छोटी काशी में राधाष्टमी पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, दुर्लभ चरण दर्शन पाकर निहाल हुए भक्त
जयपुर में राधाष्टमी का महापर्व अपार श्रद्धा और भक्तिभाव से मनाया गया। गोविंददेवजी, सरस निकुंज और गुप्त वृन्दावन धाम सहित तमाम मंदिरों में पंचामृत अभिषेक, विशेष श्रृंगार और 56 भोग के दिव्य दर्शन हुए। साल में केवल एक बार होने वाले राधारानी के दुर्लभ चरण दर्शन पाने के लिए तड़के से ही मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा।
- गोविंददेवजी मंदिर में भव्य अनुष्ठान: 111 किलो दूध सहित पंचामृत से राधारानी का अभिषेक हुआ और कोलकाता के फूलों से बरसाना महल फूल बंगला सजाया गया।
- साल में एक बार चरण दर्शन: राधाष्टमी के पावन अवसर पर छोटी काशी के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में श्रद्धालुओं को राधारानी के दुर्लभ चरण दर्शन प्राप्त हुए।
- गुप्त वृन्दावन धाम में अखंड संकीर्तन: श्री श्री राधारमण जी के 56 भोग और 12 घंटे के अखंड हरिनाम संकीर्तन के बीच ‘राधा रानी की जय’ के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
Radhashtami Celebrated with Devotion in Jaipur; Temples Echo with Chants: जयपुर। छोटी काशी के नाम से विख्यात जयपुर शहर में शनिवार को वृषभान दुलारी श्री राधारानी का प्राकट्य उत्सव (राधाष्टमी) अपार उल्लास और भक्ति के साथ मनाया गया। तड़के से ही शहर के सभी प्रमुख देवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। घंटे-घड़ियाल, शंखध्वनि और ‘राधा रानी की जय, महारानी की जय’ के जयघोष से परकोटे का कोना-कोना गुंजायमान हो उठा।
आराध्य ठाकुर श्री गोविंददेवजी मंदिर में उत्सव का मुख्य आकर्षण देखने को मिला। तड़के 4 बजे मंगला झांकी के बाद पांच वेदपाठी ब्राह्मणों के मंत्रोच्चार के बीच राधारानी का पंचामृत अभिषेक किया गया, जिसमें 111 किलो दूध, 51 किलो दही, 31 किलो बूरा, 6 किलो घी और 6 किलो शहद अर्पित हुआ। महंत अंजन कुमार गोस्वामी द्वारा तिथि पूजन और महाआरती के बाद ठाकुरजी को विशेष छप्पन भोग और कच्चा भोग अर्पित किया गया। गोविंददेवजी को पीली-गुलाबी लप्पा जामा पोशाक और नवरत्न आभूषण धारण कराए गए, वहीं कोलकाता से मंगवाए गए विशेष फूलों से बना ‘बरसाना महल फूल बंगला’ आकर्षण का केंद्र रहा।
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दरीबा पान स्थित श्री शुक संप्रदाय पीठ ‘श्री सरस निकुंज’ में पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण जी महाराज के सान्निध्य में ठाकुर श्री राधासरस बिहारी जू सरकार का पंचामृत अभिषेक और मनोहारी श्रृंगार हुआ। शाम को बधाई उछाल और आचार्य महाप्रभु श्री स्वामी श्याम चरणदास जी महाराज का छठी महोत्सव धूमधाम से संपन्न हुआ।
उधर, गुप्त वृन्दावन धाम (वृन्दावन गार्डन) में श्री श्री राधारमण जी का महाअभिषेक, 56 भोग और 12 घंटे का अखंड हरिनाम संकीर्तन आयोजित हुआ। मंदिर अध्यक्ष अमितासना दास ने बताया कि गौड़ीय परंपरा में राधारानी की कृपा को श्रीकृष्ण भक्ति का सहज मार्ग माना गया है। इसके अलावा पुरानी बस्ती के राधा गोपीनाथजी, चौड़ा रास्ता के राधा दामोदरजी, मदन गोपालजी, आनंद कृष्ण बिहारीजी और मुरली मनोहरजी मंदिरों में भी बधाई उछाल, पालना दर्शन और साल में केवल एक बार होने वाले चरण दर्शन की परंपरा पूरी श्रद्धा से निभाई गई।



