जिला प्रमुखों के ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट में सरकार का बड़ा जवाब
राजस्थान में जिला प्रमुख पदों पर ओबीसी आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखा है। सरकार ने कहा कि आरक्षण ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के आधार पर तय हुआ। वहीं याचिका में जिला प्रमुख पद 33 से बढ़कर 41 होने के बावजूद ओबीसी सीटें पांच रहने पर सवाल उठाया गया है।
- जिला प्रमुखों के ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट में सरकार का बड़ा जवाब पेश, याचिका को खारिज करने की मांग की।
- जानिए 5 सीटों का पूरा गणित – SC और ST की 15 आरक्षित सीटों के बाद 50% की सीमा में OBC के लिए बचीं केवल 5 सीटें।
- याचिकाकर्ता का तर्क – जिला प्रमुखों के पद 33 से बढ़कर 41 होने के बावजूद ओबीसी सीटें नहीं बढ़ाई गईं।
OBC Reservation Rajasthan Govt Responds : राजस्थान में जिला प्रमुख पदों पर ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष अपना जवाब पेश किया है। सरकार ने आरक्षण व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के अनुरूप बताया है।
यह भी पढ़ें ; राजस्थान में बढ़ेगी ई-बसों की रफ्तार, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता कपिल प्रकाश माथुर ने अदालत को बताया कि ओबीसी आयोग ने डोर-टू-डोर सर्वे और जन आधार से उपलब्ध आंकड़ों का परीक्षण करने के बाद आरक्षण की सिफारिश की थी। सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 50 प्रतिशत की सीमा को ध्यान में रखते हुए एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण निर्धारित किया गया है।
सरकार के अनुसार एससी और एसटी वर्ग के लिए कुल 15 जिला प्रमुख पद आरक्षित हैं। ऐसे में 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर ओबीसी के लिए पांच पद आरक्षित किए गए हैं। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि केवल ओबीसी आबादी के अनुपात या जिला प्रमुख पदों की संख्या बढ़ने के आधार पर आरक्षण में स्वतः वृद्धि नहीं की जा सकती।
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अलग तर्क रखा गया है। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2020 में जिला प्रमुख के कुल 33 पदों में से पांच पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित थे। अब जिला प्रमुख पदों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है, लेकिन ओबीसी के लिए आरक्षित पदों की संख्या अभी भी पांच ही है। इस आधार पर आरक्षण की नए सिरे से गणना की मांग की गई है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारित 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर ओबीसी आरक्षण का पुनर्गणना कर वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई है। इसी मामले में हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया था।
राज्य सरकार ने अपने जवाब में यह भी कहा कि आरक्षण का निर्धारण ओबीसी आयोग की सिफारिश के आधार पर हुआ है, लेकिन याचिका में आयोग को पक्षकार नहीं बनाया गया। सरकार ने इसी आधार पर याचिका खारिज करने का आग्रह किया है।
यह भी पढ़ें ; पीएम मोदी के जन्मदिन पर जगमगाएगा राजस्थान, ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत जलेंगे आशीर्वाद के दीये
फिलहाल मामले में सरकार और याचिकाकर्ता के तर्क अदालत के सामने हैं। जिला प्रमुख पदों की संख्या बढ़ने के बाद ओबीसी आरक्षित पदों में बदलाव होना चाहिए या नहीं, इसी सवाल को लेकर यह मामला चर्चा में है।



