राजस्थान में हर 10 KM पर मिलेगी हेल्थ क्लिनिक, 600 नए सब-सेंटर और भर्ती का मास्टर प्लान
राजस्थान में ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए हर 10 किलोमीटर पर सब-सेंटर स्थापित करने की तैयारी है। केंद्र सरकार के सहयोग से 600 नए सब-सेंटर खोले जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न संवर्गों में 50 हजार नियुक्तियों के बाद अब स्थानीय जरूरत के अनुसार डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, दवाइयों और जांच सुविधाओं के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है।
- 10 किलोमीटर पर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने की तैयारी
- 600 नए सब-सेंटर केंद्र के सहयोग से होंगे स्थापित
- 50 हजार नियुक्तियों के बाद मानव संसाधन का बेहतर प्रबंधन
Health clinics will be available every 10 km in Rajasthan : राजस्थान के ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए सरकार ने नया फोकस तय किया है। प्रदेश में लोगों को घर के नजदीक प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए हर 10 किलोमीटर पर सब-सेंटर स्थापित करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके तहत केंद्र सरकार के सहयोग से 600 नए सब-सेंटर स्थापित किए जाने हैं।
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चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सोमवार को स्वास्थ्य भवन में सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं, चिकित्सकीय मानव संसाधन, दवाइयों, जांच व्यवस्था और मौसमी बीमारियों की स्थिति की समीक्षा की गई।

बैठक में मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न संवर्गों में करीब 50 हजार पदों पर नियुक्तियां दी जा चुकी हैं। अब चुनौती उपलब्ध कर्मचारियों को सही जगह पर तैनात कर उनकी सेवाओं का प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कर्मचारियों की तैनाती केवल स्वीकृत पदों के आधार पर नहीं, बल्कि स्थानीय जरूरत और मरीजों के भार को ध्यान में रखकर की जाए।
खींवसर ने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियों, मरीजों की संख्या और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का आकलन कर मानव संसाधन की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से ट्रोमा सेंटर, प्रसव सुविधाओं वाले स्वास्थ्य केंद्रों और दूरस्थ इलाकों में डॉक्टरों तथा प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
स्वास्थ्य केंद्रों में सुरक्षा पर भी फोकस
बैठक में चिकित्सा संस्थानों के भवनों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठा। मंत्री ने कहा कि अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों के भवनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संस्था प्रभारी की तय की जाएगी। इसके लिए विभाग की ओर से अलग परिपत्र जारी किया जाएगा।
उन्होंने प्रदेश के सभी चिकित्सा संस्थानों में अगले तीन महीने में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए। निदेशक जनस्वास्थ्य को इसकी नियमित निगरानी करने के लिए कहा गया है।
1699 चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती पूरी
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS) के माध्यम से 1,699 चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती पूरी कर उन्हें नियुक्तियां दी जा चुकी हैं। इसके अलावा 600 चिकित्सा अधिकारियों के पदों पर 13 अक्टूबर तक ऑनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं। इन पदों के लिए दिसंबर में परीक्षा प्रस्तावित है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यकता से अधिक मानव संसाधन, चिकित्सा उपकरण या दवाइयां उपलब्ध हैं, उनका जरूरत वाले केंद्रों में बेहतर इस्तेमाल किया जाए। जिन स्वास्थ्य केंद्रों के नए भवन तैयार हो चुके हैं, वहां जल्द भवन आवंटन पूरा कर स्वास्थ्य सेवाएं शुरू करने के निर्देश भी दिए गए।
मौसमी बीमारियों पर नियमित निगरानी
मौसमी बीमारियों को देखते हुए सभी जिलों में दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता की लगातार समीक्षा करने को कहा गया। अधिकारियों को बचाव और रोकथाम से जुड़ी गतिविधियों पर भी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।
राठौड़ ने कहा कि सभी स्वास्थ्य केंद्र निर्धारित समय पर खुलें और वहां डॉक्टरों तथा अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की उपलब्धता बनी रहे। अक्टूबर में प्रसव वाली उच्च जोखिम की गर्भवती महिलाओं की वन-टू-वन मॉनिटरिंग करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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इसके साथ ही ऑनलाइन रिपोर्टिंग पोर्टल पर सूचनाएं समय पर अपडेट करने और विभागीय गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया। बैठक में टीबी मुक्त भारत अभियान और एचपीवी टीकाकरण में भी तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, अतिरिक्त मिशन निदेशक डॉ. टी. शुभमंगला, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।



