किसान आईडी में राजस्थान ने बनाया नया रिकॉर्ड

राजस्थान ने किसान रजिस्ट्री में 90.19 लाख किसान आईडी का लक्ष्य पूरा कर डिजिटल कृषि में उपलब्धि दर्ज की है। 99 प्रतिशत गांव जियो-रेफरेंस्ड हो चुके हैं और 2.72 करोड़ से अधिक भू-खण्डों पर डिजिटल क्रॉप सर्वे किया गया है। किसान आईडी को आधार और जन आधार से जोड़कर कृषि योजनाओं की पहुंच बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है।

  • राजस्थान में 90.19 लाख से अधिक किसानों की डिजिटल Farmer ID तैयार कर ली गई है, जिससे राज्य उत्तर भारत में नंबर वन बना।
  • प्रदेश के 2.72 करोड़ से अधिक कृषि भू-खंडों का डिजिटल क्रॉप सर्वे पूरा हुआ और 99% गांवों की जियो-रेफरेंसिंग की गई।
  • Farmer ID को जन आधार और आधार डेटाबेस से लिंक किया गया है, जिससे उर्वरक वितरण और फसल बीमा क्लेम बेहद आसान होंगे।

Rajasthan sets a new record in Farmer IDs : राजस्थान ने कृषि क्षेत्र में डिजिटल व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए किसान रजिस्ट्री के मोर्चे पर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश ने भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से निर्धारित 90.19 लाख किसान आईडी का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया है। इसके साथ ही राजस्थान उत्तर भारत में 100 प्रतिशत किसान आईडी लक्ष्य हासिल करने वाला पहला और देश का छठा राज्य बन गया है।

राज्य सरकार के अनुसार, वर्ष 2015-16 की कृषि गणना में दर्ज 76.54 लाख ऑपरेशनल होल्डिंग के मुकाबले किसान आईडी की संख्या करीब 118 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इस आधार पर राजस्थान राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे स्थान पर है। अधिकारियों के मुताबिक यह उपलब्धि राजस्व और कृषि विभाग के समन्वय, आधार एवं भू-अभिलेखों के एकीकरण और मैदानी स्तर पर किए गए लगातार प्रयासों से संभव हुई है।

डिजिटल खेती की दिशा में बढ़ा एक और कदम

किसान आईडी को केवल पंजीकरण की व्यवस्था तक सीमित नहीं रखा जा रहा है, बल्कि इसे कृषि भूमि, फसल और सरकारी योजनाओं से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। प्रदेश में करीब 99 प्रतिशत गांवों का जियो-रेफरेंसिंग पूरा हो चुका है।

वहीं, रबी 2025-26 के दौरान 2.72 करोड़ से अधिक भू-खण्डों पर डिजिटल क्रॉप सर्वे किया गया। इससे खेतों में बोई गई फसलों से जुड़ी जानकारी को डिजिटल रूप से दर्ज करने और उसे समय पर उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ी है।

यह भी पढ़ें ; खैरथल-तिजारा बनेगा देश का नया औद्योगिक हब, सीएम भजनलाल शर्मा ने दी 117 करोड़ की सौगात

राज्य में करीब 50 लाख पीएम-किसान लाभार्थियों को किसान आईडी से जोड़ा गया है। इसके अलावा किसान आईडी के जरिए प्रदेश के कुल बोए गए क्षेत्र का लगभग 62 प्रतिशत हिस्सा कवर किया जा चुका है।

आधार और जन आधार से जुड़ी किसान पहचान

राजस्थान में किसान आईडी को आधार डेटाबेस के साथ एकीकृत करने के साथ जन आधार से भी जोड़ा गया है। करीब 83 लाख किसानों की जन आधार में किसान आईडी सीडिंग पूरी हो चुकी है।

इस एकीकरण का उद्देश्य किसान की डिजिटल पहचान, भूमि रिकॉर्ड और सरकारी योजनाओं से जुड़े अलग-अलग डेटाबेस के बीच बेहतर तालमेल बनाना है। इससे भविष्य में पात्र किसानों की पहचान और योजनाओं की सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है।

एग्रीस्टैक से मजबूत होगी डिजिटल कृषि व्यवस्था

किसान रजिस्ट्री को एग्रीस्टैक के व्यापक डिजिटल ढांचे का हिस्सा बनाया जा रहा है। एग्रीस्टैक में किसान, उनकी जमीन और फसल से संबंधित सत्यापित जानकारी को एकीकृत करने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं और कृषि सेवाओं को अधिक सरल, तेज और लक्षित तरीके से किसानों तक पहुंचाने में मदद करना है।

राजस्थान में कृषि विभाग के तहत एग्रीस्टैक आयुक्तालय की स्थापना की जा रही है। कृषि आयुक्त को इसका आयुक्त नामित किया गया है। एग्रीस्टैक डेटा को एपीआई के माध्यम से अलग-अलग विभागीय योजनाओं और कार्यक्रमों से जोड़ने की प्रक्रिया भी चल रही है।

खाद, बीज और कृषि योजनाओं में होगा इस्तेमाल

एग्रीस्टैक से उपलब्ध डिजिटल जानकारी का इस्तेमाल उर्वरक वितरण, सूक्ष्म सिंचाई, फार्म पौंड, बाड़बंदी और कृषि उपकरण जैसी योजनाओं में पात्र लाभार्थियों की पहचान के लिए किया जा सकता है। भूमि क्षेत्रफल के आधार पर उर्वरक की आवश्यकता का आकलन और लक्षित वितरण में भी यह व्यवस्था मददगार हो सकती है।

यह भी पढ़ें ; युवा चेहरों पर BJP का दांव? मदन राठौड़ ने दिया बड़ा संकेत

इसी तरह प्रमाणित बीज, उर्वरक और कीटनाशकों के वितरण को अधिक लक्षित बनाने की दिशा में भी डिजिटल डेटा का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में डिजिटल क्रॉप सर्वे से सत्यापित फसल और क्षेत्रफल संबंधी जानकारी को जोड़ने से भविष्य में प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।

किसान आईडी को पीएम-किसान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, उर्वरक वितरण प्रणाली और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद व्यवस्था सहित विभिन्न कृषि प्रणालियों से जोड़ने की दिशा में भी काम किया गया है।

किसानों के लिए क्या बदलेगा?

कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के अनुसार, किसान की प्रमाणित डिजिटल पहचान तैयार होने से भविष्य में अलग-अलग योजनाओं के लिए बार-बार समान दस्तावेज देने की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही पात्र लाभार्थियों की पहचान और सरकारी सेवाओं की डिलीवरी को अधिक लक्षित बनाने में मदद मिल सकती है।

किसान आईडी, भूमि रिकॉर्ड और क्रॉप रजिस्ट्री आपस में जुड़ने से फसल बीमा, उर्वरक वितरण, पीएम-किसान और अन्य कृषि योजनाओं के लिए किसान की वास्तविक भूमि एवं फसल संबंधी जानकारी का बेहतर इस्तेमाल संभव होगा।

छूटे किसानों को जोड़ने के लिए अभियान

राज्य सरकार ने किसान आईडी का कवरेज बढ़ाने के लिए 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक प्रदेशव्यापी अभियान चलाया है। इसका उद्देश्य उन पात्र किसानों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ना है, जो अब तक किसान रजिस्ट्री से बाहर हैं।

यह भी पढ़ें ; भरतपुर संभाग को करीब 1 हजार करोड़ की सौगात

अभियान के तहत म्यूटेशन के दौरान आधार नंबर लेने, छूटे हुए पीएम-किसान लाभार्थियों को एसएमएस के जरिए सूचना देने और कृषि पर्यवेक्षकों की सक्रिय भागीदारी जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। वन क्षेत्रों में रहने वाले पात्र लोगों को भी किसान आईडी व्यवस्था से जोड़ने पर ध्यान दिया जा रहा है।

राज्य सरकार का कहना है कि किसान की डिजिटल पहचान, भूमि रिकॉर्ड और फसल संबंधी जानकारी को एक प्लेटफॉर्म से जोड़ने से कृषि सेवाओं की डिलीवरी को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने का आधार तैयार होगा। राजस्थान की किसान रजिस्ट्री में हासिल यह उपलब्धि इसी डिजिटल कृषि व्यवस्था को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम पड़ाव मानी जा रही है।

Related Articles

Back to top button