



