कोटा में साइबर ठगी पर अलर्ट हुए स्टूडेंट्स

कोटा के मोशन एजुकेशन में आयोजित साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस सेशन में विद्यार्थियों को ऑनलाइन ठगी के नए तरीकों और डिजिटल सुरक्षा के उपाय बताए गए। प्रशिक्षु आईपीएस सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने ओटीपी, पासवर्ड और बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करने की सलाह दी। पुलिस अधिकारियों ने संदिग्ध लिंक से बचने, मजबूत पासवर्ड रखने और ठगी होने पर तुरंत शिकायत करने पर भी जोर दिया।

Students in Kota alerted about cyber fraud : ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों के बीच कोटा के मोशन एजुकेशन के द्रोणा-कैम्पस में शुक्रवार शाम साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस सेशन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के व्यावहारिक तरीके बताए गए। प्रशिक्षु आईपीएस सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने साइबर अपराधियों के नए तौर-तरीकों से विद्यार्थियों को अवगत कराया।

यह भी पढ़े ; जयपुर में सजा पर्यटन का बड़ा मंच, RDTM में दिखी राजस्थान की नई तस्वीर

सेशन में बताया गया कि आज पढ़ाई से लेकर बैंकिंग, खरीदारी और सोशल मीडिया तक ज्यादातर गतिविधियां इंटरनेट से जुड़ गई हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी जानकारी रखने वालों के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि हर इंटरनेट यूजर को इसके प्रति सतर्क रहने की जरूरत है।

फोन और मैसेज से भी हो सकती है ठगी

सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को समझाया कि साइबर अपराधी अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। फोन कॉल, मैसेज, ई-मेल, सोशल मीडिया और फर्जी वेबसाइट के जरिए लोगों से संपर्क किया जाता है। कई बार ठग खुद को बैंक कर्मचारी, पुलिस अधिकारी, सरकारी विभाग या किसी प्रतिष्ठित संस्था का प्रतिनिधि बताकर गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि ओटीपी, पासवर्ड, एटीएम या डेबिट-क्रेडिट कार्ड की जानकारी और अन्य संवेदनशील डिटेल किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। बैंक या जिम्मेदार सरकारी संस्था फोन पर ऐसी गोपनीय जानकारी मांगने के लिए नहीं कहती। इसलिए संदिग्ध कॉल या मैसेज आने पर घबराने के बजाय पहले उसकी वास्तविकता जांचना जरूरी है।

यह भी पढ़ें ; जोधपुर एम्स के स्थापना दिवस पर मुख्य सचिव ने दिया बड़ा बयान, 10 साल के विजन से बदलेगी तस्वीर

सोशल मीडिया पर भी रखें सावधानी

कार्यक्रम में सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी विद्यार्थियों को सतर्क किया गया। अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा निजी जानकारी डालने से साइबर अपराधियों को किसी व्यक्ति को निशाना बनाने में मदद मिल सकती है।

विद्यार्थियों को मजबूत पासवर्ड बनाने और अलग-अलग ऑनलाइन अकाउंट के लिए अलग पासवर्ड रखने की सलाह दी गई। जहां सुविधा उपलब्ध हो, वहां टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसी सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय रखने पर भी जोर दिया गया।

ठगी हो जाए तो तुरंत करें शिकायत

पुलिस उप अधीक्षक अमर सिंह ने साइबर अपराध की घटना होने पर तत्काल कार्रवाई की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन ठगी का शिकार होने पर डरकर चुप बैठने के बजाय तुरंत शिकायत करनी चाहिए। घटना की सूचना जितनी जल्दी दी जाएगी, रकम के आगे ट्रांसफर होने से रोकने और जांच शुरू करने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है।

यह भी पढ़ें ; तकनीक के दौर में डॉक्टरों की हमदर्दी ही बनेगी संजीवनी, जयपुर एएचपीआई सम्मेलन में विशेषज्ञों का बड़ा संदेश

सेशन के दौरान विद्यार्थियों ने साइबर अपराध से जुड़े कई सवाल पूछे। पुलिस अधिकारियों ने रोजमर्रा के उदाहरणों के जरिए उनके सवालों का जवाब दिया और बताया कि संदिग्ध लिंक, अनजान ऑनलाइन संपर्क और वित्तीय जानकारी मांगने वाले संदेशों से किस तरह सावधान रहा जा सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों से कहा गया कि वे खुद जागरूक रहने के साथ अपने परिवार और दोस्तों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति सजग करें। खास तौर पर किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध व्यक्ति से ऑनलाइन बातचीत बढ़ाने या वित्तीय जानकारी साझा करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करने की सलाह दी गई।

Related Articles

Back to top button