विशाखापट्टनम एयरपोर्ट पहुंचा राजस्थान के पत्रकारों का दल
राजस्थान से विशाखापट्टनम पहुंचे पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने नए अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का जायजा लिया। दौरे में एयरपोर्ट की क्षमता, निर्माण लागत और भविष्य के विस्तार की जानकारी दी गई। नया एयरपोर्ट पुराने हवाई अड्डे की जगह शुरू हुआ है और अगस्त 2026 से यहां से व्यावसायिक उड़ानों का संचालन किया जा रहा है। पत्रकारों ने विकास कार्यों को नजदीक से समझा।
- विशाखापट्टनम एयरपोर्ट की मौजूदा क्षमता 60 लाख यात्री सालाना है।
- अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का पहला चरण ₹5,640 करोड़ में तैयार हुआ।
- नए एयरपोर्ट की क्षमता भविष्य में 4 करोड़ यात्रियों तक बढ़ाने की योजना है।
Rajasthan Journalists Visit Visakhapatnam Airport : राजस्थान से आंध्र प्रदेश पहुंचे पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को विशाखापट्टनम का दौरा किया। भारत सरकार की डेवलपमेंट कम्युनिकेशन एंड इंफॉर्मेशन डिसेमिनेशन (DCID) योजना के तहत आयोजित इस मीडिया भ्रमण का उद्देश्य विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति को समझना है।

दौरे के दौरान पत्रकारों ने विशाखापट्टनम के नए अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का अवलोकन किया। इसका आधिकारिक नाम अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है, जिसे भोगापुरम एयरपोर्ट के नाम से भी जाना जाता है। फिलहाल व्यावसायिक उड़ानों का संचालन इसी नए एयरपोर्ट से हो रहा है।
नए एयरपोर्ट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 अगस्त 2026 को किया था। इसके बाद 17 अगस्त से सभी कमर्शियल उड़ानों को पुराने एयरपोर्ट से यहां स्थानांतरित कर दिया गया। अगस्त 2026 में शुरू हुए इस एयरपोर्ट को आधुनिक यात्री सुविधाओं और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
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PPP यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत एयरपोर्ट के पहले चरण के निर्माण पर करीब ₹5,640 करोड़ खर्च किए गए हैं। इसकी शुरुआती क्षमता सालाना 60 लाख यात्रियों की है। आगे के चरणों में विस्तार के बाद क्षमता को बढ़ाकर 4 करोड़ यात्रियों तक ले जाने की योजना है।
इससे पहले विशाखापट्टनम में संचालित एयरपोर्ट को विशाखापट्टनम अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (सिविल एन्क्लेव) कहा जाता था। यह भारतीय नौसेना के एयरबेस का हिस्सा था और पुराने एयरपोर्ट की सालाना यात्री क्षमता करीब 27 से 28 लाख थी।
DCID योजना के तहत आयोजित इस मीडिया दौरे का मकसद विकास परियोजनाओं की प्रगति और उनके प्रभाव की जानकारी पत्रकारों तक पहुंचाना है, ताकि इन गतिविधियों की जमीनी तस्वीर आम लोगों तक भी पहुंच सके।



