कल खुलेगा राजस्थान निकाय चुनाव का पिटारा
राजस्थान के 309 शहरी निकायों के चुनाव परिणाम सोमवार को सामने आएंगे। 10 हजार 167 वार्डों के लिए हुए मतदान में 38 हजार 889 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा। सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू होगी और दोपहर तक अधिकांश निकायों की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। इसके बाद मेयर, सभापति और चेयरमैन बनाने को लेकर सियासी हलचल तेज होगी।
- 309 निकायों के चुनाव परिणाम सोमवार को आएंगे।
- 38 हजार 889 उम्मीदवारों की हार-जीत का होगा फैसला।
- 10 हजार 167 पार्षद चुनने के बाद बोर्ड बनाने की कवायद तेज होगी।
The results of the Rajasthan civic body elections will be revealed tomorrow : राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों में किसके सिर जीत का ताज सजेगा और किसे हार का सामना करना पड़ेगा, इसका फैसला सोमवार को हो जाएगा। प्रदेश के 309 शहरी निकायों के 10 हजार 167 वार्डों के लिए दो चरणों में हुए चुनाव की मतगणना सुबह 8 बजे शुरू होगी। इसके साथ ही 38 हजार 889 उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य पर फैसला होना शुरू हो जाएगा।
मतगणना आगे बढ़ने के साथ दोपहर तक ज्यादातर निकायों में तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। इसके बाद यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि प्रदेश के 309 निकायों में किस राजनीतिक दल का बोर्ड बनने की स्थिति मजबूत है। चुनाव परिणामों को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजरें अपने-अपने प्रत्याशियों के प्रदर्शन पर टिकी हैं।
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राजस्थान में शहरी निकाय चुनाव के लिए 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में मतदान कराया गया था। पहले चरण में 162 निकायों में 76.41 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि दूसरे चरण के 147 निकायों में 71.69 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। दोनों चरणों को मिलाकर प्रदेश में कुल मतदान 74.05 प्रतिशत रहा।
मतदान खत्म होने के बाद से ही भाजपा और कांग्रेस ने अपने पार्षद प्रत्याशियों को अलग-अलग स्थानों पर रखा हुआ है। खासकर उन निकायों में राजनीतिक दल ज्यादा सतर्क हैं, जहां बोर्ड बनाने के लिए कुछ सीटों का अंतर निर्णायक साबित हो सकता है। अब सोमवार को परिणाम आने के बाद जिन प्रत्याशियों को हार मिलेगी, उन्हें इस सियासी बाड़ेबंदी से बाहर कर दिया जाएगा। जीतने वाले पार्षदों पर ही इसके बाद पूरा फोकस रहेगा।
बोर्ड बनाने के लिए बढ़ेगी सियासी हलचल
निकाय चुनाव के नतीजे आने के साथ ही अगला बड़ा मुकाबला मेयर, सभापति और नगरपालिका चेयरमैन बनाने को लेकर होगा। जिन निकायों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा, वहां निर्दलीय और अन्य दलों के पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे निकायों में समर्थन जुटाने और अपने पक्ष में बहुमत तैयार करने की कोशिशें तेज होंगी।
चुनाव परिणाम के बाद राजनीतिक दलों के लिए असली परीक्षा बोर्ड गठन को लेकर होगी। पार्षदों के आंकड़े सामने आते ही रणनीति और जोड़-तोड़ का दौर शुरू होने की संभावना है। 21 सितंबर को मेयर, सभापति और नगरपालिका चेयरमैन के चुनाव के लिए मतदान होगा। ऐसे में परिणाम के बाद आने वाले कुछ दिन राजस्थान की शहरी राजनीति के लिए खासे अहम रहने वाले हैं।
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सोमवार की मतगणना सिर्फ पार्षदों की जीत-हार तय नहीं करेगी, बल्कि अगले चरण की स्थानीय राजनीति की दिशा भी तय करेगी। किस शहर में किस दल का बोर्ड बनेगा और कहां बहुमत के लिए किसे सहारे की जरूरत पड़ेगी, इसका जवाब चुनाव परिणाम सामने आने के बाद मिलेगा।



