मातृ मृत्यु रोकने के लिए सरकार सख्त, गायनोलॉजिस्ट के सुझावों पर होगा अमल
प्रदेश में हाल की प्रसूता मृत्यु की घटनाओं के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने विशेषज्ञ गायनोलॉजिस्ट के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने बताया कि दो वर्षों में मातृ मृत्यु दर में लगभग 25 प्रतिशत की कमी आई है। सरकार अब विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर मातृ स्वास्थ्य सेवाओं, रेफरल व्यवस्था और निगरानी प्रणाली को और मजबूत बनाएगी।
- मातृ मृत्यु में दो वर्षों के दौरान करीब 25 प्रतिशत की कमी दर्ज।
- गायनोलॉजिस्ट के सुझावों पर स्वास्थ्य विभाग करेगा प्रभावी अमल।
- गजेन्द्र सिंह खींवसर ने हाई रिस्क मामलों की बेहतर मॉनिटरिंग के दिए निर्देश।
Government takes a tough stance to prevent maternal deaths : प्रदेश में हाल ही में प्रसूताओं की मृत्यु की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने सोमवार को स्वास्थ्य भवन में प्रदेशभर के वरिष्ठ गायनोलॉजिस्ट विशेषज्ञों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की निगरानी बढ़ाने तथा रेफरल व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष चर्चा हुई।

बैठक के दौरान मंत्री ने बताया कि राज्य में मातृ मृत्यु के मामलों में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। वर्ष 2023-24 में जहां 1,094 मातृ मृत्यु दर्ज हुई थीं, वहीं वर्ष 2024-25 में यह संख्या घटकर 986 और वर्ष 2025-26 में 824 रह गई। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में मातृ मृत्यु दर में लगभग 25 प्रतिशत की कमी आना स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का सकारात्मक संकेत है।
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खींवसर ने कहा कि हाल में कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में हुई प्रसूता मृत्यु के मामलों का गहन विश्लेषण किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी की थीं और उनमें एनीमिया, उच्च रक्तचाप (हाई बीपी), प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव (पीपीएच) तथा पोषण संबंधी समस्याएं प्रमुख कारण रहीं। कई मरीज रेफरल के माध्यम से बड़े सरकारी अस्पतालों तक पहुंचे थे।
उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, बीकानेर और कोटा के चिकित्सकों से प्रत्येक मामले की अलग-अलग समीक्षा की। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि हर घटना की गंभीरता से जांच की जाएगी और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों को रोकने के लिए चिकित्सा व्यवस्था को और सशक्त बनाया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। अस्पतालों में संक्रमण रोकने के लिए सभी प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन हो तथा छोटे अस्पतालों से आने वाले रेफरल मामलों में वरिष्ठ चिकित्सक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं, जिससे गंभीर मामलों की संख्या कम हो सके।
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बैठक में विशेषज्ञ गायनोलॉजिस्ट ने लेबर रूम को सुदृढ़ बनाने, प्राथमिक स्तर पर एनीमिया के प्रभावी उपचार, रेफरल केस ऑडिट, रेफरल रजिस्टर की व्यवस्था, विशेष ऑब्स्टेट्रिक आईसीयू, ऑपरेशन से पहले अनिवार्य ईसीजी जांच, आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम द्वारा नियमित निगरानी तथा जनजागरूकता बढ़ाने सहित कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। स्वास्थ्य मंत्री ने इन सुझावों को लागू करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया।



