शेखावाटी की बुझेगी प्यास! किशाऊ बांध परियोजना के ऐतिहासिक एमओयू पर लगे हस्ताक्षर
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के लिए छह राज्यों के बीच एमओयू होने के बाद राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में जल सुरक्षा की उम्मीद मजबूत हुई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल से जुड़ी इस परियोजना से सीकर, चूरू और झुंझुनूं समेत आसपास के इलाकों में पेयजल, सिंचाई और विकास को गति मिलने की संभावना है। परियोजना से 660 मेगावाट बिजली उत्पादन भी होगा।
- किशाऊ परियोजना से शेखावाटी की जल सुरक्षा मजबूत होने की उम्मीद।
- सीकर, चूरू और झुंझुनूं को पेयजल उपलब्धता में मदद मिलेगी।
- भजनलाल शर्मा की पहल से यमुना जल के बाद नई जल परियोजना को आधार मिला।
New hope for water security in Shekhawati from the Kishau Project : राजस्थान के जल अभावग्रस्त क्षेत्रों के लिए किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना से जुड़ा समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में छह राज्यों के बीच परियोजना के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सी.आर. पाटिल की मौजूदगी में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।

इस परियोजना से खास तौर पर शेखावाटी क्षेत्र को लाभ मिलने की उम्मीद है। यमुना जल से जुड़ी योजनाओं के बाद किशाऊ परियोजना राजस्थान के उन इलाकों के लिए जल उपलब्धता का एक और महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगी, जहां लंबे समय से पानी की कमी विकास की बड़ी चुनौती बनी हुई है।

दरअसल, वर्ष 1994 में पांच राज्यों के बीच हुए यमुना जल समझौते में राजस्थान के लिए मानसून अवधि में ताजेवाला हेड से 1917 क्यूसेक यानी 577 एमसीएम पानी आवंटित किया गया था। लेकिन पानी के प्रवाह के लिए आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के कारण राजस्थान लंबे समय से अपने हिस्से के इस जल का इस्तेमाल नहीं कर सका।
शेखावाटी तक पहुंचेगा किशाऊ का पानी
किशाऊ बांध से राजस्थान को आवंटित 124 एमसीएम पानी को यमुना जल परियोजना के तहत भूमिगत पाइपलाइन प्रणालियों के जरिए हरियाणा के हांसीवासी से चूरू तक लाने की योजना है। इस व्यवस्था से सीकर, चूरू, झुंझुनूं और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल की जरूरत पूरी करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यह भी पढ़ें ; पीआईबी भुवनेश्वर में मीडिया संवाद, डिजिटल दौर पर मंथन
नियमित जल उपलब्धता का असर केवल घरों तक पानी पहुंचाने तक सीमित नहीं रहेगा। इससे सिंचाई, कृषि, उद्योग और अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए भी नई संभावनाएं बन सकती हैं। पानी की उपलब्धता बढ़ने से शेखावाटी में सामाजिक और आर्थिक विकास को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
यमुना जल समझौते के तहत पहले ही इन क्षेत्रों के लिए भूमिगत पाइपलाइन के जरिए पानी राजस्थान तक लाने की दिशा में संयुक्त डीपीआर तैयार करने पर सहमति बन चुकी है। अब किशाऊ परियोजना के संशोधित एमओयू से इस व्यापक जल व्यवस्था को और मजबूती मिलने की संभावना है।
छह राज्यों को मिलेगा परियोजना का लाभ
किशाऊ बहुउद्देशीय बांध टौंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा के पास प्रस्तावित है। करीब 15 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना से 660 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन प्रस्तावित है। इससे राजस्थान के साथ उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा को भी लाभ मिलेगा।
परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश के जल हिस्से का एक भाग राजस्थान और दिल्ली को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बदले संबंधित राज्यों की ओर से हिमाचल प्रदेश के विद्युत घटक की लागत में योगदान किया जाएगा। जल घटक की कुल लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि बाकी 10 प्रतिशत राशि भागीदार राज्यों द्वारा दी जाएगी।
भारत सरकार ने किशाऊ बांध परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया है। परियोजना के निर्माण, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड को दी जाएगी। इसकी निगरानी अपर यमुना बेसिन से संबंधित व्यवस्था के तहत की जाएगी।
राजस्थान को मिलेगा 95 प्रतिशत हिस्सा
संशोधित समझौते में राजस्थान के जल हितों को भी प्रमुखता दी गई है। समझौते के अनुसार हिमाचल प्रदेश द्वारा विद्युत घटक से जुड़ी लागत वहन किए जाने के बदले उसके आवंटित जल हिस्से का 95 प्रतिशत दिल्ली और राजस्थान के लिए उपलब्ध होगा। हिमाचल प्रदेश अपने स्थानीय उपयोग के लिए 5 प्रतिशत हिस्सा रखेगा।
इस 95 प्रतिशत जल हिस्से में दिल्ली और राजस्थान की भागीदारी 75:25 के अनुपात में होगी। राजस्थान के हिस्से का उपयोग शेखावाटी सहित संबंधित क्षेत्रों में पेयजल, सिंचाई और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए किए जाने की योजना है।
पानी के साथ कनेक्टिविटी से भी बदलेगी तस्वीर
सरकार की ओर से शेखावाटी के विकास को केवल जल परियोजनाओं तक सीमित नहीं बताया गया है। क्षेत्र में कनेक्टिविटी, पर्यटन, विरासत संरक्षण और हवाई संपर्क को मजबूत करने के लिए भी कई योजनाओं पर काम चल रहा है।
यमुना जल समझौते के साथ ऐतिहासिक हवेलियों और विरासत स्थलों के संरक्षण, एक्सप्रेस-वे और हाईवे परियोजनाओं तथा सीकर और झुंझुनूं में हवाई संपर्क से जुड़ी योजनाओं को क्षेत्र के विकास की बड़ी कड़ियों के रूप में देखा जा रहा है।
जल, सड़क और हवाई कनेक्टिविटी में सुधार का संयुक्त असर पर्यटन, व्यापार और निवेश पर पड़ सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बनने और युवाओं को अपने क्षेत्र में ही बेहतर संभावनाएं मिलने की उम्मीद है।
शेखावाटी के लिए लंबी अवधि की योजना
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में जल सुरक्षा को लेकर विभिन्न परियोजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। रामजल सेतु लिंक परियोजना सहित पेयजल और सिंचाई के लिए जल संसाधन उपलब्ध कराने की योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।
किशाऊ परियोजना को इसी व्यापक जल रणनीति की एक अहम कड़ी माना जा रहा है। लंबे समय से पानी की कमी झेल रहे शेखावाटी के लिए यदि प्रस्तावित जल आपूर्ति व्यवस्था प्रभावी तरीके से जमीन पर उतरती है, तो इसका सीधा असर लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों के साथ कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
यह भी पढ़ें ; ओडिशा में राजस्थान के पत्रकारों का दौरा, विरासत से पर्यटन तक देखा विकास
यमुना जल से जुड़े प्रयासों के बाद किशाऊ परियोजना का एमओयू क्षेत्र के लिए एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि समझौते से जुड़ी परियोजनाएं किस गति से आगे बढ़ती हैं और शेखावाटी तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था कब वास्तविक रूप लेती है।



