‘मातृ सेतु’ से छात्राओं को मिला नया संबल, मणिपाल यूनिवर्सिटी की अनूठी पहल

मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर ने ‘मातृ सेतु–वुमेन मेंटरिंग यंग वुमेन’ कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं के भावनात्मक, व्यक्तिगत और शैक्षणिक विकास को नई दिशा देने की पहल की। कार्यक्रम में महिला शिक्षकों को संवेदनशील मेंटर के रूप में तैयार करने पर जोर दिया गया, ताकि छात्राओं को आत्मीय मार्गदर्शन, विश्वास और सकारात्मक सहयोग का मजबूत वातावरण मिल सके।

  • मातृ सेतु कार्यक्रम में छात्राओं की मेंटरशिप पर विशेष जोर।
  • मणिपाल यूनिवर्सिटी ने महिला शिक्षकों को संवेदनशील मार्गदर्शक बनने का संदेश दिया।
  • मातृ सेतु पहल से छात्राओं के भावनात्मक और शैक्षणिक विकास को मिलेगा सहयोग।

‘Matru Setu’ provides new support to female students : छात्राओं के समग्र विकास और भावनात्मक सशक्तीकरण को प्राथमिकता देते हुए मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर (एमयूजे) ने ‘मातृ सेतु–वुमेन मेंटरिंग यंग वुमेन’ कार्यक्रम का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य महिला शिक्षकों को ऐसी संवेदनशील मेंटर के रूप में तैयार करना है, जो छात्राओं को केवल शैक्षणिक ही नहीं बल्कि व्यक्तिगत और भावनात्मक स्तर पर भी मजबूत सहयोग प्रदान कर सकें।

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कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के डायरेक्टोरेट ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर ने फाउंडेशन फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट (एफएचडी) के सहयोग से किया। इसमें विश्वविद्यालय की महिला संकाय सदस्य और अध्यापकों की धर्मपत्नियों ने भाग लेकर छात्राओं के लिए सहयोगात्मक और भरोसेमंद मार्गदर्शन तंत्र विकसित करने पर विचार साझा किए।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि और फाउंडेशन फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट की अध्यक्ष माधुरी सहस्रबुद्धे ने अपने संबोधन में कहा कि समय पर मिला सही मार्गदर्शन युवाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने देशभर के शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सहानुभूति, संवेदनशीलता और संवाद की शक्ति विद्यार्थियों को कठिन परिस्थितियों से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कार्यक्रम के दौरान माधुरी सहस्रबुद्धे, अलका सोनी और मेधा देशपांडे ने व्यवहारिक कार्यशालाओं का संचालन किया। रोल-प्ले गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझाया गया कि छात्राओं की भावनाओं को बेहतर ढंग से कैसे समझा जाए और प्रभावी संवाद के जरिए उनका आत्मविश्वास कैसे बढ़ाया जाए।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण 13 संकाय टीमों की रोल-प्ले प्रस्तुतियां रहीं। इनमें छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई के दबाव, आत्मविश्वास, रिश्तों और व्यक्तिगत चुनौतियों से जुड़े विभिन्न विषयों को वास्तविक परिस्थितियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इन गतिविधियों ने प्रतिभागियों को व्यवहारिक मेंटरशिप कौशल विकसित करने का अवसर दिया।

प्रो-प्रेसिडेंट कमांडर (डॉ.) अनिल राणा ने कहा कि आज के समय में विद्यार्थियों को केवल अकादमिक मार्गदर्शन ही नहीं, बल्कि भावनात्मक सहयोग की भी आवश्यकता है। उन्होंने महिला शिक्षकों से छात्राओं के विश्वसनीय मार्गदर्शक बनने का आह्वान किया।

कुलपति प्रो. (डॉ.) नीति निपुण शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि मां का स्नेह, संस्कार और सहयोग व्यक्तित्व निर्माण की सबसे मजबूत नींव होते हैं। उन्होंने महिला संकाय सदस्यों से आग्रह किया कि वे छात्राओं के साथ आत्मीयता और विश्वास का ऐसा रिश्ता विकसित करें, जिससे वे तनाव और जीवन की चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकें।

कार्यक्रम में प्रोवोस्ट प्रो. (डॉ.) नीतू भटनागर, मंजू शर्मा, डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. मधुरा यादव, एचआर प्रमुख कननजीत कौर, वरिष्ठ पत्रकार डॉ. पुनीत शर्मा सहित विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी और संकाय सदस्य उपस्थित रहे। समापन अवसर पर डायरेक्टर स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. पंकज व्यास ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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विश्वविद्यालय ने कहा कि ‘मातृ सेतु’ जैसी पहल केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि ऐसा प्रयास है जो परिसर में संवेदनशील, समावेशी और सहयोगपूर्ण माहौल तैयार करते हुए छात्राओं के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास को नई मजबूती प्रदान करेगा।

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