आयुर्वेद केवल परंपरा नहीं, संपूर्ण विज्ञान है… 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर जयपुर में बड़ा मंथन
जयपुर में 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर आयोजित समारोह में आयुर्वेद को समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया। वक्ताओं ने योग, प्राणायाम, संतुलित आहार और उचित जीवनशैली को इसका अहम हिस्सा बताया। आयुष चिकित्सालयों को आधुनिक बनाने के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध होने की जानकारी दी गई। उत्कृष्ट कार्य करने वाले चिकित्सकों और कर्मचारियों को सम्मानित भी किया गया।
- आयुर्वेद केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक संपूर्ण विज्ञान है: प्रमुख शासन सचिव सुबीर कुमार।
- राज्य के आयुष चिकित्सालयों के आधुनिक विकास के लिए पर्याप्त बजट मौजूद, सूर्य नमस्कार स्कूल पाठ्यक्रम में हो शामिल।
- 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले आयुष डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों का हुआ सम्मान।
Major deliberations in Jaipur on the 11th National Ayurveda Day : 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान में राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद’ रखी गई। समारोह में आयुर्वेद विशेषज्ञों और वक्ताओं ने बदलती जीवनशैली के बीच आयुर्वेद की उपयोगिता और समग्र स्वास्थ्य में इसकी भूमिका पर चर्चा की।

आयुर्वेद विभाग के प्रमुख शासन सचिव सुबीर कुमार ने कहा कि आयुर्वेद को केवल पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसमें शरीर और मन दोनों के स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाता है। उन्होंने योग, व्यायाम और श्वास नियंत्रण को भी आयुर्वेदिक दृष्टिकोण का अहम हिस्सा बताया।
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उन्होंने कहा कि बच्चों को कम उम्र से ही योग और प्राणायाम से जोड़ने के लिए स्कूलों में सूर्य नमस्कार को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने पर विचार किया जा सकता है। उनके अनुसार केंद्र और राज्य सरकार प्रदेश में आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रही हैं।
सुबीर कुमार ने बताया कि प्रदेश के आयुष चिकित्सालयों को बेहतर और आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध है। उन्होंने आयुर्वेदाचार्यों से उपलब्ध राशि का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए अस्पतालों में जरूरी सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया। साथ ही आयुष चिकित्सकों से अपनी चिकित्सा सेवाओं और उपलब्धियों को आम लोगों तक पहुंचाने की अपील की, ताकि आयुर्वेद के प्रति जागरूकता और भरोसा बढ़ सके।
पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रो. डॉ. दीप नारायण पाण्डेय ने आयुर्वेद में शोध को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि महर्षि चरक की शिक्षाओं और आयुर्वेदिक संहिताओं में मौजूद ज्ञान का आधुनिक संदर्भ में व्यापक अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम और उपचार में आयुर्वेद की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के पूर्व प्रोफेसर कृष्ण खांडल ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए शरीर, इंद्रियों, मन और आत्मा के बीच संतुलन जरूरी है। उन्होंने उपचार के साथ उचित खान-पान को भी महत्वपूर्ण बताया और कहा कि भोजन का चयन आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आयुष चिकित्सा पद्धतियों की उपयोगिता को दुनिया के कई हिस्सों में स्वीकार किया गया है।
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समारोह के दौरान आयुर्वेद विभाग में उल्लेखनीय कार्य करने वाले चिकित्सकों, नर्सिंगकर्मियों, कम्पाउंडरों और अन्य कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। अतिथियों ने सम्मानित कार्मिकों को बधाई देते हुए जनसेवा और आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में आगे भी बेहतर कार्य करने की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आयुष चिकित्सक और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।



