मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात, मदद लेने में न करें देर

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर राजस्थान में 10 सितंबर से 10 अक्टूबर तक विशेष जागरूकता अभियान चलेगा। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार पर जोर दिया जाएगा। रैलियों, कार्यशालाओं, क्विज, पोस्टर-निबंध प्रतियोगिताओं और सोशल मीडिया के जरिए संदेश पहुंचाया जाएगा। टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 पर अब तक एक लाख से अधिक कॉल मिल चुकी हैं, जिनमें जरूरतमंद लोगों को परामर्श और सहायता दी गई।

  • मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार पर जोर।
  • आत्महत्या रोकथाम के लिए 10 सितंबर से 10 अक्टूबर तक अभियान।
  • टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 पर एक लाख से ज्यादा कॉल।

Open conversation about mental health : विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के मौके पर राजस्थान में मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम को लेकर एक महीने का विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। यह अभियान 10 सितंबर से 10 अक्टूबर यानी विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस तक चलेगा। इसका उद्देश्य लोगों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को समझने, समय रहते मदद लेने और जरूरतमंद व्यक्ति का साथ देने के लिए जागरूक करना है।

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प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएमएचए) की अध्यक्ष गायत्री राठौड़ ने कहा कि आत्महत्या रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, समाज, शिक्षण संस्थान और विभिन्न सरकारी विभाग मिलकर ही इसके प्रभावी प्रयास कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी परेशान व्यक्ति की बात ध्यान से सुनना और उसे सही समय पर सहायता उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।

अभियान के दौरान प्रदेशभर में कई जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें रैलियां, कार्यशालाएं, क्विज, पोस्टर और निबंध प्रतियोगिताओं के साथ सोशल मीडिया अभियान भी शामिल हैं। इन गतिविधियों के जरिए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियों और झिझक को कम करने का प्रयास किया जाएगा।

मानसिक स्वास्थ्य सहायता को लोगों तक आसानी से पहुंचाने में टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 भी अहम भूमिका निभा रही है। राठौड़ के अनुसार, राजस्थान में अब तक इस हेल्पलाइन पर एक लाख से अधिक कॉल प्राप्त हो चुकी हैं। इनमें 95,305 कॉल लोगों ने खुद कीं, जबकि 16,072 कॉल टेली-मानस की ओर से शुरू की गईं। जरूरत के अनुसार कॉल करने वालों को मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

सरकार का फोकस बच्चों, किशोरों और युवाओं पर भी खास तौर पर है। राज-ममता और मनदर्पण कार्यक्रमों के माध्यम से तनाव प्रबंधन, भावनात्मक मजबूती और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग का मानना है कि शुरुआती स्तर पर भावनात्मक परेशानियों को पहचानकर सही सहयोग मिलने से गंभीर स्थितियों को रोकने में मदद मिल सकती है।

राठौड़ ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को लेकर समाज में अभी भी कई तरह की गलत धारणाएं और संकोच मौजूद हैं। ऐसे माहौल को बदलने की जरूरत है, ताकि व्यक्ति अपनी परेशानी बिना डर और झिझक के साझा कर सके। उन्होंने आमजन से अपील की कि मानसिक तनाव या किसी अन्य मानसिक समस्या का सामना करने पर चुप रहने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लें और आसपास किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भी मदद के लिए प्रोत्साहित करें।

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इसी दिशा में राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों की पंजीकरण और निगरानी व्यवस्था को मजबूत कर रहा है। प्रदेश के नशा मुक्ति केंद्रों को भी एसएमएचए के तहत पंजीकृत करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके अलावा निर्धारित मानकों के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण और स्थायी पंजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

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