खाद के लिए किसानों को नहीं लगानी पड़ेगी लंबी कतार, नई डिजिटल व्यवस्था का विस्तार

राजस्थान में किसानों तक उर्वरक की समय पर और पारदर्शी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने डिजिटल व्यवस्था पर जोर दिया है। फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल का विस्तार 15 जिलों में किया जाएगा। किसान जरूरत के अनुसार घर बैठे बुकिंग कर सकेंगे और नजदीकी अधिकृत विक्रेता से खाद ले सकेंगे। इससे कालाबाजारी और जमाखोरी पर भी प्रभावी रोक लगेगी।

  • फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल का 15 जिलों में विस्तार होगा।
  • उर्वरक बुकिंग किसान घर बैठे जरूरत के अनुसार कर सकेंगे।
  • उर्वरक वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी, कालाबाजारी पर लगेगी रोक।

Farmers will not have to stand in long queues for fertilizer : राजस्थान में किसानों को उर्वरक के लिए अनावश्यक भागदौड़ और लंबी कतारों से राहत देने की दिशा में सरकार डिजिटल व्यवस्था को विस्तार देने जा रही है। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल ने गुरुवार को पंत कृषि भवन में उर्वरकों की मांग, आपूर्ति और उपलब्धता की समीक्षा की। बैठक में फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल की प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

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राजपाल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी किसान को खाद के लिए परेशानी नहीं होनी चाहिए। जिलों की वास्तविक मांग के मुताबिक आपूर्ति की लगातार निगरानी करने और जहां जरूरत बढ़े, वहां तत्काल अतिरिक्त उर्वरक उपलब्ध कराने को कहा गया।

15 जिलों में बढ़ेगा डिजिटल सिस्टम

फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल का पायलट प्रोजेक्ट फिलहाल सिरोही और राजसमंद में चल रहा है। 25 जून से शुरू हुई इस व्यवस्था के तहत अब तक दोनों जिलों में 78 हजार से अधिक किसानों को 12 हजार मैट्रिक टन से ज्यादा उर्वरक वितरित किया जा चुका है।

पायलट के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब इस व्यवस्था को 15 जिलों तक बढ़ाने की तैयारी है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से पूरे राजस्थान में इसे लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि किसान अपनी जरूरत के अनुसार उर्वरक की बुकिंग कर सकेंगे। बुकिंग के बाद उन्हें नजदीकी अधिकृत रिटेलर या केंद्र से खाद लेने की सुविधा मिलेगी। जारी किया गया टोकन 48 घंटे तक मान्य रहेगा। इस अवधि में उर्वरक नहीं लेने पर किसान को दोबारा बुकिंग करनी होगी।

कालाबाजारी और जमाखोरी पर नजर

सरकार का मानना है कि डिजिटल बुकिंग से वास्तविक जरूरत वाले किसानों को प्राथमिकता मिलेगी। साथ ही मांग से लेकर वितरण तक पूरी प्रक्रिया पर निगरानी आसान होगी। इससे बिचौलियों की भूमिका सीमित करने, अनावश्यक खरीद रोकने और कालाबाजारी व जमाखोरी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

पायलट व्यवस्था के दौरान किसानों को नजदीकी केंद्र से खाद मिलने के कारण एक जगह से दूसरी जगह भटकने और घंटों कतार में खड़े रहने की परेशानी भी कम हुई है। किसानों ने व्यवस्था को दूसरे जिलों में भी लागू करने की उम्मीद जताई है।

प्रदेश में यूरिया का पर्याप्त स्टॉक

बैठक में बताया गया कि खरीफ सीजन 2026 के लिए अप्रैल से अगस्त तक केंद्र सरकार ने राजस्थान को 9.28 लाख मैट्रिक टन यूरिया आवंटित किया है। शुरुआती स्टॉक को जोड़कर अब तक प्रदेश में 13.12 लाख मैट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया जा चुका है, जो आवंटन का करीब 141 प्रतिशत है। अगस्त के बाकी दिनों में लगभग 50 हजार मैट्रिक टन अतिरिक्त यूरिया मिलने का प्रस्ताव है।

डीएपी की बात करें तो अप्रैल से अगस्त के बीच 3.80 लाख मैट्रिक टन की मांग के मुकाबले अब तक 3.41 लाख मैट्रिक टन उपलब्ध कराया गया है। आयातित डीएपी की आपूर्ति प्रभावित होने के बावजूद वैकल्पिक फास्फेटिक उर्वरकों की व्यवस्था की गई है।

राज्य में अब तक 1.71 लाख मैट्रिक टन एनपीके और 3.76 लाख मैट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध कराया गया है। इस तरह कुल 7.88 लाख मैट्रिक टन फास्फेटिक उर्वरक किसानों के लिए उपलब्ध कराया जा चुका है।

वर्तमान में प्रदेश में करीब 2.59 लाख मैट्रिक टन यूरिया, 67 हजार मैट्रिक टन डीएपी, 79 हजार मैट्रिक टन एनपीके और 1.69 लाख मैट्रिक टन एसएसपी का स्टॉक मौजूद है। विभाग के अनुसार जिलों की मांग के अनुसार आपूर्ति लगातार जारी है।

बारिश के बीच संतुलित यूरिया इस्तेमाल की सलाह

मौसम और बारिश की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों से यूरिया का इस्तेमाल फसल की जरूरत के अनुसार करने की अपील की है। मंजू राजपाल ने अधिकारियों को गांव-गांव तक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि किसान मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दी गई सिफारिशों के अनुसार खाद का प्रयोग करें। जरूरत से ज्यादा यूरिया इस्तेमाल करने से खेती की लागत बढ़ सकती है और मिट्टी की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ऐसे में सही मात्रा, सही समय और सही तरीके से उर्वरक का इस्तेमाल जरूरी है।

कृषक सखी और कृषि पर्यवेक्षक संभालेंगे जागरूकता की कमान

आयुक्त कृषि नरेश कुमार गोयल ने बताया कि किसानों को फसल के हिसाब से उर्वरक की मात्रा और उपयोग का सही समय समझाने के लिए कृषक सखी, कृषक साथी और कृषि पर्यवेक्षकों के जरिए अभियान चलाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के साथ जिलों की वास्तविक जरूरत पर भी नजर रखी जा रही है। किसी क्षेत्र में मांग बढ़ने पर वहां अतिरिक्त आपूर्ति की जाएगी।

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गोयल के मुताबिक सरकार की कोशिश केवल खाद की पर्याप्त मात्रा रखने तक सीमित नहीं है। लक्ष्य यह है कि जरूरतमंद किसान को सही समय पर, सही मात्रा में और पारदर्शी तरीके से उर्वरक मिल सके। फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल इसी सोच के तहत तकनीक आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।

बैठक में अतिरिक्त निदेशक कृषि (आदान) गोपाल लाल समेत विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। अतिरिक्त निदेशक कृषि (विस्तार) और संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से जुड़े।

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