जयपुर में ‘पावर फॉर टुमॉरो’ का संदेश

जयपुर में आयोजित ‘पावर फॉर टुमॉरो’ कार्यशाला में युवाओं को सौर ऊर्जा और अक्षय ऊर्जा के बढ़ते महत्व से रूबरू कराया गया। विशेषज्ञों ने राजस्थान की बढ़ती हरित ऊर्जा क्षमता, रोजगार की संभावनाओं और रूफटॉप सोलर जैसे विकल्पों पर चर्चा की। कार्यक्रम में ऊर्जा संरक्षण की शपथ के साथ चित्रकला, भाषण और नारा लेखन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया।

  • पावर फॉर टुमॉरो में युवाओं को सौर ऊर्जा के फायदे बताए गए।
  • जयपुर कार्यशाला में अक्षय ऊर्जा और रोजगार के अवसरों पर चर्चा।
  • सौर ऊर्जा को लेकर छात्रों ने लिया ऊर्जा संरक्षण का संकल्प।

Power for Tomorrow Workshop : जयपुर में युवाओं के बीच सौर ऊर्जा को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से सोमवार को ‘पावर फॉर टुमॉरो’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के तहत आने वाले नवरत्न सार्वजनिक उपक्रम सतलज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) और आइकोनिक्स ब्रॉडकास्टिंग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों और वक्ताओं ने अक्षय ऊर्जा के भविष्य पर अपने विचार रखे।

जयपुर में ‘पावर फॉर टुमॉरो’ का संदेश
Image Source : Via PIB

कार्यशाला में राजस्थान सरकार के शांति एवं अहिंसा विभाग के निदेशक अजय असवाल ने कहा कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे शोध और तकनीकी बदलावों का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने के लिए जागरूकता जरूरी है। उन्होंने युवाओं से ऊर्जा के इस क्षेत्र को समझने और जागरूकता फैलाने में अपनी भूमिका निभाने की अपील की। उनके मुताबिक, आने वाले वर्षों में सौर ऊर्जा से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं।

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राजस्थान सोलर एसोसिएशन के सीईओ नितिन अग्रवाल ने राज्य की अक्षय ऊर्जा क्षमता पर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राजस्थान में फिलहाल करीब 50 गीगावाट अक्षय ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है और आने वाले समय में देश के कुल अक्षय ऊर्जा उत्पादन में राज्य की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है।

उन्होंने ‘राइजिंग राजस्थान’ के दौरान हुए निवेश समझौतों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, करीब 35 लाख करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों में लगभग 80 प्रतिशत निवेश अक्षय ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि राज्य में फ्लैट की बालकनी में सौर ऊर्जा प्रणाली लगाने का पायलट प्रोजेक्ट भी सफल रहा है।

नितिन अग्रवाल के मुताबिक, इस तरह की व्यवस्था से लोगों को 2 और 3 किलोवाट की सौर ऊर्जा प्रणालियां लगाने का विकल्प मिल सकता है। इससे लंबे समय तक बिजली की जरूरत का एक हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि फ्लैट और हाउसिंग सोसायटियां भी दूसरे स्थानों पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली बिल में राहत का लाभ उठा सकती हैं।

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कार्यशाला में वरिष्ठ पत्रकार अनिल चतुर्वेदी ने एसजेवीएन की राजस्थान में चल रही परियोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कंपनी के बीकानेर प्रोजेक्ट ने एक अरब यूनिट से ज्यादा हरित बिजली उत्पादन का आंकड़ा पार किया है। उन्होंने कहा कि एसजेवीएन राजस्थान की सौर क्षमता को देखते हुए राज्य में अपने अक्षय ऊर्जा कार्यों का विस्तार कर रही है।

उन्होंने बताया कि कंपनी आने वाले वर्षों में राजस्थान में करीब 10 हजार मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा पार्क और बिजली परियोजनाएं विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इसके अलावा बड़े जलाशयों में फ्लोटिंग सोलर प्लांट और तेज हवाओं वाले क्षेत्रों में पवन-सौर हाइब्रिड परियोजनाओं की संभावनाएं तलाशने के लिए सर्वे और व्यवहार्यता अध्ययन भी किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में शिक्षाविद् और सौर ऊर्जा विशेषज्ञ डॉ. अलका त्रिपाठी, डॉ. ए.के. श्रीवास्तव और डॉ. मुकेश शर्मा ने भी युवाओं को संबोधित किया। राजस्थान फिलाटेलिक सोसायटी के महासचिव राजेश पहाड़िया ने डाक टिकटों के माध्यम से सौर ऊर्जा और ऊर्जा संरक्षण से जुड़ी जानकारी साझा की।

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