जयपुर से UK पहुंची पहली ज्वेलरी खेप, CETA ने खोले कारोबार के नए रास्ते
भारत–यूके CETA के लागू होने के बाद जयपुर से यूनाइटेड किंगडम के लिए पहली आभूषण निर्यात खेप रवाना की गई। करीब 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की इस खेप के साथ भारतीय ज्वेलरी उद्योग को शून्य सीमा शुल्क का लाभ मिलेगा। इससे जयपुर के कारीगरों, एमएसएमई और निर्यातकों के लिए वैश्विक बाजार में नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
- जयपुर से पहली ज्वेलरी खेप भारत–यूके CETA के तहत यूनाइटेड किंगडम के लिए रवाना हुई।
- CETA समझौते से भारतीय आभूषणों को यूके में शून्य सीमा शुल्क का लाभ मिलेगा।
- जयपुर के ज्वेलरी उद्योग और कारीगरों के लिए निर्यात, निवेश और रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना।
First jewellery consignment from Jaipur reaches the UK : भारत–यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) लागू होने के बाद जयपुर ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि दर्ज की है। सांगानेर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स से यूनाइटेड किंगडम के लिए पहली आभूषण निर्यात खेप को औपचारिक रूप से रवाना किया गया। यह पहल देशभर में शुरू हुए विशेष फ्लैग-ऑफ अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत दिल्ली, मुंबई, सूरत, चेन्नई और कोलकाता सहित कई प्रमुख शहरों से भी पहली खेप भेजी जा रही है।

करीब 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की इस खेप में स्वर्ण, रजत, प्लेटिनम और हीरा जड़ित आभूषण शामिल हैं। उद्योग जगत का मानना है कि यह केवल एक निर्यात खेप नहीं, बल्कि भारतीय रत्न एवं आभूषण उद्योग के लिए वैश्विक बाजार में नई संभावनाओं का संकेत है।

भारत–यूके CETA लागू होने के साथ ही भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजार में शून्य सीमा शुल्क (Zero Duty) का लाभ मिलेगा। पहले जहां भारतीय आभूषणों पर 4 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता था, अब उसके समाप्त होने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और मजबूत होगी। इससे यूके के बहु-अरब डॉलर के आभूषण बाजार में भारतीय निर्यातकों की हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
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सीमा शुल्क आयुक्त आर. के. चंदन ने इस अवसर को भारतीय निर्यात क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि सीमा शुल्क विभाग तेज और सुगम क्लीयरेंस के माध्यम से निर्यातकों को हर संभव सहयोग देता रहेगा। उन्होंने पहली खेप भेजने वाले सभी निर्यातकों को शुभकामनाएं भी दीं।
जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के अध्यक्ष किरीट भंसाली ने कहा कि यह समझौता भारतीय ज्वेलरी उद्योग के लिए नए युग की शुरुआत है। उनके अनुसार शून्य शुल्क का लाभ मिलने से अगले तीन वर्षों में भारत का यूके को रत्न एवं आभूषण निर्यात करीब 754 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे कारीगरों, डिजाइनरों, एमएसएमई और निर्माताओं को बड़े स्तर पर लाभ मिलेगा।
जीजेईपीसी राजस्थान के क्षेत्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र गर्ग ने कहा कि जयपुर अपनी रंगीन रत्नों और हस्तनिर्मित आभूषणों की वैश्विक पहचान रखता है। ऐसे में CETA समझौता स्थानीय उद्योग को विश्व के प्रमुख बाजारों तक पहुंचाने का सुनहरा अवसर साबित होगा। उनका मानना है कि राजस्थान का जेम्स एवं ज्वेलरी सेक्टर भारत की नई निर्यात यात्रा में अहम भूमिका निभाएगा।
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विशेषज्ञों के अनुसार इस समझौते से राजस्थान में मूल्य संवर्धित विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा, नए रोजगार सृजित होंगे और स्थानीय कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने का बेहतर अवसर मिलेगा। पहली खेप का प्रेषण इस बात का संकेत है कि जयपुर का ज्वेलरी उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए पूरी तरह तैयार है।



