खाद की बुकिंग होगी आसान, 5 जिलों में नई व्यवस्था लागू
राजस्थान में किसानों को जरूरत के मुताबिक समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए ‘फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल’ व्यवस्था का विस्तार किया जा रहा है। 25 अगस्त से बूंदी, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, धौलपुर और चूरू में यह व्यवस्था लागू होगी। डिजिटल सिस्टम से बुकिंग, टोकन, स्टॉक और वितरण की निगरानी होगी, जिससे किसानों को राहत और कालाबाजारी पर नियंत्रण की उम्मीद है।
- उर्वरक बुकिंग के बाद किसानों को 48 घंटे का टोकन मिलेगा।
- 5 जिलों में 25 अगस्त से नई डिजिटल व्यवस्था लागू होगी।
- फर्टिलाइजर सेल से कालाबाजारी और जमाखोरी पर लगेगा अंकुश।
New system implemented in 5 districts : राजस्थान में किसानों को उर्वरक के लिए लंबी कतारों और अलग-अलग केंद्रों के चक्कर लगाने से राहत देने की तैयारी है। सरकार की ओर से शुरू की गई ‘फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल’ व्यवस्था का चरणबद्ध तरीके से विस्तार किया जा रहा है। मंगलवार, 25 अगस्त से बूंदी, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, धौलपुर और चूरू में यह नई व्यवस्था लागू होगी।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने सोमवार को पंत कृषि भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने जिलावार तैयारियों के साथ उर्वरक की मांग, उपलब्ध स्टॉक, आपूर्ति और डिजिटल सिस्टम को लेकर स्थिति की समीक्षा की। अधिकारियों को व्यवस्था को प्रभावी और पारदर्शी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए गए।
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इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों की वास्तविक जरूरत के हिसाब से खाद उपलब्ध कराना है। डिजिटल निगरानी के जरिए मांग से लेकर वितरण तक की प्रक्रिया पर नजर रखी जाएगी। इससे कालाबाजारी, जमाखोरी, कृत्रिम कमी और अनियमित वितरण जैसी शिकायतों पर नियंत्रण मजबूत होने की उम्मीद है।
सिरोही-राजसमंद में पायलट प्रोजेक्ट सफल
फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल को सबसे पहले सिरोही और राजसमंद में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 25 जून से लागू किया गया था। कृषि आयुक्त के अनुसार दोनों जिलों में अब तक करीब 78 हजार किसानों को 12 हजार मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक वितरित किया जा चुका है।
पायलट प्रोजेक्ट के दौरान उर्वरक की मांग, उपलब्धता और वितरण की डिजिटल निगरानी की गई। इससे वास्तविक किसानों तक खाद पहुंचाने में मदद मिली और वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ी।
घर से बुकिंग, 48 घंटे का टोकन
नई व्यवस्था में किसान अपनी जरूरत के अनुसार उर्वरक की बुकिंग कर सकेंगे। बुकिंग के बाद उन्हें 48 घंटे की वैधता वाला टोकन मिलेगा। इस टोकन के आधार पर किसान अपने नजदीकी अधिकृत विक्रेता से उर्वरक ले सकेंगे।
अगर किसान 48 घंटे के भीतर उर्वरक नहीं लेता है तो उसे दोबारा बुकिंग करनी होगी। इससे जरूरत के मुताबिक खरीद करने वाले किसानों को प्राथमिकता देने और अनावश्यक स्टॉक जमा होने से रोकने में मदद मिलेगी।
कतार और चक्कर से मिलेगी राहत
विभाग का कहना है कि डिजिटल बुकिंग के बाद किसान को पहले से पता रहेगा कि उर्वरक कहां से प्राप्त करना है। इससे एक दुकान से दूसरी दुकान तक जाने और लंबी कतारों में इंतजार करने की परेशानी कम हो सकती है।
साथ ही प्रशासन के पास मांग और उपलब्ध स्टॉक की वास्तविक स्थिति की जानकारी लगातार उपलब्ध रहेगी। इसके आधार पर जरूरत वाले क्षेत्रों में समय पर आपूर्ति से जुड़े फैसले लेने में मदद मिलेगी।
12 और जिलों में जल्द होगा विस्तार
पांच नए जिलों के बाद 12 अन्य जिलों में भी यह व्यवस्था जल्द लागू करने की तैयारी है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के सभी जिलों को डिजिटल फर्टिलाइजर वितरण प्रणाली से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
राज्य में सिरोही और राजसमंद में व्यवस्था लागू करने पर 175 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है। पूरे प्रदेश में इसे लागू करने पर करीब 675 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलने की बात भी कृषि विभाग ने कही है।
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कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि विभाग किसानों को एलपीजी गैस की तरह उर्वरक की होम डिलीवरी उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम कर रहा है। इस संबंध में सहकारिता विभाग के साथ प्रारंभिक स्तर की बैठकें हो चुकी हैं।
विभाग का मानना है कि फर्टिलाइजर सेल के विस्तार से उर्वरक की वास्तविक मांग और उपलब्धता के बीच बेहतर तालमेल बनेगा। साथ ही वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ने और कालाबाजारी व जमाखोरी पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिल सकती है।



