राजस्थान के हाइवे ने ‘ग्रीन हाईवेज एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026’ में मारी बाजी, देश में मिला तीसरा स्थान

एनएचएआई के ग्रीन हाईवेज एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026 में राजस्थान के हाईवे-925 और एनएच-925ए के गगरिया-बाखासर तथा सट्टा-गंधव प्रोजेक्ट को एवेन्यू प्लांटेशन श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान मिला। यह सम्मान हाईवे किनारे हरियाली, पौधों की देखभाल और पर्यावरण अनुकूल विकास के प्रयासों के लिए दिया गया है।

  • राजस्थान हाईवे प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान मिला।
  • ग्रीन हाईवेज एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026 में पौधारोपण कार्य को सम्मान मिला।
  • एनएचएआई ने पर्यावरण अनुकूल हाईवे विकास को बढ़ावा दिया।

Rajasthan Highway Wins Green Award : राजस्थान के राष्ट्रीय राजमार्गों पर हरियाली बढ़ाने की कोशिशों को अब राष्ट्रीय पहचान मिली है। एनएचएआई के ग्रीन हाईवेज एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026 में राजस्थान के हाईवे-925 के गगरिया-बाखासर सेक्शन और एनएच-925ए के सट्टा-गंधव सेक्शन को एवेन्यू प्लांटेशन श्रेणी में तीसरा स्थान मिला है।

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इस श्रेणी में आंध्र प्रदेश के एनएच-16 स्थित चिलकलूरिपेट बाइपास के छह लेन प्रोजेक्ट ने पहला स्थान हासिल किया। वहीं गुजरात के डोदरा-किम एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को दूसरा स्थान मिला। राजस्थान का प्रोजेक्ट इन दोनों के बाद तीसरे पायदान पर रहा।

एनएचएआई ने इन पुरस्कारों की शुरुआत राष्ट्रीय राजमार्गों पर पर्यावरण संरक्षण और बेहतर पौधारोपण प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की है। अवॉर्ड के जरिए ऐसे प्रोजेक्ट्स को सामने लाया जाता है, जहां हाईवे निर्माण के साथ हरियाली और पौधों के संरक्षण पर भी प्रभावी तरीके से काम किया गया हो।

इस बार पुरस्कार तीन प्रमुख श्रेणियों में दिए गए। इनमें सड़क के किनारे पौधारोपण, सड़क के बीच पौधारोपण और भूखंडों के साथ-साथ क्लोवर लीफ, इंटरचेंज, टोल प्लाजा और सर्विस एरिया में किए गए पौधारोपण को शामिल किया गया।

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अवॉर्ड के लिए एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालयों के अलावा रियायत धारकों, ठेकेदारों, सरकारी एजेंसियों, एनजीओ और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में पौधारोपण से जुड़े निजी संस्थानों से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। देशभर से कुल 86 नामांकन प्राप्त हुए। इनमें 27 आवेदन सड़क किनारे, 36 सड़क के बीच और 23 भूखंडों में किए गए पौधारोपण से जुड़े थे।

प्रोजेक्ट्स के मूल्यांकन में सिर्फ पौधे लगाने की संख्या को आधार नहीं बनाया गया। पौधों के जीवित रहने की दर को सबसे अधिक महत्व दिया गया। इसके अलावा पौधारोपण की साइट के मुताबिक योजना, काम पूरा करने का समय, गड्ढों का आकार, पौधों की गुणवत्ता, सुरक्षा इंतजाम और स्वीकृत डिजाइन के अनुसार काम की जांच की गई।

पौधों की प्रजातियों में विविधता, स्थानीय प्रजातियों का इस्तेमाल और संबंधित स्थान के लिए उनकी उपयुक्तता भी मूल्यांकन का हिस्सा रही। साथ ही यह भी देखा गया कि अपनाई गई व्यवस्था कितनी टिकाऊ है और उसे देश के दूसरे राष्ट्रीय राजमार्गों पर कितनी आसानी से लागू किया जा सकता है।

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प्रारंभिक जांच के बाद तीनों श्रेणियों से पांच-पांच यानी कुल 15 प्रोजेक्ट्स को अंतिम मूल्यांकन के लिए चुना गया। नामांकन के साथ जियो-टैग तस्वीरें, ड्रोन वीडियो, साइट आधारित पौधारोपण योजना और पौधों के जीवित रहने से जुड़ा डेटा भी प्रस्तुत किया गया था।

एनएचएआई ने ग्रीन हाईवेज एक्सीलेंस अवॉर्ड्स की शुरुआत वर्ष 2025 में ग्रीन हाईवेज पॉलिसी-2015 के तहत की थी। इन पुरस्कारों के जरिए हाईवे नेटवर्क के विस्तार के साथ पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ हरित विकास पर जोर देने की दिशा में किए जा रहे कामों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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