जापानियों को भाया राजस्थान का नया रूप, किलों के अलावा झालावाड़ की बौद्ध गुफाओं ने खींचा ध्यान
टोक्यो में Tourism EXPO Japan 2026 के दौरान राजस्थान के पर्यटन को लेकर जापानी टूर ऑपरेटर्स की रुचि अब किले और महलों से आगे बढ़ती दिखी। कम चर्चित पर्यटन स्थल, ग्रामीण जीवन, वन्यजीव, लोक संस्कृति, हस्तशिल्प और बौद्ध विरासत चर्चा में रही। झालावाड़ की कोलवी गुफाओं के साथ स्टूडेंट एक्सचेंज और लंबे प्रवास से जुड़े पर्यटन अवसरों पर भी बातचीत हुई।
- राजस्थान पर्यटन को जापान में नए अनुभवों से जोड़ने की तैयारी
- कोलवी की बौद्ध गुफाएं बनीं जापानी प्रतिनिधियों के आकर्षण का केंद्र
- ग्रामीण पर्यटन और स्टूडेंट एक्सचेंज को लेकर भी दिखी रुचि
The Japanese appreciated Rajasthan’s new look : राजस्थान की पर्यटन पहचान अब जापानी बाजार में सिर्फ किले, महलों और राजसी विरासत तक सीमित रखने के बजाय नए और कम चर्चित अनुभवों के साथ पेश की जा रही है। टोक्यो में आयोजित Tourism EXPO Japan 2026 के दूसरे दिन राजस्थान पर्यटन विभाग की जापानी टूर ऑपरेटर्स और ट्रैवल ट्रेड से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ हुई B2B बैठकों में इसी दिशा में विस्तार से चर्चा हुई।
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बैठकों में राजस्थान के ग्रामीण जीवन, वन्यजीव, लोक संस्कृति, हस्तशिल्प, स्थानीय खान-पान और बौद्ध विरासत को जापानी यात्रियों के लिए नए पर्यटन अनुभव के रूप में सामने रखा गया। पर्यटन सचिव शुचि त्यागी के नेतृत्व में विभाग के संयुक्त निदेशक अजय शर्मा ने प्रतिनिधियों को राज्य के प्रमुख पर्यटन केंद्रों के साथ कम चर्चित स्थलों की भी जानकारी दी।
जयपुर, उदयपुर, जोधपुर और जैसलमेर जैसे लोकप्रिय गंतव्यों के साथ शेखावाटी और हाड़ौती क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं पर भी बातचीत हुई। विभाग ने जापानी यात्रियों की पसंद को ध्यान में रखते हुए ऐसे पर्यटन उत्पाद विकसित करने पर जोर दिया, जिनमें केवल किसी स्मारक का भ्रमण ही नहीं, बल्कि स्थानीय जीवन और संस्कृति को करीब से जानने का अनुभव भी शामिल हो।
कोलवी की गुफाओं ने खींचा ध्यान
B2B बैठकों में राजस्थान की बौद्ध विरासत विशेष चर्चा का विषय रही। झालावाड़ जिले के कोलवी स्थित प्राचीन बौद्ध गुफा परिसर के बारे में जापानी प्रतिनिधियों को जानकारी दी गई। चट्टानों को काटकर तैयार किए गए इस परिसर में स्तूपों के साथ भगवान बुद्ध की विशाल प्रतिमा भी मौजूद है।
विभाग ने कोलवी के अलावा आसपास के विनायका और हाथीगौर क्षेत्रों में मौजूद बौद्ध गुफाओं का भी उल्लेख किया। हाड़ौती क्षेत्र में मौजूद यह विरासत राजस्थान के पर्यटन को बौद्ध संस्कृति और इतिहास से जोड़ने का अवसर देती है। जापानी यात्रियों के लिए इसे राज्य के अपेक्षाकृत कम चर्चित लेकिन अलग तरह के अनुभव वाले गंतव्य के तौर पर प्रस्तुत किया गया।
राजस्थान में लंबे प्रवास की संभावनाएं
एक्सपो के दौरान जापानी विद्यार्थियों और विश्वविद्यालयों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी राजस्थान को लेकर रुचि दिखाई। उन्होंने स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम, शैक्षणिक यात्राओं और लंबे समय तक राजस्थान में ठहरकर स्थानीय संस्कृति को समझने की संभावनाओं के बारे में जानकारी ली।
विद्यार्थियों ने लोक कला, हस्तशिल्प, ग्रामीण जीवन और स्थानीय परंपराओं से जुड़े कार्यक्रमों के बारे में भी सवाल किए। इससे पर्यटन के साथ-साथ शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की संभावनाएं सामने आई हैं।
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पर्यटन विभाग ने जापानी प्रतिनिधियों के सामने राजस्थान की विविधता को भी प्रमुखता से रखा। विभाग के अनुसार, प्रदेश में ऐतिहासिक स्मारकों के अलावा वन्यजीव अभयारण्य, ग्रामीण पर्यटन, लोक कलाएं, हस्तशिल्प, धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थल और स्थानीय परंपराएं मौजूद हैं, जो यात्रियों को अलग-अलग तरह के अनुभव दे सकती हैं।
Tourism EXPO Japan में दूसरे दिन हुई बैठकों से यह संकेत मिला कि जापानी ट्रैवल ट्रेड के सामने राजस्थान को नए तरीके से प्रस्तुत करने की दिशा में काम हो रहा है। पारंपरिक पर्यटन केंद्रों के साथ कम ज्ञात स्थलों और अनुभव आधारित पर्यटन को जोड़कर विभाग जापानी यात्रियों के लिए राजस्थान की एक व्यापक तस्वीर पेश कर रहा है।



