मुरारी गुप्ता ने दत्तात्रेय होसबोले को भेंट की ‘द न्यूरल केज’
जयपुर के धानक्या में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति व्याख्यान समारोह में लेखक मुरारी गुप्ता ने उपन्यास ‘द न्यूरल केज’ आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले को भेंट किया। उपन्यास तकनीक के जरिए चिंतन को प्रभावित करने की संभावनाओं और उसके दुरुपयोग से जुड़े सवालों को कथा के माध्यम से सामने रखता है, जबकि लेखक इसे वर्तमान विमर्श से जोड़ते हैं।
- ‘द न्यूरल केज’ में तकनीक और स्वतंत्र चिंतन का सवाल
- होसबोले को लेखक मुरारी गुप्ता ने भेंट की पुस्तक
- तकनीक के दुरुपयोग और सामाजिक प्रभाव पर केंद्रित कथा
Murari Gupta presented ‘The Neural Cage’ to Dattatreya Hosabale : लेखक मुरारी गुप्ता ने शुक्रवार को धानक्या में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति व्याख्यान समारोह के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अपना उपन्यास ‘द न्यूरल केज’ उन्हें भेंट किया।
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पुस्तक भेंट करने के साथ गुप्ता ने उपन्यास की विषयवस्तु पर भी होसबोले से चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह कहानी आधुनिक तकनीक और उसके बढ़ते प्रभाव के बीच इंसान के स्वतंत्र चिंतन से जुड़े सवालों को केंद्र में रखती है।
लेखक के अनुसार, तकनीक ने रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाया है, लेकिन इसके गलत इस्तेमाल से व्यक्ति की स्वतंत्रता, सोच और सामाजिक संबंधों पर पड़ने वाले असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ‘द न्यूरल केज’ इसी बदलाव और उससे पैदा होने वाली संभावनाओं व चुनौतियों को कथा के जरिए सामने लाने का प्रयास है।
गुप्ता ने यह भी बताया कि उपन्यास में तकनीक के दुरुपयोग तथा उसके माध्यम से संचालित होने वाले कथित ‘टेक जेहाद’ जैसे मुद्दों को कहानी के संदर्भ में उठाया गया है। उनका कहना है कि तकनीकी बदलाव के इस दौर में मानव जीवन और स्वतंत्र विचार पर इसके असर को लेकर चर्चा जरूरी है।
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मुरारी गुप्ता इससे पहले ‘सुगंधा’ नामक उपन्यास भी लिख चुके हैं, जो पाठकों के बीच चर्चित रहा है।



