मौसमी बीमारियों पर अलर्ट, जिलों में 24×7 कंट्रोल रूम
राजस्थान में बदलते मौसम के बीच स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, स्क्रब टाइफस और स्वाइन फ्लू को लेकर निगरानी बढ़ा दी है। सभी जिलों में 24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय रखने के साथ रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित इलाकों में दवाओं, अस्पतालों में बेड, जांच और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
- मौसमी बीमारियों पर निगरानी के लिए जिलों में 24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय रहेंगे।
- मौसमी बीमारियों के आउटब्रेक से निपटने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीमें तैयार रहेंगी।
- मौसमी बीमारियों के साथ टीबी जांच में एक्स-रे और सीबी नॉट मशीनों का अधिक उपयोग होगा।
Alert regarding seasonal diseases : राजस्थान में मौसम बदलने के साथ मौसमी बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। विभाग ने सभी जिलों को 24 घंटे कंट्रोल रूम चालू रखने और किसी भी संभावित बीमारी के फैलाव पर तुरंत कार्रवाई के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के निर्देशन में विभाग लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहा है। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने अधिकारियों को मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, स्क्रब टाइफस और स्वाइन फ्लू पर खास नजर रखने को कहा है।
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स्वास्थ्य विभाग का फोकस केवल अस्पतालों में इलाज तक सीमित नहीं रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में घर-घर सर्वे, एंटी लार्वा और एंटी एडल्ट गतिविधियों के साथ मच्छरों के स्रोत खत्म करने का अभियान लगातार चलाने पर जोर दिया गया है। इन अभियानों की फील्ड स्तर पर नियमित निगरानी भी की जाएगी।
अस्पतालों में बेड और दवाओं की व्यवस्था
अधिक प्रभावित क्षेत्रों में मरीजों के लिए अस्पतालों में अलग से बेड आरक्षित रखने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर मरीजों को आइसोलेट करने की व्यवस्था भी तैयार रखने के निर्देश हैं। इसके अलावा लोगों को व्यक्तिगत सुरक्षा और बचाव के उपायों की जानकारी देने तथा सुरक्षित पेयजल के लिए जरूरत के अनुसार क्लोरीनेशन की व्यवस्था प्रभावी रखने को कहा गया है।
स्वाइन फ्लू को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य संस्थानों में जरूरी दवाइयों की उपलब्धता उपस्वास्थ्य केंद्र स्तर तक सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि मरीजों को शुरुआती स्तर पर ही उपचार मिल सके।
अधिकारियों को मुख्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की उपलब्धता को भी महत्वपूर्ण माना है। अधिकारियों को अपने मुख्यालय पर मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे बीमारी के मामलों में तत्काल प्रतिक्रिया देने और फील्ड में निगरानी को मजबूत रखने में परेशानी न हो।
इन तैयारियों की समीक्षा निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में की। बैठक में मौसमी बीमारियों के अलावा टीबी मुक्त भारत अभियान, सेल्फ मॉनिटरिंग और चिकित्सा संस्थानों की संचालन व्यवस्था पर भी चर्चा हुई।
टीबी जांच में मशीनों के इस्तेमाल पर जोर
टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा के दौरान जिलों में चल रही गतिविधियों का फीडबैक लिया गया। डॉ. शर्मा ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों तथा जिला टीबी अधिकारियों से स्थिति जानी और एक्स-रे तथा सीबी नॉट मशीनों के बेहतर उपयोग पर जोर दिया।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उपलब्ध मशीनों और अन्य संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल करते हुए टीबी की जल्द पहचान, जांच और उपचार सुनिश्चित किया जाए। चिकित्सा संस्थानों में तय मानकों और स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल का पालन भी प्रभावी तरीके से कराने के निर्देश दिए गए।
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बैठक में निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर, निदेशक एड्स डॉ. सुशील कुमार परमार, ओएसडी एनएचएम संतोष गोयल, अतिरिक्त निदेशक अस्पताल प्रशासन डॉ. नरोत्तम शर्मा सहित विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।



