जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का 20वां साल, जनवरी में फिर सजेगा साहित्य का मंच
जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल जनवरी 2027 में अपने 20वें संस्करण के साथ नई पहचान बनाने जा रहा है। दो दशक की इस यात्रा में किताबों, भाषाओं, विचारों और संस्कृतियों को एक मंच मिला। राजस्थान सरकार के सहयोग से यह महोत्सव दुनिया के प्रमुख साहित्यिक आयोजनों में शामिल हुआ और भारत की विविध आवाज़ों को वैश्विक दर्शकों तक पहुँचाने में भूमिका निभाई।
- जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल का 20वां संस्करण 14 से 18 जनवरी 2027 तक होगा।
- जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल ने दो दशकों में 8,000 से ज्यादा लेखकों और कलाकारों की मेजबानी की।
- जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल भारतीय भाषाओं और साहित्य को वैश्विक मंच से जोड़ने की पहचान बना चुका है।
The 20th year of the Jaipur Literature Festival : किताबों, विचारों और बहस के लिए दुनिया भर में पहचान बना चुका जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल अब अपने 20वें संस्करण की तैयारी में है। राजस्थान सरकार के सहयोग से होने वाला यह आयोजन 14 से 18 जनवरी 2027 तक जयपुर में आयोजित किया जाएगा। इस बार का संस्करण फेस्टिवल की दो दशक लंबी यात्रा और उसके बदलते स्वरूप को सामने रखेगा।
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‘विचारों, कहानियों और संवाद के 20 साल’ थीम पर आधारित इस संस्करण में साहित्य के साथ इतिहास, राजनीति, विज्ञान, अर्थशास्त्र, दर्शन, कला, पर्यावरण, स्वास्थ्य और समकालीन संस्कृति जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी। आयोजकों के मुताबिक, फेस्टिवल का उद्देश्य केवल किताबों तक सीमित नहीं रहना, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों के विचारों को एक साझा मंच पर लाना है।
दो दशक में बदली साहित्यिक आयोजनों की तस्वीर
2006 में शुरुआत के बाद जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल ने लंबा सफर तय किया है। आयोजकों के अनुसार, अब तक 8,000 से अधिक लेखक, वक्ता और कलाकार इससे जुड़ चुके हैं। फेस्टिवल में 50 लाख से ज्यादा लोग पहुंच चुके हैं, जबकि डिजिटल प्लेटफॉर्म, मीडिया नेटवर्क और प्रसारण सहयोगियों के जरिए इसकी पहुंच करीब एक अरब दर्शकों तक बताई गई है।
इस दौरान नोबेल और बुकर पुरस्कार विजेताओं से लेकर राष्ट्राध्यक्षों, अर्थशास्त्रियों, दार्शनिकों, कलाकारों और अंतरराष्ट्रीय विचारकों तक ने यहां अपनी बात रखी। यही वजह है कि जयपुर का यह आयोजन धीरे-धीरे एक स्थानीय साहित्यिक सम्मेलन से आगे बढ़कर वैश्विक सांस्कृतिक मंच के रूप में स्थापित हुआ।
भाषाओं को मिला बड़ा मंच
फेस्टिवल की खास पहचान उसकी बहुभाषी परंपरा भी रही है। भारतीय और विदेशी भाषाओं के लेखकों को मंच देने के साथ अनुवाद और भाषाई संवाद पर लगातार जोर दिया गया। क्षेत्रीय साहित्य और अलग-अलग भाषाओं की कहानियों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश ने इसकी पहुंच और मजबूत की है।
20वें संस्करण की घोषणा भारत की सभी 22 आधिकारिक भाषाओं में एक साथ जारी किए जाने को भी इसी सोच से जोड़कर देखा जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि हर भाषा अपने भीतर इतिहास, अनुभव और संस्कृति की ऐसी परतें समेटे है, जो बड़े सामाजिक और सांस्कृतिक संवाद को समृद्ध करती हैं।
जयपुर से दुनिया तक पहुंचा फेस्टिवल
जयपुर से शुरू हुई यह साहित्यिक यात्रा अब भारत की सीमाओं से आगे निकल चुकी है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया, मध्य पूर्व, मालदीव और आयरलैंड समेत कई देशों में इसके 15 से अधिक संस्करण आयोजित हो चुके हैं। इसके अलावा भारत और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में 300 से ज्यादा साहित्यिक आयोजन ऐसे हैं, जिन पर इस तरह के खुले साहित्यिक संवाद की संस्कृति का प्रभाव देखा गया है।
राजस्थान सरकार का सहयोग भी इस सफर का अहम हिस्सा रहा है। 2008 से सरकार के निरंतर समर्थन ने आयोजन को जयपुर में स्थायी पहचान दिलाने में मदद की। वहीं फेस्टिवल ने जयपुर और राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक समुदाय के सामने रखने का काम किया।
आयोजकों ने जताया आगे बढ़ने का भरोसा
टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक और फेस्टिवल के निर्माता संजॉय के. रॉय ने कहा कि किताबों और विचारों में लोगों को जोड़ने की ताकत है। उनके मुताबिक, लेखकों की भागीदारी, दर्शकों की जिज्ञासा और अलग-अलग भाषाओं व संस्कृतियों के बीच संवाद की प्रतिबद्धता ने फेस्टिवल को यहां तक पहुंचाया है।
फेस्टिवल की सह-निदेशक नमिता गोखले ने भारत की साहित्यिक विरासत और भाषाई विविधता को इसकी सबसे बड़ी ताकत बताया। वहीं टीमवर्क आर्ट्स की प्रमुख प्रीता सिंह ने कहा कि अगले चरण में भी फेस्टिवल का लक्ष्य साहित्य, विचार और सार्वजनिक विमर्श को नए दर्शकों तक पहुंचाना है।
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20वें संस्करण के साथ फेस्टिवल अपने तीसरे दशक में प्रवेश करेगा। आयोजकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में भी इसका प्रयास रहेगा कि साहित्य और विचारों को ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जाए और विभिन्न पीढ़ियों, भाषाओं तथा संस्कृतियों के बीच संवाद के नए अवसर तैयार किए जाएं।



