‘लखपति दीदी’ के लिए योजनाओं का नया प्लान

राजस्थान में ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए ‘लखपति दीदी’ पहल के तहत विभागीय योजनाओं को आपस में जोड़ने पर जोर दिया गया। जयपुर में हुई स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में कृषि, पशुपालन, कौशल विकास, पर्यटन और सूक्ष्म उद्यम जैसे क्षेत्रों से महिलाओं को जोड़ने पर चर्चा हुई। लक्ष्य महिलाओं को स्थायी आजीविका और आर्थिक आत्मनिर्भरता के अवसर देना है।

  • लखपति दीदी पहल के तहत ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने पर जोर।
  • विभागीय योजनाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर नए अवसर विकसित किए जाएंगे।
  • महिला आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कृषि, पशुपालन, पर्यटन और उद्यमिता पर फोकस।

New plan for ‘Lakhpati Didi’ schemes : राजस्थान में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए ‘लखपति दीदी’ पहल के तहत विभागीय योजनाओं के बेहतर तालमेल पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को लखपति दीदी स्टीयरिंग कमेटी की बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता ग्रामीण विकास विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने की।

‘लखपति दीदी’ के लिए योजनाओं का नया प्लान
Image Source : Via Dipr

बैठक में इस बात पर मंथन हुआ कि अलग-अलग विभागों की योजनाओं का लाभ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं तक उनकी वास्तविक जरूरत के हिसाब से कैसे पहुंचाया जाए। अधिकारियों ने स्थानीय परिस्थितियों, महिलाओं की मौजूदा आजीविका और आय बढ़ाने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए योजनाओं को आपस में जोड़ने पर चर्चा की।

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‘लखपति दीदी’ पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को ऐसी आजीविका गतिविधियों से जोड़ना है, जिससे उनकी वार्षिक घरेलू आय एक लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सके। इसके लिए किसी एक योजना पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न विभागों के संसाधनों और विशेषज्ञता का संयुक्त उपयोग करने की रणनीति पर जोर दिया गया।

बैठक में कृषि और पशुपालन के साथ सूक्ष्म उद्यम, कौशल विकास, पर्यटन और अन्य संभावित क्षेत्रों में महिलाओं के लिए आय के अवसर विकसित करने पर चर्चा हुई। साथ ही पहले से चल रही आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के उपायों पर भी विचार किया गया।

अधिकारियों ने कहा कि योजनाओं का फायदा सिर्फ पात्रता पूरी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि योजनाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की स्थानीय जरूरत, उपलब्ध संसाधन और उनके मौजूदा काम के अनुरूप जमीन पर दिखाई दें।

बैठक में इंटर-डिपार्टमेंटल कोऑर्डिनेशन और कन्वर्जेंस को प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके जरिए अलग-अलग सरकारी योजनाओं के लाभों को एक साथ जोड़कर महिलाओं के लिए ज्यादा व्यापक और टिकाऊ आजीविका मॉडल तैयार करने की कोशिश की जाएगी।

स्टीयरिंग कमेटी के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की आय में बढ़ोतरी और आर्थिक सशक्तिकरण को गति देने के लिए एकीकृत प्रयास किए जा रहे हैं। बैठक में योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में डीआईजी पुलिस पंकज चौधरी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. जागेश्वर प्रसाद, VBGRAMG की कमिश्नर पुष्पा सत्यानी सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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सरकार की इस पहल में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को सिर्फ योजनाओं का लाभार्थी बनाने के बजाय उन्हें आय सृजन की गतिविधियों से जोड़ने पर फोकस है। इससे ग्रामीण स्तर पर महिलाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते खुलने के साथ उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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