अस्पतालों की OT पर बड़ा फोकस, CS ने दिए सख्त निर्देश

राजस्थान में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए चिकित्सा संस्थानों की सुविधाओं पर सरकार ने फोकस बढ़ाया है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सभी ऑपरेशन थियेटरों को चरणबद्ध तरीके से मॉड्यूलर ओटी बनाने, नवजात शिशु देखभाल इकाइयों को पूरी तरह चालू रखने और प्रत्येक यूनिट का रोस्टर बनाकर उसकी सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

  • अस्पतालों की OT को चरणबद्ध तरीके से मॉड्यूलर ओटी में विकसित किया जाएगा।
  • नवजात शिशु देखभाल इकाइयों की शत-प्रतिशत क्रियाशीलता सुनिश्चित करने के निर्देश।
  • अस्पतालों में रोस्टर तैयार कर सेवाओं के संचालन की नियमित निगरानी होगी।

Major focus on hospital OTs, Chief Secretary issues strict directives : राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुविधाजनक बनाने के लिए चिकित्सा संस्थानों की व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सोमवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों को अस्पतालों की उपलब्ध सुविधाओं का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

अस्पतालों की OT पर बड़ा फोकस, CS ने दिए सख्त निर्देश
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बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन, आरजीएचएस समेत विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज देने के लिए केवल संसाधन उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका नियमित और प्रभावी संचालन भी जरूरी है।

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उन्होंने सभी संबंधित चिकित्सा संस्थानों में मौजूद ऑपरेशन थियेटरों को चरणबद्ध तरीके से मॉड्यूलर ओटी के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही प्रसव सुविधा वाले अस्पतालों में ऑटोक्लेव मशीन की उपलब्धता और उसकी नियमित क्रियाशीलता सुनिश्चित करने को कहा।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के दौरान श्रीनिवास ने कहा कि विभागीय मॉनिटरिंग से मातृ मृत्यु दर में सुधार आया है। उन्होंने संबंधित गाइडलाइन की प्रभावी पालना के साथ इस क्षेत्र की नियमित और गहन निगरानी जारी रखने पर जोर दिया।

नवजात शिशु देखभाल इकाइयों को लेकर मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों सहित सभी चिकित्सा संस्थानों में स्थापित इकाइयां शत-प्रतिशत कार्यशील रहें। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को इन यूनिट्स की लगातार निगरानी कर जरूरी व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित करने को कहा गया।

उन्होंने प्रत्येक चिकित्सा यूनिट का स्पष्ट रोस्टर तैयार करने और उसकी सख्ती से पालना कराने के निर्देश भी दिए, ताकि अस्पतालों में सेवाओं के संचालन में किसी तरह की बाधा न आए। अस्पताल अधीक्षकों को उपलब्ध सुविधाओं और सेवाओं के अनुरूप बेड ऑक्यूपेंसी रेट की नियमित समीक्षा करने के लिए भी कहा गया।

प्रसूताओं और उनके परिजनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मुख्य सचिव ने प्रसव सखी हेल्प डेस्क व्यवस्था को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के जरिए महिलाओं और उनके परिजनों को अस्पताल में जरूरी मार्गदर्शन आसानी से मिलना चाहिए।

स्वास्थ्य संस्थानों में परिवार कल्याण, स्तनपान और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रभावी प्रचार सामग्री प्रदर्शित करने पर भी जोर दिया गया। साथ ही प्रसव के भार के अनुसार स्त्री रोग एवं शिशु रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता और इनके अनुपात की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने उप स्वास्थ्य केन्द्र से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर तक आने वाले मरीजों के लिए जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह उपलब्ध कराने में टेली-कंसल्टेशन का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करने को कहा। मेडिकल कॉलेजों में पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी और पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी यूनिट्स को पूरी तरह सक्रिय करने के साथ एनेस्थीसियोलॉजी, स्त्री एवं प्रसूति रोग तथा शिशु रोग विभागों में रिक्त पदों को आवश्यकतानुसार भरने के निर्देश भी दिए।

बैठक में प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने आरजीएचएस में किए जा रहे सुधारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन मजबूत करने के लिए स्वयं का फार्मेसी बिलिंग सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इसका पायलट उपयोग शुरू हो चुका है और अगले महीने तक इसे पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य है।

राठौड़ ने बताया कि दवाइयों पर होने वाले अतिरिक्त खर्च को नियंत्रित करने के लिए प्राइस बेंचमार्क भी तय किया गया है। इससे दवाओं की खरीद और भुगतान प्रक्रिया में वित्तीय नियंत्रण बेहतर होने की उम्मीद है।

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बैठक में मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. जोगाराम, प्रबंध निदेशक आरएमएससीएल पुखराज सैन, राजस्थान हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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