साक्षरता से रोजगार तक, शिक्षा विभाग का नया प्लान
राजस्थान में साक्षरता अभियान को आगे की शिक्षा और रोजगार से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है। एसआईईएमएटी की 2026-27 कार्ययोजना में शैक्षिक नेतृत्व, डिजिटल प्रशिक्षण और सुरक्षित विद्यालयों पर जोर रहेगा। उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम में 35 लाख शिक्षार्थियों का लक्ष्य है, जिसमें 28.67 लाख का सर्वे पूरा हो चुका है। पात्र शिक्षार्थियों को ओपन स्कूल से जोड़ने की योजना है।
- साक्षरता से रोजगार तक शिक्षा को आगे बढ़ाने पर जोर।
- एसआईईएमएटी की नई कार्ययोजना में डिजिटल प्रशिक्षण शामिल।
- उल्लास कार्यक्रम में 35 लाख शिक्षार्थियों का लक्ष्य तय।
From literacy to employment: The Education Department’s new plan : राजस्थान में साक्षरता को केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित रखने के बजाय उसे आगे की शिक्षा, कौशल और रोजगार से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इसी दिशा में शिक्षा विभाग ने एसआईईएमएटी की वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना और उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की।
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शिक्षा संकुल में अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग, राजेश कुमार यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक उपयोगी और परिणाम आधारित बनाने पर चर्चा हुई। अधिकारियों को तय लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के साथ जमीनी स्तर पर योजनाओं की निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
एसआईईएमएटी की ट्रेनिंग में आएगा बदलाव
बैठक में राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान की गाइडलाइन के अनुरूप एसआईईएमएटी की गतिविधियों को जरूरत के हिसाब से तैयार करने पर जोर दिया गया। प्रशिक्षण में शैक्षिक नेतृत्व, नेतृत्व कौशल, स्कूलों के बुनियादी ढांचे, संसाधन जुटाने, लैंगिक संवेदनशीलता और बेहतर विद्यालय वातावरण जैसे विषय शामिल किए जाएंगे।
स्कूलों में सुरक्षित माहौल के साथ विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक-भावनात्मक विकास पर भी ध्यान देने की बात कही गई। इसके अलावा राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित करने और ओटीएस के सहयोग से डिजिटल सामग्री तैयार कर प्रशिक्षण को आधुनिक संसाधनों से जोड़ने पर भी विचार किया गया।
35 लाख शिक्षार्थियों को साक्षर करने का लक्ष्य
उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत वर्ष 2026-27 में 35 लाख शिक्षार्थियों को साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। विभाग के अनुसार 19 अगस्त तक 28.67 लाख शिक्षार्थियों, यानी लक्ष्य का 81.90 प्रतिशत सर्वे पूरा किया जा चुका है।
बैठक में शेष लक्ष्य को तय समय में पूरा करने के निर्देश दिए गए। योजना की निगरानी के लिए शिक्षा संबल ऐप का प्रभावी इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया गया। बीएड, डीएलएड, स्काउट-गाइड और एनसीसी/एनएसएस से जुड़े विद्यार्थियों को स्वयंसेवी शिक्षक के रूप में जोड़कर साक्षरता अभियान को मजबूत करने की योजना है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग कार्ययोजना बनाने के साथ सरकारी स्कूलों में उपलब्ध कक्षों का जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करने और बजट का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
अब साक्षरता के बाद आगे की पढ़ाई
बैठक में एक महत्वपूर्ण पहल पर भी जोर दिया गया। पिछले वर्ष साक्षर हुए करीब 35 लाख लोगों में से पात्र शिक्षार्थियों को राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल, जयपुर के माध्यम से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई से जोड़ने की तैयारी है।
इस पहल को ‘साक्षरता से शिक्षा, शिक्षा से कौशल और कौशल से रोजगार’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया है। इसका उद्देश्य यह है कि साक्षर होने के बाद शिक्षार्थियों की पढ़ाई वहीं न रुके, बल्कि वे आगे शिक्षा हासिल कर अपने लिए रोजगार और कौशल के अवसर तैयार कर सकें।
परीक्षा और नामांकन की जानकारी समय पर मिलेगी
10वीं और 12वीं में अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा, नामांकन, परीक्षा कार्यक्रम और शुल्क से जुड़ी जानकारी समय पर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। इसके लिए विद्यार्थियों को उनके एसएसओ आईडी, एसएमएस और व्हाट्सऐप के माध्यम से जरूरी सूचनाएं भेजने की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
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राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल से जुड़े विद्यार्थियों को पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से सफलता की कहानियां और प्रेरक वीडियो भी प्रसारित किए जाएंगे।
विभाग को अन्य राज्यों के साथ समन्वय कर वहां स्कूली शिक्षा से वंचित पात्र शिक्षार्थियों को भी राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल से जोड़ने के प्रयास करने को कहा गया है। राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल की सचिव डॉ. अरुणा शर्मा ने पात्र लोगों तक प्रभावी पहुंच बनाने और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही।



