राजस्थान विधानसभा का सत्र स्थगित, गरिमा पर जोर
राजस्थान विधानसभा का षष्ठम सत्र शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि गेट नंबर 6 से समूह में प्रवेश की अनुमति न पहले थी, न अब है और न भविष्य में होगी। उन्होंने विपक्ष को जनहित के मुद्दे उठाने का पूरा अधिकार देते हुए सदन की मर्यादा बनाए रखने पर जोर दिया।
- राजस्थान विधानसभा का षष्ठम सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित।
- राजस्थान विधानसभा में गेट नंबर 6 से समूह में प्रवेश पर स्थिति स्पष्ट।
- राजस्थान विधानसभा में विपक्ष को मुद्दे उठाने की पूरी अनुमति, लेकिन गरिमा जरूरी।
Rajasthan Assembly session adjourned : सोलहवीं राजस्थान विधानसभा का षष्ठम सत्र शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने दोपहर 1:44 बजे सदन की कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने विधानसभा की सुरक्षा व्यवस्था और सदन की गरिमा को लेकर भी सदस्यों को स्पष्ट संदेश दिया।
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देवनानी ने कहा कि विधानसभा परिसर में प्रवेश के लिए पहले से निर्धारित व्यवस्था लागू है। सामान्य प्रवेश गेट नंबर 7 से होता है, जबकि विधायक आवास परिसर में रहने वाले सदस्यों के लिए गेट नंबर 6 से पैदल आने-जाने की व्यवस्था है। हालांकि, गेट नंबर 6 से समूह में प्रवेश की अनुमति नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था कोई नई नहीं है। गेट नंबर 6 गुरुवार को भी खुला था और शुक्रवार को भी खुला रहा। पिछली घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि समूह में आने के दौरान दो लोग परिसर में पहुंच गए थे, जिन्हें विधानसभा सुरक्षा दल ने पहचानकर तत्काल बाहर कर दिया। अध्यक्ष ने सुरक्षा कर्मियों की तत्परता की सराहना भी की।
विधानसभा परिसर के गेट पर चढ़कर अंदर आने की कोशिश को देवनानी ने गंभीर और चिंताजनक घटना बताया। उन्होंने कहा कि विधानसभा की सुरक्षा से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता और ऐसी घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए।
सदन की कार्यवाही को लेकर अध्यक्ष ने विपक्ष के अधिकारों पर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि पक्ष और विपक्ष दोनों को सदन में अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। जनहित से जुड़े मुद्दों को नियमों और विधानसभा की परंपराओं के अनुसार उठाने के लिए विपक्ष को पूरी अनुमति है। साथ ही सरकार की जिम्मेदारी है कि जनहित के विषयों पर सदन में उचित जवाब दे।
देवनानी ने सदस्यों को याद दिलाया कि राजस्थान की जनता ने अपने प्रतिनिधियों को चुनकर विधानसभा में भेजा है। ऐसे में आम लोगों की समस्याओं और सार्वजनिक हित के मुद्दों को सदन में प्रभावी तरीके से उठाना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही सौहार्दपूर्ण माहौल में चलनी चाहिए। जनता सदन की कार्यवाही पर नजर रखती है, इसलिए सभी सदस्यों को लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करना चाहिए। व्यवस्था, नियम और संसदीय परंपराओं का पालन किसी एक पक्ष की नहीं, बल्कि सभी सदस्यों की साझा जिम्मेदारी है।
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विधानसभा अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से अपील की कि आने वाले सत्रों में पक्ष और विपक्ष मिलकर सदन की गरिमा और मर्यादा को बनाए रखें। उन्होंने साफ संकेत दिया कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन विधानसभा की प्रतिष्ठा और सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।



