राजस्थान का एक्सपोर्ट मिशन, 50 लाख करोड़ का बड़ा लक्ष्य
फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल के राजस्थान एक्सपोर्ट्स कॉन्क्लेव में उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात को नई गति देने पर मंथन हुआ। अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल ने 2047 तक सेकेंडरी सेक्टर का योगदान 50 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य सुझाया। विशेषज्ञों ने कौशल, लॉजिस्टिक्स, फाइनेंस, गुणवत्ता, वैश्विक बाजार और MSME प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर जोर दिया।
- राजस्थान एक्सपोर्ट मिशन के लिए 2047 तक 50 लाख करोड़ रुपये के सेकेंडरी सेक्टर लक्ष्य पर जोर।
- राजस्थान एक्सपोर्ट्स कॉन्क्लेव में लॉजिस्टिक्स, फाइनेंस और नए वैश्विक बाजारों पर चर्चा।
- 50 लाख करोड़ लक्ष्य हासिल करने के लिए मैन्युफैक्चरिंग, कौशल और MSME प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की जरूरत।
Rajasthan’s Export Mission : राजस्थान की अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने और निर्यात क्षमता बढ़ाने को लेकर जयपुर में आयोजित ‘राजस्थान एक्सपोर्ट्स कॉन्क्लेव’ में उद्योग जगत, नीति विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों ने व्यापक मंथन किया। फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल की ओर से आयोजित कॉन्क्लेव की थीम ‘ट्रेड बियॉन्ड बॉर्डर्स: एनैबलिंग राजस्थान्स ग्लोबल ग्रोथ स्टोरी’ रही।

कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में राजस्थान सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग एवं वाणिज्य तथा रीको लिमिटेड के चेयरमैन शिखर अग्रवाल ने राज्य के औद्योगिक भविष्य को लेकर बड़ा लक्ष्य सामने रखा। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री, मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और यूटिलिटीज़ सहित राजस्थान का सेकेंडरी सेक्टर वर्तमान में करीब 5.7 लाख करोड़ रुपये का योगदान दे रहा है। इसे वर्ष 2047 तक बढ़ाकर 50 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने की दिशा में काम करने की जरूरत है।
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उन्होंने बताया कि राज्य के कुल आर्थिक उत्पादन में सेकेंडरी या इंडस्ट्रियल सेक्टर की हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत है, जबकि देश के कई बड़े औद्योगिक राज्यों में यह 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। ऐसे में राजस्थान के पास औद्योगिक विस्तार और उत्पादन बढ़ाने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।
शिखर अग्रवाल ने युवाओं के कौशल विकास को भी राज्य की औद्योगिक प्रगति से सीधे जोड़ा। उन्होंने कहा कि एक तरफ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर उद्योगों को प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन की जरूरत महसूस हो रही है। इस अंतर को कम करने के लिए युवाओं को आधुनिक उद्योगों की मांग के अनुसार तैयार करना होगा। तकनीक के साथ मानव संसाधन में निवेश से उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
औद्योगिक निवेश को आसान बनाने के लिए राज्य सरकार की डिजिटल और सिंगल-विंडो व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। अग्रवाल ने ‘नो योर अप्रूवल’ और CAF 2.0 जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि मंजूरियों की प्रक्रिया को तेज, सरल और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को निर्यात वृद्धि की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। पीएम गति शक्ति कार्गो टर्मिनल, इनलैंड कंटेनर डिपो और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। लंबे समय तक बंद रहने के बाद भीलवाड़ा आईसीडी में दोबारा संचालन शुरू होना भी स्थानीय उद्योगों और निर्यातकों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। इससे कंटेनरीकृत माल की ढुलाई और एक्सपोर्ट लॉजिस्टिक्स को बेहतर समर्थन मिलने की उम्मीद है।
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उद्योग जगत का पक्ष रखते हुए एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स के तत्काल पूर्व चेयरमैन और दिलीप ग्रुप के सीईओ एवं ओनर दिलीप बैद ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खरीदार अब केवल उत्पाद नहीं, बल्कि समय पर डिलीवरी, गुणवत्ता, सर्टिफिकेशन और कम्प्लायंस पर भी विशेष ध्यान देते हैं। उन्होंने एक्सपोर्ट इंटेलिजेंस, प्रोडक्टिविटी, मजबूत वैल्यू चेन, सहयोगी दृष्टिकोण और सस्टेनेबिलिटी को उद्योग की प्रमुख प्राथमिकताएं बताया।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड, नई दिल्ली के वाइस चांसलर डॉ. राकेश मोहन जोशी ने कहा कि राजस्थान को अपने मजबूत उद्यमशील आधार का बेहतर उपयोग करते हुए निर्यात के नए अवसर तलाशने होंगे। उनके अनुसार, देश के कुल निर्यात में राजस्थान की हिस्सेदारी अभी करीब 2 से 2.5 प्रतिशत है, जिसका मूल्य लगभग 11.68 अरब अमेरिकी डॉलर है। उन्होंने प्रभावी राज्य स्तरीय एक्सपोर्ट पॉलिसी, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट पहल के बेहतर क्रियान्वयन और वैश्विक वैल्यू चेन से मजबूत जुड़ाव की आवश्यकता बताई।
सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ के सीनियर रिसर्च फेलो रिधिश राजवंशी ने MSME क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि उपलब्ध वित्तीय सहायता का उपयोग उत्पादन, गुणवत्ता और निर्यात क्षमता बढ़ाने में प्रभावी तरीके से होना चाहिए। उन्होंने राज्य के लिए विशेष योजनाओं और अनुकूल व्यापार समझौतों को भी महत्वपूर्ण बताया।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के जनरल मैनेजर, NW I, रजनीश कुमार ने निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता, ESG कम्प्लायंस और समय पर वित्तीय सहायता की अहमियत पर प्रकाश डाला। उन्होंने करेंसी रिस्क मैनेजमेंट और शिपमेंट से पहले तथा बाद की वित्तीय जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा करने पर भी जोर दिया।
फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल के सदस्य और द्वारका जेम्स लिमिटेड के चेयरमैन के.बी. गोयल ने कहा कि राजस्थान के पास जैम्स एवं ज्वैलरी, हस्तशिल्प, स्टोन, कृषि उत्पाद और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में मजबूत निर्यात क्षमता है। अब जरूरत बाजारों में विविधता लाने, वैश्विक वैल्यू चेन में बेहतर स्थान बनाने और लॉजिस्टिक्स, वित्त तथा संस्थागत सहयोग को मजबूत करने की है।
फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल के को-चेयरमैन और इन्सोलेशन एनर्जी लिमिटेड के चेयरमैन मनीष गुप्ता ने मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत बनाने और प्रतिस्पर्धी नीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया। सत्र का संचालन फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल के एडवाइजर अजय सिंघा ने किया।
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कॉन्क्लेव में दो महत्वपूर्ण प्लेनरी सेशन भी आयोजित किए गए। पहले सत्र में एफटीए, नए वैश्विक बाजार, मार्केट एक्सेस और एक्सपोर्ट कॉम्पीटिटिवनेस पर चर्चा हुई, जबकि दूसरे सत्र में राजस्थान के एक्सपोर्ट इकोसिस्टम, लॉजिस्टिक्स, फाइनेंस और हाई-ग्रोथ सेक्टर्स को मजबूत करने के उपायों पर मंथन किया गया।



