सहकार से समृद्धि : राजस्थान बना देश के लिए नई मिसाल
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सहकारिता क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। अन्न भंडारण, ई-पैक्स, एम-पैक्स, डेयरी, किसान हितैषी योजनाओं और महिला सशक्तीकरण जैसे क्षेत्रों में राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी स्थान बनाया है। गांवों तक पहुंच रहे इन प्रयासों से आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती को नई गति मिली है।
- सहकार से समृद्धि अभियान में राजस्थान ने राष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान।
- राजस्थान अन्न भंडारण, ई-पैक्स और एम-पैक्स योजनाओं में देश में अग्रणी।
- सहकार मॉडल से किसान, महिलाएं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था हो रही मजबूत।
Rajasthan sets a new example for the country : सहकारिता को ग्रामीण विकास और आर्थिक सशक्तीकरण का मजबूत माध्यम बनाते हुए राजस्थान ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने केंद्र की सहकारी योजनाओं को तेजी से लागू किया है, जिसका लाभ किसानों, महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण परिवारों तक पहुंच रहा है।
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प्रदेश में सहकारिता का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में 42 हजार से अधिक सहकारी समितियों से करीब 1 करोड़ 35 लाख सदस्य जुड़े हैं। हाल ही में चलाए गए सदस्यता अभियान के जरिए लगभग 8.90 लाख नए लोगों को सहकारी परिवार से जोड़ा गया, जिससे गांव-ढाणी तक सहकारिता की पहुंच और मजबूत हुई है।
डिजिटल सहकारिता के क्षेत्र में भी राजस्थान ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। प्रदेश में चिन्हित 6,781 पैक्स में से 5,646 को ई-पैक्स में परिवर्तित किया जा चुका है। इन केंद्रों के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक ऑनलाइन लेनदेन दर्ज किए गए हैं, जो देश में सबसे अधिक माने जा रहे हैं। वहीं प्रत्येक पंचायत तक सहकारी व्यवस्था पहुंचाने के लक्ष्य के तहत 5,279 नई बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों का गठन किया गया है, जिनमें 1,977 एम-पैक्स शामिल हैं।
अन्न भंडारण क्षमता बढ़ाने के मामले में भी राजस्थान देश में अग्रणी बनकर उभरा है। पिछले दो वर्षों में 200 नए गोदामों को स्वीकृति मिली, जिनमें 120 का निर्माण पूरा हो चुका है जबकि शेष पर कार्य जारी है। आगामी वर्ष में 50 नए गोदाम बनाने की योजना है। इन परियोजनाओं से प्रदेश की भंडारण क्षमता में लगभग 1.25 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सहकारिता कार्यक्रम में राजस्थान की उपलब्धियां प्रमुखता से सामने आईं। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में 10 नए गोदामों का शिलान्यास, 50 गोदामों का लोकार्पण और 100 गोदामों का राज्य भंडारण निगम को हस्तांतरण किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मौजूद रहे।
डेयरी क्षेत्र में भी सहकारिता मॉडल के सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन और जिला दुग्ध संघों से जुड़े सदस्यों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। करीब 9.40 लाख दुग्ध उत्पादकों में 4.20 लाख से अधिक महिलाएं हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिला आर्थिक सशक्तीकरण को नई मजबूती मिली है। वहीं डेयरी संघों ने रिकॉर्ड 10 हजार करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज कर नया इतिहास बनाया है।
किसानों को आर्थिक सहयोग देने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजनाओं के तहत 71 लाख से अधिक किसानों के खातों में 2,726 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की गई है। इसके साथ ही गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना के जरिए हजारों पशुपालकों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
सहकारिता मॉडल केवल कृषि तक सीमित नहीं रहा। प्रदेश में 240 श्री अन्न आउटलेट्स स्थापित किए गए हैं, जबकि भारत टैक्सी जैसे डिजिटल सहकारी प्लेटफॉर्म से 17 हजार से अधिक कैब, ऑटो और बाइक चालक जुड़ चुके हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए जन औषधि केंद्रों का नेटवर्क बढ़ाया जा रहा है और पर्यावरण संरक्षण के तहत जयपुर के सुमेल गांव में सहकार वन विकसित किया जा रहा है।
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राज्य सरकार का मानना है कि सहकारिता केवल आर्थिक व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक भागीदारी का मजबूत माध्यम भी है। इसी सोच के साथ ग्रामीण विकास, आत्मनिर्भरता और समावेशी प्रगति को नई दिशा देने के लिए सहकारिता आधारित योजनाओं का विस्तार लगातार जारी है।



