राजस्थान के दूर-दराज गांवों में भी चलेगा सुपरफास्ट इंटरनेट, मुख्य सचिव ने दिए सख्त निर्देश
राजस्थान में दूरदराज, सीमावर्ती और जनजातीय क्षेत्रों तक तेज इंटरनेट पहुंचाने को सरकार ने प्राथमिकता दी है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने 4G सेचुरेशन परियोजना में लंबित भूमि आवंटन और अनुमतियों को तेजी से निपटाने के निर्देश दिए। साथ ही नए राइट ऑफ वे नियम लागू करने और 150 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि का पूरा लाभ लेने के लिए समयबद्ध कार्रवाई पर जोर दिया गया।
- मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राज्य के दूर-दराज गांवों और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुपरफास्ट इंटरनेट कनेक्टिविटी को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
- सुपरफास्ट इंटरनेट का दायरा बढ़ाने के लिए 4G सेचुरेशन प्रोजेक्ट के तहत जमीन आवंटन के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
- मुख्य सचिव ने सभी निकायों को 30 सितंबर तक नए ROW नियम अपनाने और ऑफलाइन प्रक्रिया बंद करने का हुक्म सुनाया।
Superfast internet will be available even in remote villages of Rajasthan :राजस्थान में डिजिटल नेटवर्क को मजबूत करने और दूरदराज इलाकों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने के लिए सरकार ने काम तेज करने के निर्देश दिए हैं। शासन सचिवालय में शुक्रवार को मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में 18वीं स्टेट ब्रॉडबैंड कमेटी की बैठक हुई। इसमें डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, 4G सेचुरेशन परियोजना और दूरसंचार राइट ऑफ वे नियमों की प्रगति की समीक्षा की गई।

बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि सीमावर्ती, जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों के गांवों तक निर्बाध डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट की सुविधा के अभाव में किसी भी क्षेत्र के लोगों को सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।
30 सितंबर तक नए RoW नियम अपनाने के निर्देश
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि 1 जनवरी 2025 से प्रभावी नए राइट ऑफ वे (RoW) नियमों को सभी नगरीय निकाय, निगम और सार्वजनिक उपक्रम 30 सितंबर तक अनिवार्य रूप से अपना लें। उन्होंने ऑनलाइन प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने पर जोर देते हुए कहा कि ऑफलाइन आवेदन की व्यवस्था खत्म कर सभी आवेदन स्टेट RoW पोर्टल के जरिए किए जाएं।
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बैठक में बताया गया कि सात प्रमुख विभाग पहले ही राज्य के RoW पोर्टल से जुड़ चुके हैं। बाकी संस्थाओं को भी जल्द पोर्टल से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अनुमति प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ समय भी कम हो।
150 करोड़ की प्रोत्साहन राशि पर नजर
विशेष सहायता योजना के तहत राज्य को 150 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि हासिल करने के लिए जरूरी सुधारों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि 31 मार्च 2026 तक लंबित सभी RoW आवेदनों का निस्तारण किया जा चुका है।
मुख्य सचिव ने बताया कि RoW अनुमतियों के निस्तारण का औसत समय करीब 32 दिन है, जबकि इसे 45 दिन से कम रखने का लक्ष्य है। उन्होंने संशोधित भारतनेट परियोजना एडेंडम और ऊर्जा विभाग की कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म तथा समेकित बिलिंग व्यवस्था से जुड़े काम समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।
सीमावर्ती गांवों को 4G नेटवर्क से जोड़ने पर जोर
4G सेचुरेशन परियोजना की समीक्षा के दौरान उदयपुर, बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर सहित कुछ जिलों में मोबाइल टावरों के लिए भूमि आवंटन के लंबित मामलों पर चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने संबंधित जिला कलेक्टरों को व्यक्तिगत स्तर पर निगरानी कर मामलों का जल्द समाधान करने को कहा।
बाड़मेर और श्रीगंगानगर समेत सीमावर्ती जिलों के ऐसे गांव, जहां अभी मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंचा है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर कनेक्टिविटी से जोड़ने के निर्देश दिए गए।
टेलीकॉम कंपनियों की समस्याओं पर भी चर्चा
बैठक में दूरसंचार सेवा प्रदाताओं की ओर से उठाए गए मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने स्थानीय निकायों से अस्वीकृत आवेदनों की प्रोसेसिंग फीस वापसी पर विचार करने, स्मार्ट मीटरिंग और समूह बिलिंग की प्रक्रिया आसान बनाने तथा मोबाइल टावरों से जुड़े मामलों का RoW नियमों के अनुसार निस्तारण करने के निर्देश दिए।
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उन्होंने कहा कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया या आधारहीन शिकायतों के कारण मोबाइल टावर लगाने पर एकतरफा रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। इसके साथ ही स्मार्ट सिटी डक्ट और नगरपालिका क्षेत्रों में केबल बिछाने के शुल्क को व्यावहारिक एवं मानकीकृत रखने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के शासन सचिव रवि कुमार सुरपुर, आयुक्त हिमांशु गुप्ता, दूरसंचार विभाग के प्रतिनिधियों सहित ऊर्जा, पंचायती राज, राजस्व और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल हुए।



