प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ केवल वास्तविक किसानों तक पहुँचेगा : डॉ. किरोडीलाल
राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर फर्जीवाड़े के खिलाफ कृषि विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। श्रीगंगानगर के कालूसर में एक ही जमीन पर कई पॉलिसियां बनाकर करीब 30 लाख रुपये का दावा लेने का मामला सामने आया। विभाग ने ई-मित्र संचालकों और संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर के निर्देश दिए हैं। जांच आगे भी जारी रहेगी।
- फसल बीमा में एक ही जमीन पर कई पॉलिसियां सामने आईं।
- फर्जीवाड़े में करीब 30 लाख रुपये के क्लेम का मामला।
- ई-मित्र संचालकों और अन्य आरोपियों पर एफआईआर के निर्देश।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फर्जी पॉलिसियां बनाकर क्लेम लेने के मामले सामने आने के बाद राजस्थान कृषि विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। श्रीगंगानगर जिले की सुरतगढ़ तहसील के कालूसर गांव में जांच के दौरान एक ही जमीन पर कई लोगों के नाम से फसल बीमा कराने और लाखों रुपये का क्लेम लेने का मामला उजागर हुआ है।
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मामले को गंभीरता से लेते हुए कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल ने संबंधित अधिकारियों को ई-मित्र संचालकों और फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
जांच में सामने आया कि खसरा नंबर 281/91 की करीब 10.37 हेक्टेयर जमीन पर अलग-अलग नामों से मूंगफली की फसल का बीमा कराया गया। आरोप है कि इसी जमीन पर एक से अधिक पॉलिसियां तैयार कर वास्तविक क्षेत्रफल से करीब सात गुना अधिक क्षेत्रफल का बीमा दर्शाया गया।
एक जमीन, कई पॉलिसियां और लाखों का क्लेम
विभागीय जांच के मुताबिक बनवारी लाल ने अपने नाम से ऋणी किसान के रूप में 10.37 हेक्टेयर में मूंगफली का बीमा कराया। इसी जमीन पर ई-मित्र संचालक विकास कुमार और बिजेश के माध्यम से भी अलग-अलग पॉलिसियां कराई गईं।
इन तीन पॉलिसियों के आधार पर बनवारी लाल को कुल 23,35,319 रुपये का बीमा क्लेम मिलने की बात सामने आई है। इसके बाद इसी जमीन को बटाई या लीज पर लेने वाले रिछपाल ने भी 10.37 हेक्टेयर में मूंगफली का बीमा कराया और करीब 7,80,195 रुपये का क्लेम प्राप्त किया।
जांच में इमीचंद, प्रमिला और ओमप्रकाश के नाम से भी इसी खसरे पर फसल बीमा कराने की जानकारी सामने आई। हालांकि इन पॉलिसियों को बीमा कंपनी की ओर से खारिज कर दिया गया था। विभाग ने मामले में बीमा कंपनी की भूमिका की भी जांच की है।
कृषि विभाग का कहना है कि एक ही जमीन पर इतनी बड़ी संख्या में पॉलिसियां जारी होना और वास्तविक क्षेत्रफल से कई गुना ज्यादा क्षेत्र पर बीमा होना सामान्य प्रक्रिया से संभव नहीं लगता। विभाग को इसमें ई-मित्र, संबंधित किसानों और बीमा कंपनी के स्तर पर मिलीभगत की आशंका है, जिसकी जांच के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
‘ऑपरेशन क्लीन फसल बीमा’ रहेगा जारी
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ वास्तविक और पात्र किसानों तक ही पहुंचना चाहिए। इसी उद्देश्य से विभाग ने ‘ऑपरेशन क्लीन फसल बीमा’ शुरू किया है। उन्होंने बताया कि इस बार कृषि बीमा पॉलिसी के साथ फार्मर आईडी को अनिवार्य किया गया है, जिससे संदिग्ध मामलों की पहचान आसान होगी।
उन्होंने कहा कि ऐसे किसानों के मामलों की भी गहन जांच की जाएगी, जिन्होंने कृषि ऋण नहीं लिया है, लेकिन फसल बीमा कराया है। विभाग का फोकस योजना में होने वाली गड़बड़ियों को समय रहते पकड़ने और सरकारी योजना का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचाने पर है।
टोंक और जयपुर में भी दर्ज हो चुकी हैं एफआईआर
इससे पहले कृषि विभाग ने मंगलवार को टोंक जिले की मालपुरा तहसील और जयपुर जिले की शाहपुरा तहसील में भी खरीफ 2026 के लिए फर्जी फसल बीमा कराने के मामलों में ई-मित्र संचालकों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया है कि योजना के साथ किसी भी तरह की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत फर्जी पॉलिसी तैयार करने वालों, सक्रिय दलालों, संबंधित कर्मचारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
फर्जी पॉलिसी निरस्त कराने का आखिरी मौका
कृषि आयुक्त ने ई-मित्र संचालकों, किसानों, ब्रोकरों, बीमा कर्मचारियों और वित्तीय संस्थाओं को चेतावनी दी है कि यदि किसी भी स्तर पर फर्जीवाड़ा पाया गया तो विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई भी होगी।
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उन्होंने फर्जी तरीके से बनाई गई फसल बीमा पॉलिसियों को तत्काल निरस्त कराने की अपील की है। विभाग का कहना है कि ऐसा नहीं करने वालों को आगे कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। कृषि विभाग ने साफ किया है कि ईमानदार किसानों के हितों की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है और योजना का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।



